इजराईल से दो बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद : बेहतरीन कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी ऐतिहासिक इजराईल यात्रा से ठीक पहले भारत ने इजराईल के साथ दो बिलियन डॉलर का रक्षा उपकरण खरीदी समझौता किया है. इजराईल की कंपनी IAI यानी इजराईल एयरोस्पेस इंडस्ट्री के साथ हुए एक समझौते के अनुसार मध्यम रेंज की मिसाईलों को खरीदने का समझौता हुआ है. इजराईल का कहना है कि वह बोनस में भारतीय लड़ाकू विमानों के कलपुर्जे तथा लम्बी दूरी की मिसाईलें भी देने को तैयार है. इजराईल की सरकारी प्रेस के अनुसार भारत सरकार ने हम पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं. प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम “मेक इन इंडिया” के तहत इस समझौते में मिसाईल निर्माण हेतु भारतीय कम्पनियां भी इजराईल की पार्टनर बनेंगी. भारत की कम्पनी लार्सन एंड टुब्रो इस कम्पनी के साथ संयुक्त उपक्रम लगाएगी. 

राष्ट्रपति रयूवें रिव्लिन ने कहा कि इस वर्ष जनवरी में हमारे भारत दौरे के समय इस सौदे की रूपरेखा बनी थी और भारत सरकार के इस त्वरित कदम से मैं हैरान हूँ. यह एक ऐतिहासिक सौदा है और हम प्रधानमंत्री मोदी का तेल अवीव में स्वागत करने के लिए बेचैन हैं. उल्लेखनीय है कि फ्रांस के साथ राफेल विमानों की खरीद में UPA सरकार के दौरान हुए समझौते को मोदी सरकार ने इसलिए रद्द किया था, क्योंकि उन्होंने बहुत महंगे दाम लगाए थे. बाद में इस सौदे में उन लड़ाकू विमानों की कीमत कम करके नए सिरे से सौदा तय किया गया था.

जैसा कि सभी जानते हैं, इजराईल सदैव भारत का विश्वस्त साथी रहा है, लेकिन भारत के “विचित्र सेकुलरिज्म” के कारण केवल मुस्लिमों को खुश करने की नीति के चलते भारत के प्रधानमंत्री इजराईल का दौरा करने से बचते रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के इस इजराईल दौरे के बाद दोनों देशों के संबंधों में नई गर्मी आएगी. साथ ही इजराईल ने यह घोषणा भी कर दी है कि भारत के उद्योगपतियों को इजराईल ने निवेश के लिए तथा छात्रों को पढाई के लिए वह विशेष “मल्टीपल वीज़ा” भी जारी करेगा. मोदीजी की इस ऐतिहासिक यात्रा से विश्व स्तर पर भारत के समीकरणों पर क्या फर्क पड़ेगा यह कहना मुश्किल है, लेकिन भारत के “तथाकथित प्रगतिशील बुद्धिजीवियों” के दिल में दर्द और दिमाग में खलल पैदा होना निश्चित है.

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