भीड़ द्वारा हत्या जैसे “नकली विमर्श” गढ़कर विश्व पटल पर भारत को बदनाम करने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए कर्नाटक से एक खबर है.

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पिछले कुछ वर्षों से उत्तरी भारत में राजनैतिक महत्त्वाकांक्षा और देश तोड़ने की योजना के तहत दलित-मुस्लिम गठजोड़ और इनके बीच तथाकथित सामाजिक समरसता निर्माण करने के खोखले प्रयास चल रहे हैं.

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दलित-मुस्लिम एकता कितना खोखला नारा है, इस बारे में हम पिछले भाग में संत रविदास और संत कबीर के कुछ उद्धरणों द्वारा जान चुके हैं... पहले भाग को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें...

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