पश्चिमी विचारक मारिया विर्थ का यह लेख भारत के कई क्षेत्रों में पसंद और कई में नापसंद किया जाएगा, क्योंकि इसमें उन्होंने भारत की जाति-व्यवस्था को तोड़ने तथा ब्राह्मणों पर आए दिन होने वाले वैचारिक हमलों की पूरी पोल खोल दी है.

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पिछले भाग में हमने देखा कि किस तरह “इस्लाम में जातिवाद नहीं है” का झूठ बोलकर कई मुस्लिम जातियाँ, हिन्दुओं के हिस्से का आरक्षण चट कर रही हैं. सरकारें भी वोट बैंक के चक्कर में हिन्दुओं को एक “अर्धसत्य” बोल-बोलकर बरगलाती रहती हैं कि “मुसलमानों को धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा”.

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