दारुल उलूम देवबंद और तबलीगी जमात के बीच घमासान

Written by सोमवार, 13 फरवरी 2017 20:50

दारुल उलूम देवबंद और तबलीगी जमात के बीच का झगड़ा गंभीर स्वरूप लेता जा रहा है. जमात से सम्बन्धित मौलाना अबू अरशद कान्धलवी ने दारुल उलूम देवबंद पर करोड़ों रूपए के घोटाले का आरोप लगाया है.

मौलाना ने कहा है कि दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी किए जाने वाले फतवों पर सौदेबाजी की जाती है यानी मोटी धनराशि लेकर मुफ्ती लोग फ़तवा निकाल देते हैं. मौलाना अरशद के फेसबुक से ली गई स्क्रीनशॉट के अनुसार उन्होंने देवबंदियों को निशाना बनाते हुए साफ़ लिखा है कि क्या कोई बता सकता है कि दारुल उलूम देवबंद का कौन सा बड़ा उस्ताद हदीस जसासा का मुनकर है? दूसरी पोस्ट में लिखा है कि क्या कोई बता सकता है कि दारुल उलूम देवबंद के किस उस्ताद पर करोड़ों की हेराफेरी का आरोप है?

इन दोनों ही आरोपों का देवबंद की तरफ से न कोई खंडन आया न ही कोई जवाब आया. मौलाना अरशद ने आगे यह भी पूछा है कि क्या कोई बता सकता है कि दारुल उलूम देवबंद में कौन लोग पैसा लेकर प्रवेश दिलवाते हैं? अरशद यहीं पर नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि मेरा मुँह मत खुलवाओ वर्ना उन लोगों के नाम भी सामने आ जाएँगे, जिन्होंने मनचाहे फतवे हासिल करने के लिए करोड़ों रूपए खर्च किए हैं. वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अंग्रेजों और आर्य समाज से लेकर हर फितने का मुकाबला कर चुके हैं. पूरी दुनिया में उन्हें खरीदने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन उनके ईमान पर कभी कोई हर्फ़ नहीं आया.

इधर तबलीगी जमात के नेता खुलेआम दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं. मेरठ में तबलीगी जमात के जलसे में साफ़-साफ़ धमकी दी गई कि जो व्यक्ति दारुल उलूम देवबंद का साथ देगा उससे बाद में निपटा जाएगा. मेरठ वाले सम्मेलन में पश्चिमी यूपी के लगभग दो हजार मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था. तबलीगी जमात की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में संभल में तीन दिन का तबलीगी इज्तिमा आयोजित हुआ, जिसमें लगभग पचास लाख मुस्लिमों ने हिस्सा लिया, जिसमें मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी ने संबोधित किया जिनके खिलाफ दारुल उलूम देवबंद फ़तवा जारी कर चुका है. इस सम्मेलन को विफल करने के लिए दारुल उलूम देवबंद ने पूरा जोर लगा दिया था, लेकिन तीस लाख की उम्मीद वाले इस सम्मेलन में पचास लाख लोग आ जुटे.

दारुल उलूम देवबंद की पकड़ ढीली होती जा रही है और आर्थिक घोटालों के आरोप भी तेज़ होते जा रहे हैं. लगता है मुस्लिमों के बीच एक नया नेतृत्व पैदा होने को है.

(स्रोत अखबार मशरिक, 15 दिसम्बर और दैनिक सहाफत 27 दिसम्बर)

Read 1544 times