हाल ही में केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री श्री सत्यपाल सिंह (Satyapal Singh) ने मनुष्य की उत्पत्ति से सम्बन्धित बहुप्रचलित और बहुप्रचारित “डार्विन थ्योरी” (Darwin Theory) की वैज्ञानिकता को चुनौती देते हुए अपना बयान दिया था. जिस पर भारत के कथित बुद्धिजीवियों ने बिना किसी ठोस वजह के अथवा बिना किसी तर्क-वितर्क के हंगामा मचाना शुरू कर दिया था (क्योंकि यह बयान भाजपा सरकार के मंत्री ने दिया था).

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यदि आप सोचते हैं कि फेसबुक पर लिखने से कुछ नहीं होता, तो कुछ मित्रों की इस संघर्ष गाथा को पढ़िए. भारत के वास्तविक इतिहास के साथ रोमिला थापर छाप “नकली इतिहासकारों” (Fake Historians) ने जो कुकर्म किए हैं, उसे बदलने के लिए पिछले साढ़े तीन वर्ष से ललित मिश्रा और CA अनूप कुमार शर्मा के नेतृत्व में कुछ विद्वानों ने एक समूह बनाकर लगातार मोदी सरकार का पीछा किया, और अंततः लम्बे इंतज़ार के बाद इसे हासिल किया.

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