बुधवार, 01 अगस्त 2018 11:27

वे पंद्रह दिन :- ३ अगस्त, १९४७

आज के दिन गांधीजी की महाराजा हरिसिंह से भेंट होना तय थी. इस सन्दर्भ का एक औपचारिक पत्र कश्मीर रियासत के दीवान, रामचंद्र काक ने गांधीजी के श्रीनगर में आगमन वाले दिन ही दे दिया था. आज ३ अगस्त की सुबह भी गांधीजी के लिए हमेशा की तरह ही थी. अगस्त का महीना होने के बावजूद किशोरीलाल सेठी के घर अच्छी खासी ठण्ड थी. अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार गांधीजी मुंह अंधेरे ही उठ गए थे. उनकी नातिन ‘मनु’ तो मानो उनकी परछाईं समान ही थी. इस कारण जैसे ही गांधीजी उठे, वह भी जाग गयी थी. 

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