कुछ झूठ ऐसे होते हैं, जो लम्बे समय तक सच मान लिए जाते हैं. इन्हीं में से एक झूठ यह है कि मोहम्मद अली जिन्ना “सेक्यूलर” थे और 1947 से पहले गांधी-नेहरू के साथ हुए सत्ता एवं शक्ति संघर्ष की राजनीति में हारने के कारण जिन्ना ने पाकिस्तान के निर्माण का दाँव चला. लेकिन यह सच नहीं है, “पाकिस्तान” नामक इस्लामिक शरिया देश की कल्पना 1947 से बहुत-बहुत पहले अर्थात 1937 में ही रखी जा चुकी थी.

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भारत में बाबा साहब आंबेडकर के नाम पर कई राजनैतिक और सामाजिक “दुकानों” ने अपने-अपने अर्थों के अनुसार “स्टॉल” लगाए हैं, तथा बाबासाहब के आदर्शों, उनके कथनों एवं उनके तथ्यों को तोड़मरोड़ कर उनकी दुकानदारी के अनुसार जनता के सामने पेश किया है.

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दलित-मुस्लिम एकता कितना खोखला नारा है, इस बारे में हम पिछले भाग में संत रविदास और संत कबीर के कुछ उद्धरणों द्वारा जान चुके हैं... पहले भाग को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें...

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