अधिकाँश मित्रों ने महाराज फ़तेह बहादुर शाही (Fateh Bahadur Shahi) के बारे में अधिक पढ़ा-सुना नहीं होगा. महाराज फतेहबहादुर शाही वर्तमान उत्तरप्रदेश और बिहार के बड़े इलाके एवं सीमावर्ती क्षेत्र के शासक रहे हैं.

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जब इतिहास को सतत विकृत (Distorted History) करके पेश किया जाता है, और पाठ्यक्रमों तथा लोक जनश्रुतियों से सच्चा इतिहास धीरे-धीरे गायब होने लगता है तब ऐसे-ऐसे सामाजिक विकार पैदा हो जाते हैं कि बयान नहीं किया जा सकता, और ऐसा अक्सर केवल हिन्दुओं के साथ ही होता है, क्योंकि अव्वल तो सही इतिहास जानने के बारे में हमारी रूचि कम है, और ऊपर से वामपंथ पोषित संस्थाओं (Fake Historians) तथा “सेकुलरिज्म नामक एड्स की बीमारी” ने हिन्दू मानस को इतना बोदा, बेवकूफ और सुस्त बना दिया है कि सामने वाला जो भी इतिहास कहता है उस पर हम सहज विश्वास कर लेते हैं.

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गुजरात के अहमदाबाद उर्फ कर्णावती (Ahmedabad, Karnavati) शहर में एक जामा मस्जिद है, जिसे भारत के नकली इतिहासकार यह कहकर प्रचारित करते हैं कि इसे 1452 में अहमदशाह ने बनवाया था.

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यदि आप सोचते हैं कि फेसबुक पर लिखने से कुछ नहीं होता, तो कुछ मित्रों की इस संघर्ष गाथा को पढ़िए. भारत के वास्तविक इतिहास के साथ रोमिला थापर छाप “नकली इतिहासकारों” (Fake Historians) ने जो कुकर्म किए हैं, उसे बदलने के लिए पिछले साढ़े तीन वर्ष से ललित मिश्रा और CA अनूप कुमार शर्मा के नेतृत्व में कुछ विद्वानों ने एक समूह बनाकर लगातार मोदी सरकार का पीछा किया, और अंततः लम्बे इंतज़ार के बाद इसे हासिल किया.

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