नए क्रांतिकारी रियल एस्टेट क़ानून के प्रमुख दस बिंदु

Written by सोमवार, 01 मई 2017 08:29

“अपना घर” हर किसी का एक सपना होता है. सामान्य व्यक्ति अपनी जीवन भर की जमापूँजी से एक मकान और बच्चों का विवाह करने के सपने देखता है. लेकिन जब उसकी इस जमापूँजी और सपने को किसी बिल्डर द्वारा तगड़ी चोट पहुँचा दी जाती है तब वह नैराश्य अवस्था में चला जाता है.

पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट और बिल्डर्स के धंधे में बड़े-बड़े माफियाओं, गुंडों, नेताओं और अफसरों का कब्ज़ा हो चूका है. ये लोग इतने प्रभावशाली और दबंग होते हैं कि सामान्य व्यक्ति अपने साथ हुई धोखाधड़ी और लूट की शिकायत करके भी कुछ हासिल नहीं कर पाता. आधे-अधूरे प्रोजेक्ट, बड़ी-बड़ी बातें बनाकर ग्राहक को बेवकूफ बनाना, सुविधाओं का वादा करके नहीं निभाना, देरी से कब्ज़ा देना, रजिस्ट्री इत्यादि में घालमेल करना जैसे कई काण्ड आए दिन बिल्डर्स और डेवलपर्स लोग सामान्य व्यक्ति के साथ करते ही रहते हैं. आम जनता के साथ होने वाली इस धोखाधड़ी और लूट को रोकने के लिए मोदी सरकार ने “रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (RERA)” लोकसभा व राज्यसभा से पास कर दिया है तथा एक मई से वह लागू हो जाएगा... आईये संक्षिप्त में इस क़ानून के प्रमुख दस बिंदु आप जान लीजिए...

१) इस क़ानून के अनुसार प्रत्येक राज्य में रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथरिटी (यानी एक नियामक प्राधिकरण) बनाया जाएगा, जिसमें किसी भी बिल्डर अथवा कौलोनाईजर के खिलाफ आने वाली शिकायतों का निपटारा राज्य स्तर पर ही किया जाएगा. बिल्डर और ग्राहक के बीच होने वाले किसी भी विवाद में इस प्राधिकरण की पहली भूमिका होगी... इस प्राधिकरण को न्यायिक अधिकारों से भी लैस किया जाएगा.

२) इस क़ानून के तहत यह राज्य नियामक प्राधिकरण आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की योजनाओं, इनके खर्चों तथा धन के अंतरण पर निगरानी रखेगा.

३) इस क़ानून के तहत प्रत्येक बिल्डर को अपनी आवासीय योजना की कुल लागत का 70% धन एक विशेष बैंक अकाउंट में रखना आवश्यक होगा. इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा, की ग्राहकों से बुकिंग एडवांस लेने के बाद बिल्डर उस धन का उपयोग दूसरे नए-नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने में न कर सके. चूंकि यह 70% धनराशि प्राधिकरण के पास सुरक्षित रहेगी तो प्रोजेक्ट्स मंआ होने वाली देरी को भी टाला जा सकेगा.

४) इस क़ानून के तहत प्रत्येक बिल्डर और कालोनाईजर को अपने प्रोजेक्ट्स से सम्बंधित सभी जानकारी जैसे, नक्शा, सरकारी अनुमतियाँ, जमीन की स्थिति, उप-ठेकेदारों की नियुक्ति, पूर्णता दिनांक संबंधी योजना की सभी डीटेल्स नियामक प्राधिकरण के पास जमा करनी होंगी, जिसे एक वेबसाईट पर डालकर सार्वजनिक किया जाएगा.

५) बिल्डर्स अक्सर “बिल्ट-अप एरिया” और “कारपेट एरिया” में घालमेल तथा धोखाधड़ी करते हैं. इस क़ानून के बाद अब “बिल्ट-अप-एरिया” की अवधारणा समाप्त होगी, केवल “कारपेट एरिया” को ही माना जाएगा.

६) आज की स्थिति में किसी भी कारणवश मकान बनने में देरी होती है अथवा, प्रोजेक्ट लेट होता है तो बिल्डर का नुक्सान नहीं होता, ग्राहक का नुक्सान होता है. इस नए क़ानून में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी होती है, तो बिल्डर अपने ग्राहक को उसकी मासिक किस्तों पर लगने वाले ब्याज की भरपाई बैंक को करेगा.

७) नियामक प्राधिकरण के फैसले का पालन नहीं करने पर किसी भी बिल्डर को अधिकतम तीन वर्ष की जेल और जुर्माना हो किया जा सकता है.

८) मकान का खरीदार, अपने बिल्डर से यह लिखित में यह प्राप्त कर सकेगा कि यदि एक वर्ष तक नए मकान में कोई गड़बड़ी या खराबी पाई गई तो बिल्डर निशुल्क ठीक करके देगा.

९) वर्तमान में बिल्डर्स अपनी सुविधा के अनुसार कई बार योजना में फेरबदल कर डालते हैं और ग्राहक को उसकी अधिक कीमत चुकानी पद जाती है. नए क़ानून में यह स्पष्ट किया गया है की डेवलपर अपनी मर्जी से नक़्शे अथवा मकान की डिजाइन में कोई परिवर्तन नहीं कर सकेगा. जो योजना बिल्डर ने शुरू में प्राधिकरण के पास जमा की है, उसे उसी रेट्स और डिजाइन के मकान बनाने होंगे.

१०) अंत में एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक बिल्डर को अपनी कालोनी अथवा आवासीय योजना में 500 स्क्वेयर मीटर का एक मकान अथवा मल्टी-स्टोरी में आठ फ़्लैट RERA अर्थात नियामक प्राधिकरण के नाम रजिस्ट्री करवाने होंगे, ताकि किसी भी गंभीर विवाद के बाद अथवा न्यायालय के निर्देशों के अनुसार धोखाधड़ी के शिकार ग्राहक को उन आठ में से एक फ़्लैट उसी कीमत पर दिया जा सके.

मोदी सरकार के इस क़ानून को “क्रांतिकारी” कहा जा रहा है, लेकिन छोटे बिल्डर्स इससे नाराज हैं, उनका कहना है कि इस क़ानून के बाद उनका धंधा करना मुश्किल हो जाएगा, और अधिकाँश बड़े कालोनाईजर और बिल्डर कम्पनियाँ उनका कारोबार हथिया लेंगी, क्योंकि 70% की धनराशि को रिजर्व रखना उन्हीं के लिए संभव है, छोटे बिल्डर के लिए नहीं. बहरहाल.... इस रियल एस्टेट क़ानून के बनने से सामान्य व्यक्ति खुश है, क्योंकि अभी तक उसके पास अपने साथ हुई धोखाधड़ी और लूट की शिकायत का कोई अवसर नहीं था, ना ही इन बड़े-बड़े लोगों से उसका बचाव करने वाला कोई क़ानून था.

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