बात सन 2005 की है, मुझे पांच छः साल बेसब्र प्रतीक्षा के बाद लैंडलाइन फोन का कनेक्शन मिला था तब तक उत्तराखंड के पहाड़ में मोबाइल फोन नहीं थे, इंटरनेट डाटा तो पूरे देश में दूर की बात थी हम पहाड़ में ब्रॉडबैंड ईमेल आदि भी नहीं जानते थे.

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यदि 15 अगस्त 2013 में 810 Million अर्थात 81 करोड़ याने कि 66% जनता इतनी गरीब थी कि वो सरकारी राशन की दुकानों पर मिलने वाले अनाज को खरीदने में असमर्थ थी और उनको जिन्दा रखने के लिये खाद्य सुरक्षा अधिनियम लाया गया जिसके अंतर्गत उन्हें क्रमशः 1, 2 और 3 रुपयों में गेहूं, ज्वार या बाजरा और चावल दिये जाने का प्रावधान किया गया तो अब 7 सवाल यह उठते हैं कि : 

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