पिछले कुछ समय से कई “हिन्दू” बाबा, प्रवचनकार, संत इत्यादि विभिन्न आरोपों में पकड़े जा रहे हैं या जेल जा रहे हैं. जब भी ऐसा कोई मौका आता है, तब वामपंथियों की पौ-बारह हो जाती है. ऐसे बाबाओं को लेकर अर्थात प्रकारांतर से हिन्दू धर्म को लेकर “वामी मज़हब” वाले लोग (जी हाँ!!! वामपंथ भी एक मज़हब है, इस्लाम से भी खतरनाक) हिंदुओं को कोसने लगते हैं कि “हिंदुओं के धर्म में वैज्ञानिकता नहीं है”...

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शत्रु का शत्रु मित्र होता है इस सिद्धांत से अक्सर "वामी-इलहामी" कंधे से कंधा मिलाकर भारत के राष्ट्रवादीयों को निपटाने में तत्पर दिखाई देते हैं. वामियों को इलहमियों में कोई फासिस्ट प्रवृत्ति नजर नहीं आती, भगवे के अंधे को हरा अच्छा दिखाता होगा शायद.

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