अक्सर आपने कुछ "कथित इतिहासकारों" के मुँह से यह सुना होगा, कि "भारत तो कभी एक राष्ट्र था ही नहीं...", "यह तो टुकड़ों में बंटा हुआ एक भूभाग है, जिसे जबरन राष्ट्रवाद के नाम पर एक रखने का प्रयास किया जाता है...".

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