राफेल युद्धक विमान : "तथाकथित स्कैम"-सच्चाई और तर्क

Written by गुरुवार, 08 फरवरी 2018 18:40

हाल ही में फ्रांस से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमान “राफेल” (Rafale Deal) की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर विपक्षी नेता राहुल गाँधी द्वारा मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. लेकिन चूँकि भ्रष्टाचार के मामले में काँग्रेस की साख इतनी “बेहतरीन” है कि अब राहुल गाँधी के आरोपों पर कुछ कहना बेकार ही है. परन्तु जनता के बीच गलत सन्देश और दुष्प्रचार की पहुँच न हो... सही बात तथ्यों और तर्कों के साथ पहुँचे इसलिए यह लेख प्रस्तुत है. इसमें बिन्दुवार “तथाकथित राफेल विमान (Rafale Fighter Plane) घोटाले” के बारे में बताया गया है... आगे पढ़िए.

राफेल डील में खर्च बढ़ा है, जिसके कारण स्पष्ट कर रहा हूँ. पहला कारण है राफेल में अतिरिक्त अत्याधुनिक उपकरण भी अब सम्मिलित किये गए हैं जो पहले नहीं थे, किन्तु इनकी जानकारी भारत सरकार चाहे भी तो नहीं दे सकती है क्योंकि कांग्रेस के शासन में ही फ्रांस से 2008 में समझौता हुआ था कि फ्रांस द्वारा दिए गए क्लासिफाइड जानकारी को भारत गुप्त रखेगा. राफेल संसार के सर्वश्रेष्ठ युद्धक विमानों में से है और इसके कुछ लक्षण तो सर्वोत्तम हैं. 2011 में छ कम्पनियों ने टेंडर भरे थे जिनके बारे में वायुसेना की तकनीकी समिति ने जनवरी 2012 में रिपोर्ट दी थी कि भारत की जो आवश्यकता है उसके लिए राफेल सबसे उत्तम है. राफेल की वह तकनीकी श्रेष्ठता क्या है, और भारत की क्या आवश्यकता है... यह भारत सरकार किसी को नहीं बता सकती कांग्रेस के ही शासन काल में ही ऐसा करार फ्रांस ने करवा लिया था. यह फ्रांस का सर्वोत्तम युद्धक विमान है. फ्रांस अपनी सर्वोत्तम तकनीक को गुप्त रखना चाहता है, तो इसमें किसे दिक्कत है?

राफेल की एक खासियत बता रहा हूँ -- एक राफेल विमान तीन ब्रह्मोस मिसाइल को एकसाथ लेकर चार हज़ार किलोमीटर तक उड़ सकता है, दो हज़ार किमी जाना और दो हज़ार वापस आना. भारत के पास हाइड्रोजन बम भी है. एक अकेला पायलट बीजिंग, शंघाई और हांगकांग-कैण्टन इन तीन क्षेत्रों को हाइड्रोजन बम से युक्त तीन ब्रह्मोस मिसाइल द्वारा अकेले स्वाहा कर सकता है. विएतनाम से चीन पर ब्रह्मोस छोड़ने की तैयारी भारत ने पहले ही कर ली थी, अब पनडुब्बी से भी छोड़ने की तैयारी हो रही है. यह बात विएतनाम भी खुलकर स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि वहां भी क़ानून है कि किसी अन्य देश को वहां सैन्य अड्डा स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जायेगी, किन्तु विएतनाम पर भी चीन आक्रमण कर चुका है और भारत पर भी, अतः इस मुद्दे पर विएतनाम भारत का सहयोगी है. जब कांग्रेस ने राफेल डील को टलवा दिया तो वायुसेना ने मनमोहन सरकार को बिना बताये रूस के सुखोई विमान पर ही ब्रह्मोस मिसाइल लगाने पर कार्य आरम्भ कर दिया जो अब पूरा हुआ है. सुखोई की रेंज राफेल से भी डेढ़ गुनी अधिक है, किन्तु राफेल तीन ब्रह्मोस एकसाथ छोड़ सकता है -- वह भी तीन अलग-अलग ठिकानों पर. रूस ने सुखोई विमान बनाने की तकनीक तो भारत को सौंप दी थी किन्तु सुखोई पर ब्रह्मोस जैसा भारी और सूक्ष्म तकनीक वाला क्रूज मिसाइल कैसे लगेगा यह तकनीक रूस नहीं दे रहा था (या शायद कांग्रेस शासन में भारत ने माँगा ही नहीं? कांग्रेस राज में तो राफेल भी नहीं लिया गया)|

 

Rafale 1

 

ये बातें फ्रांस या भारत यदि बताये तो कई अन्तर्राष्ट्रीय संधियों के उल्लंघन का विवाद खड़ा हो जाएगा. चीन तो जानबूझकर हंगामा कराकर भारत के विरुद्ध हर प्रकार के प्रतिबन्ध लगाना चाहेगा ही. अतः राहुल इस मुद्दे पर चीन का काम कर रहा है, भारत का नहीं. कांग्रेस कहती है कि राफेल डील कांग्रेस ने सस्ते में किया था. सस्ता या मँहगा बाद में देखते हैं, डील किया था तो जनवरी 2012 में वायुसेना द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद भी कांग्रेस ने खरीदा क्यों नहीं? हमारी सेना को पाकिस्तान के मुकाबले कमजोर क्यों करना चाहती थी? अब सेना को मजबूत किया जा रहा है तो कांग्रेस को खुजली क्यों हो रही है? राफेल डील में क्या-क्या है यह जानकर राहुल क्या करेगा? चीन और पाकिस्तान को बताएगा? कांग्रेस का यह प्रचार झूठा है कि रक्षामन्त्री ने राफेल डील के बारे में कोई उत्तर नहीं दिया | रक्षामन्त्री ने तो राफेल की कीमत भी बता दी है, जो कांग्रेस द्वारा निर्धारित कीमत से डेढ़ गुनी कम है. 

किन्तु राफेल विमान की कीमत में अन्य खर्चों को जोड़कर राहुल गांधी झूठा प्रचार कर रहा है कि विमान की कीमत बढ़ गयी है. अन्य खर्चे हैं भारत में तकनीक ट्रान्सफर करना, विमान में नवीनतम तकनीक वाले अनेक आयुधों को जोड़ना, और 2011 के टेन्डर के काल से मँहगाई में वृद्धि. अतिरिक्त खर्चों को छोड़ दें तो विमान की कीमत घटी है, जिसका अर्थ यह है कि घूस पहले सम्मिलित था, अब नहीं. कुल खर्चे को केवल विमानों का खर्चा बताकर कांग्रेस और मीडिया देश को गुमराह कर रही थी, जिस कारण मुझे भी लगता था कि सेना के अधिकारियों ने घूस खाया होगा तभी मूल्य इतना बढ़ गया! किन्तु पूरे डील की जांच से स्पष्ट होता है कि घूस की गुंजाइश नहीं है. आरम्भ में जब मोदी सरकार ने डील किया था तब सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी घूसखोरी के आरोप लगाए थे. लेकिन जब सप्रमाण खण्डन स्वामी जी को भेजा गया तो स्वामी ने बयान बदल लिया. मिस्र की वायुसेना को मोदी-सरकार द्वारा तय कीमत से 33% अधिक कीमत पर राफेल दिया गया, जिसका अर्थ यह हुआ कि मिस्र के घूसखोर को 33% घूस दिया गया तब जाकर मिस्र राफेल खरीदने के लिए राजी हुआ.

राफेल डील में तकनीकी आयुध स्थानान्तरण का भी करार हुआ है जिस कारण खर्च बढ़ा है (इसी बढे खर्च को कांग्रेस "घोटाला" कह रही है), भारत में ही भविष्य में राफेल बन सके इसका भी करार हुआ है. 2012 में फ्रांस सम्पूर्ण तकनीकी स्थानान्तरण के लिए तैयार था किन्तु उसका कहना था कि हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स के कारखाने में राफेल बनाने की तकनीकी क्षमता नहीं है, उसका उपाय करना होगा. इस पर भारत सरकार ने कोई उत्तर नहीं दिया और मामले को टाल दिया, हालाँकि वायुसेना कह रही थी कि मिग विमान बहुत पुराने पड़ चुके हैं, जबकि चीन और पाकिस्तान के पास आधुनिक विमान हैं. भारत के तेजस विमान की परियोजना को भी कांग्रेस रुकवा देती थी, भाजपा शासन में ही प्रगति होती थी. अभी भी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स के कारखाने में राफेल बनाने की तकनीकी क्षमता नहीं है, किन्तु अब मोदी सरकार ने हरी झण्डी दे दी है कि यदि फ्रांस तकनीक देने के लिए तैयार है तो भारत समुचित कदम उठाने के लिए तैयार है. हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स को वह तकनीक दी जायेगी या किसी अन्य भारतीय कम्पनी को यह निर्णय फ्रांस लेगा, क्योंकि मामला तकनीक का है और तकनीक जिसकी है वही तय करेगा कि उस तकनीक के लिए कौन सी भारतीय कम्पनी बेहतर होगी. अभी फ्रांस ने इस विषय में निर्णय नहीं लिया है, फ्रांस जाँच करने के बाद ही निर्णय लेगा.

अतः कांग्रेस ने जितने बिन्दु राफेल पर उठाये हैं वे सब के सब झूठे है. राहुल को पता है कि राफेल डील की गोपनीयता वाली बातें भारत सरकार कभी नहीं खोल सकती, अतः इस बहाने मोदी को घूसखोर कहकर गरियाना सम्भव है!! यदि मोदी सरकार झूठी है तो राहुल संसद में इस मुद्दे पर बहस से क्यों कतराता है? केवल मीडिया में ही हंगामा क्यों करता है? अतः राफेल डील में "घोटाला" तो हुआ है, लेकिन यह घोटाला मनमोहन सरकार ने किया था जिसे अब सुधारा गया है. इस घोटाले के दो हिस्से हैं :--

गौण हिस्सा यह है कि कांग्रेस ने अधिक कीमत पर समझौता किया था, 67% के बदले 100% को आज निर्मला सीतारमण "डेढ़ गुना" बता रही है जो उचित ही है (67 का डेढ़ गुना 100 है), और अपने पुराने लेख में मैंने मिस्र की तुलना में 33% बताया था जो सही ही था (67 और 100 में 33 का अन्तर). मिस्र द्वारा राफेल की खरीद में घूस की जो रकम दी गयी वही रकम कांग्रेस ने भी माँगी, क्योंकि इन्दिरा गांधी ने ही कह दिया था कि भ्रष्टाचार एक "ग्लोबल फेनोमेनन" है. अतः कांग्रेस को ग्लोबल रेट वाला घूस चाहिए! राजीव गांधी ने रेट घटाकर बोफोर्स में केवल 3% पर ला दिया, जिसे सोनिया राज में सुधारकर 33% तक पंहुचाया गया. किन्तु इससे भी कई गुना अधिक महत्वपूर्ण है इस घोटाले का दूसरा हिस्सा.... इतना अधिक घूस देने के लिए फ्रांस की कम्पनी तैयार थी फिर भी कांग्रेस ने निर्णय टाल दिया जबकि वायुसेना के सारे विमान पुराने पड़ गए थे और नए विमान के लिए वायुसेना मांग कर रही थी, आये दिन पुराने युद्धक विमानों की दुर्घटनाएं हो रही थीं. स्पष्ट है कि भारत राफेल खरीदे इसके लिए फ्रेंच कम्पनी जितना घूस दे रही थी उससे बहुत अधिक घूस राफेल नहीं खरीदने के लिए कोई अन्य देश दे रहा था!  पप्पू के मित्र देश कौन हैं यह आप लोग जानते ही हैं - चीन और पाकिस्तान, जिन्होंने स्विस बैंकों के कालेधन को अपने यहाँ शरण देकर इस "पवित्र परिवार" को बचाने में सहायता की. अभी गुलाम नबी आज़ाद ने संसद में गर्जना की है कि कांग्रेस राज की तुलना में पाकिस्तानी गोलाबारी बढ़ी है जिससे स्पष्ट है कि कांग्रेस राज बेहतर था! पाकिस्तान से यही सहायता माँगने तो मणिशंकर अय्यर को पाकिस्तान भेजा गया था ताकि गुलाम नबी गर्जना कर सकें!

Rafale 3

यद्यपि भारत के वैज्ञानिकों ने सुखोई पर ब्रह्मोस लगाकर सफल परीक्षण कर लिया है और सुखोई की रेंज राफेल से डेढ़ गुनी अधिक है, आज भी ब्रह्मोस के लिए सुखोई से बहुत श्रेष्ठ राफेल ही है. इस मामले में और अनेक अन्य अतिरिक्त गुणों के कारण राफेल संसार का सर्वश्रेष्ठ विमान है यह भारतीय वायुसेना के तकनीकी कमिटी की रिपोर्ट है. ब्रह्मोस जैसा द्रुतगामी क्रूज मिसाइल अमरीका और चीन के पास भी नहीं है, समुद्रतल से केवल तीन मीटर की ऊँचाई पर यह उड़ सकता है! कल्पना कर सकते हैं कि कलाम साहब की टोली ने इतने तेज मिसाइल को राडार से बचाने के लिए इतनी कम ऊँचाई पर उड़ाने में कितनी सूक्ष्म और त्रुटिहीन नैनो तकनीक का प्रयोग किया होगा! ऐसे मिसाइल को लक्ष्य तक सही सलामत पँहुचाने के लिए किस प्रकार का अत्याधुनिक विमान चाहिए यह कल्पना करना कठिन नहीं है. वैसा विमान देने के लिए केवल फ्रांस तैयार है, इसमें राहुल और उसकी माँ बाधक रही है.

तो घोटालेबाज कौन है? कांग्रेस घूस खाकर भी जनवरी 2012 में राफेल खरीद लेती तो मैं उसकी प्रशंसा करता, किन्तु कांग्रेस तो देश की सैन्य शक्ति को ही नष्ट करने का निर्णय ले चुकी थी -- जो घूसखोरी से भी बड़ा घोटाला है! कांग्रेस को राफेल से घृणा है, दोकालाम में भारत की जीत से घृणा है, और भारत के हाइड्रोजन बम से घृणा है जिसे लेकर ब्रह्मोस मिसाइल राफेल पर उड़ान भरेगी -- यह भारत को सुपरपावर के समकक्ष बनाने के लिए पर्याप्त है! कांग्रेस और प्रेस्टीट्यूट मीडिया तो प्रचार करती है कि पाकिस्तान के पास भारत से अधिक परमाणु बम है, लेकिन भारत के थर्मोन्यूक्लियर (हाइड्रोजन) बम का उल्लेख भी नहीं करती, ताकि आतंकियों का मनोबल बुलन्द रहे. पोखरण-2 परीक्षण के बाद भारत द्वारा हाइड्रोजन बम की घोषणा उसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी जी ने की थी, यह है उनका हूबहू वक्तव्य :--

"Today, at 15:45 hours, India conducted three underground nuclear tests in the Pokhran range. The tests conducted today were with a fission device, a low yield device and a thermonuclear device. The measured yields are in line with expected values. Measurements have also confirmed that there was no release of radioactivity into the atmosphere. These were contained explosions like the experiment conducted in May 1974. I warmly congratulate the scientists and engineers who have carried out these successful tests."

वैज्ञानिक सबूत चाहिए ? यह है भाभा एटॉमिक रिसर्च सेन्टर (BARC) की प्रामाणिक विस्तृत विज्ञप्ति जिसमें 45 किलोटन वाले एक थर्मोन्यूक्लियर बम का स्पष्ट उल्लेख है :-- https://fas.org/nuke/guide/india/nuke/990700-barc.htm

पोख्ररण-2 में एक बम हाइड्रोजन बम (थर्मोन्यूक्लियर) भी था. परमाणु बम 20 किलोटन TNT ऊर्जा से अधिक हो ही नहीं सकता, जिसका कारण है क्रिटिकल भार. किन्तु थर्मोन्यूक्लियर बम की कोई सीमा नहीं होती, एक बार आपके पास यह तकनीक हो जाय, तो पूरे महादेश को भस्म करने वाले बम भी आप बना सकते हैं जिन्हें कॉन्टिनेंटल क्रैकर कहा जाता है, ऐसे देश को कोई पराजित नहीं कर सकता. किन्तु थर्मोन्यूक्लियर बम बनाकर घर में रखे रहने से कोई लाभ नहीं, शत्रुदेश के हृदय तक उसे पंहुचाना भी तो पडेगा! यह कार्य सुखोई भी कर सकता है और राफेल भी, किन्तु राफेल की तकनीक बेहतर है. राफेल या सुखोई जैसा विमान, ब्रह्मोस जैसा राडार-प्रूफ मिसाइल और थर्मोन्यूक्लियर बम -- इन तीनों का संयोग भारत को सुपरपावर बनाने के लिए पर्याप्त है और यह क्षमता भारत अर्जित कर चुका है.

पोखरण-2 का एक बम 45 किलोटन वाला थर्मोन्यूक्लियर था जिसे हाइड्रोजन-हीलियम की संलयन-प्रक्रिया कराने के लिए अनिवार्य 2 करोड़ डिग्री तापमान बनाने के लिए 20 किलोटन से कुछ कम वाले एक परमाणु विस्फोट की आवश्यकता पड़ी और शेष 25 किलोटन से कुछ अधिक ऊर्जा विशुद्ध संलयन-प्रक्रिया वाली थी जिसे मनचाही सीमा तक बढाया जा सकता है -- थर्मोन्यूक्लियर बम की वह सीमा केवल मिसाइल और विमान की क्षमता द्वारा ही सीमित होगी | संलयन आरम्भ कराने के लिए अत्यधिक तापमान हेतु परमाणु विस्फोट के कारण ही हाइड्रोजन बम में "थर्मो-" लगाकर इसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है. भारत के थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट के कारण बम्बई स्टॉक मूल्यों में भी भारी उछाल आया था !! पूरा देश प्रसन्न था, केवल एक खानदान और उसके पिट्ठूओं के सिवा. (जी-न्यूज़ टीवी और अन्य चैनलों को थर्मोन्यूक्लियर बम के उपरोक्त प्रमाण भेजिए, ये लोग भी पाकिस्तान के पास भारत से अधिक परमाणु बम होने का प्रचार करते हैं. सैकड़ों परमाणु बमों से अधिक क्षमता एक थर्मोन्यूक्लियर बम की हो सकती है, पाकिस्तान के पास थर्मोन्यूक्लियर बम नहीं है, अतः भारत अब परमाणु बमों की संख्या क्यों बढाए? पूरे पाकिस्तान के लिए एक ही थर्मोन्यूक्लियर बम पर्याप्त है.)

राफेल के बारे में भारत और फ्रांस की सरकारें किन कारणों से गोपनीयता की जिद कर रहे हैं यह जानना चाहते हैं? राहुल गांधी जो जानना चाहते हैं, वह अत्यन्त घातक देशविरोधी और निन्दनीय है. टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के समाचार के अनुसार जनवरी 2012 में जब राफेल डील हुआ था तब 126 राफेल खरीदने की बात 526 करोड़ रूपये प्रति विमान में तय हुई थी, जिनमें से केवल 18 विमान फ्रांस से खरीदे जाते और शेष 108 विमान भारत में बनाए जाते. नरेन्द्र मोदी ने जो डील किया है उसके अनुसार 36 राफेल फ्रांस से खरीदे जायेंगे जिनकी कीमत (मँहगाई) के कारण अब 710 करोड़ रूपये प्रति विमान हो गयी है, किन्तु भारत 1640 करोड़ रूपये देने के लिए तैयार हो गया है. पाँच वर्षों में 35% की मूल्यवृद्धि तो समझ में आ सकती है, यद्यपि इसमें भी एक बहुत बड़ा पेंच है जिसका खुलासा इस लेख के अन्त में है. किन्तु अब यदि कीमत 710 करोड़ है तो 1640 करोड़ क्यों दिया जा रहा है... यही राहुल गांधी का मूल प्रश्न है जिसे घोटाला कहकर वे संसद को उड़ा देना चाहते हैं. टाइम्स ऑफ़ इण्डिया की खबर के अनुसार नए समझौते के अनुसार विमान 710 करोड़ की दर से ही लिया जा रहा है, अतिरिक्त खर्च के निम्न कारण हैं :--

(1) "deadly weapons package" (घातक हथियारों से लैस विमान दिए जायेंगे, उन हथियारों का विस्तृत ब्यौरा भारत सरकार राहुल गांधी को क्यों दे? वह तो चीन को बता देगा! राफेल विमान में अधिकतम सम्भव कौन-कौन से घातक हथियार लगाए जा सकते हैं और किस प्रकार फिट होंगे यह हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स जानता है या राफेल बनाने वाले फ्रेंच कम्पनी ? फ्रांस हमारी सहायता कर रहा है तो हम कीमत भी नहीं देंगे?).

(2) "all spares" (अतिरिक्त स्पेयर पार्ट-पुर्जे भी पहले से ही दिए जायेंगे ताकि युद्ध छिड़ने पर पुर्जों के कारण विमान रखे न रह जाएँ),

(3) "costs for 75 per cent fleet availability" (हमेशा कम से कम 75% अर्थात 36 में से 27 विमान युद्ध हेतु पूर्ण तैयार रहें इसकी गारन्टी का खर्च; ऐसी गारन्टी मुफ्त में नहीं आती, चौबीसों घंटे हर विमान की पूरी देखरेख और मरम्मत आदि करनी पड़ती है.)

(4) "performance-based logistics support for five years" (पाँच वर्षों तक भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुसार व्यवहारिक उड़ानों के लिए आवश्यक समस्त संरचनात्मक, तकनीकी, संचार, आदि मुहैय्या कराने का खर्च, ताकि 36 विमानों का पूरा बेड़ा वास्तविक युद्ध में भाग ले सके. "logistics support" का अर्थ होता है :-- detailed organization and implementation of a complex operation, the activity of organizing the movement, equipment, and accommodation of troops, आदि, अर्थात फ्रांस वास्तविक युद्ध हेतु सहायता दे रहा है, केवल सामान नहीं बेच रहा है.)

(5) "other things" - (अन्य बातें जिनका खुलासा नहीं किया गया , उन अन्य बातों में सबसे महत्वपूर्ण है हर विमान में तीन ब्रह्मोस मिसाइल फिट करना जो हाइड्रोजन बम से लैस रहेंगे).

युद्ध की स्थिति में फ्रांस भारत को क्या दे रहा है इसका विस्तृत ब्यौरा राहुल गांधी लेकर क्या करेगा? 710 करोड़ में 930 करोड़ जोड़कर 1640 करोड़ में एक विमान लिया जा रहा है, राहुल गांधी इस 930 करोड़ रूपये का एक-एक मद में ब्यौरा चाहते हैं, ताकि वे किन "घातक हथियारों" और किस प्रकार के logistics support के खर्चे हैं और युद्ध छिड़ने पर कितने समय तक का स्पेयर पार्ट मिल रहा है यह गोपनीय जानकारी चीन को दी जा सके. तो घोटाला कौन कर रहा है? बिना अतिरिक्त सहायता के 526 करोड़ प्रति विमान का ब्यौरा भी झूठा है. पूरा डील 54000 करोड़ रूपये में कांग्रेस ने किया था - सेक्यूलर अखबार The Hindu अखबार की रिपोर्ट में इसका भी उल्लेख है. किन्तु बाद में जब डील कांग्रेस ने पूरा किया तब प्रति विमान 526 करोड़ रूपये में तय हुआ, अर्थात 126 विमानों की कीमत 54000 करोड़ से बढ़ाकर 66276 करोड़ रूपये देने के लिए कांग्रेस सरकार तैयार हुई थी.12276 करोड़ रूपये अतिरिक्त क्यों दिये जा रहे थे इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है. यह घोटाला नहीं था? यह 23% घूस नहीं थी, तो और क्या था? इन सेक्यूलर अखबारों ने यह नहीं बताया कि जब 2001 में ही युद्धक विमान खरीदने की बात वाजपेयी सरकार के काल में आरम्भ हो गयी थी तो मनमोहन सिंह की सरकार 2012 तक सोती क्यों रही और जनवरी 2012 में समझौता हो जाने पर भी एक भी राफेल खरीदा क्यों नहीं? कौन सी कठिनाई हो गयी? किसी 'मित्रदेश' ने सिखा दिया कि मत खरीदो?

कांग्रेस सरकार के समय 526 करोड़ रूपये में डील हुई जबकि मोदी सरकार ने अन्य खर्चों को छोड़कर 710 करोड़ रूपये प्रति विमान की दर से डील की - इसका अर्थ लगता है कि मूल्य में 35% वृद्धि हुई. किन्तु यह सच्चाई नहीं है. 526 करोड़ में से 97 करोड़ प्रति विमान घूस था, तब तो वास्तविक मूल्यवृद्ध 429 करोड़ से बढ़कर 710 करोड़ हुई? 65.7% मूल्यवृद्धि? ये सेक्यूलर अखबार इस तथ्य को छुपाते हैं कि पुरानी डील में केवल 18, अर्थात 14% विमान ही फ्रांस में बनते और 86% विमान तकनीक-ट्रांसफर के बाद भारत में बनते, जबकि नयी डील के अनुसार सारे विमान फ्रांस से बने-बनाए लिए जायेंगे (क्योंकि चीन और पाकिस्तान से खतरे को देखते हुए भारत में बनाने की बात अभी व्यवहारिक नहीं है, उसमें बहुत समय लग जाएगा, उसकी बाद में सोची जायेगी). फ्रांस से बने-बनाए लेंगे तो मँहगा पडेगा ही, फ्रांस में मजदूरी अधिक लगती है यह राहुल और प्रेस्टिट्यूटो के सिवा सबको पता है. जनवरी 2012 में भी फ्रांस में बने विमान की कीमत लगभग सात सौ करोड़ रूपये से कुछ ही कम थी, जबकि भारत में बनाने पर केवल चार सौ करोड़ ही खर्च होते, शेष 97 करोड़ घूस के थे, कुल "12276 करोड़ रूपये का मामूली" घूस!

'पवित्र परिवार' की इस कमाई को मोदी ने रोक दिया यही मोदी का घोटाला है, भारतीय वायुसेना को पंगु होने से बचा लिया यह तो मोदी का और भी बड़ा घोटाला है, और देशद्रोही कमीनों को मोदी जेल नहीं भेज रहे हैं यह तो सबसे भयंकर घोटाला है!! भारत के पास बड़े और छोटे बहुत से युद्धक विमान थे, मध्यम श्रेणी के विमान नहीं थे, जिस कारण वायुसेना की विशेषज्ञ टोली ने राफेल को पसन्द किया था. The Hindu अखबार की उपरोक्त रिपोर्ट के अनुसार भी राफेल में बहुत सी खूबियाँ हैं :-

air supremacy

interdiction

aerial reconnaissance

ground support

in-depth strike

anti-ship strike

nuclear deterrence

अन्तिम बिन्दु ध्यान देने योग्य है - इसका अर्थ यह है कि चीन जैसा शक्तिशाली शत्रुदेश आप पर नाभिकीय आक्रमण नहीं कर सकेगा, इसे राफेल सुनिश्चित करता है (https://www.dassault-aviation.com/)! इसका विस्तार से खुलासा करना देशहित में नहीं है. राफेल में कौन सी खूबियाँ हैं इसे विस्तार से देखना चाहें, तो उस कम्पनी के वेबसाइट पर जाएँ, इस वेबपेज पर अनेक लिंक भी हैं जिन्हें क्लिक करने पर सूक्ष्म विवरण मिलेंगे. इस वेबसाइट पर राफेल के बारे में आम लोगों के लायक पर्याप्त जानकारी है (जिन्हें यहाँ मैं दुहराना नहीं चाहता) जो सिद्ध करती है कि राफेल भारत को अजेय बनाने की क्षमता रखता है, बशर्ते भारत के पास पहले से हाइड्रोजन बम हो, ब्रह्मोस और अग्नि मिसाइल हों, बहादुर सैनिक तथा कुशल नेता हों. अभी भारत में ये सारे गुण हैं. यही कारण है कि भारतीय वायुसेना में राफेल कार्य करना आरम्भ कर दे उससे पहले ही भारत का कुछ बिगाड़ दे इसके प्रयास में चीन और पाकिस्तान (तथा उनके भारतीय मित्रगण) जीजान से जुट गए हैं. इस वेबसाइट पर जितनी जानकारी है, उससे अधिक जानकारी चाहिए तो किसी देश का मुखिया बनकर राफेल खरीदना पडेगा तभी उसकी कम्पनी Dassault ब्यौरा देगी, वरना कठोर प्राणायाम करना पडेगा. राहुल दोनों में अक्षम हैं. लेकिन चीन को ब्यौरा चाहिए, जिसके लिए राहुल छटपटा रहे हैं... 

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काँग्रेस के भीषण भ्रष्टाचार सम्बन्धित कुछ ठोस किस्से ये भी हैं... 

१) ताबूतों पर काँग्रेसी राजनीति और 2G घोटाला.... :- http://www.desicnn.com/blog/congress-dirty-tricks-coffin-and-2g-scam 

२) हसन अली को बचाने वाली अदृश्य शक्तियाँ कौन सी हैं?... :- http://www.desicnn.com/blog/hasan-ali-tax-evador-swiss-banks-black-money-in-india

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