इस्लामिक स्टेट ऑफ़ बंगाल का दुर्गा विसर्जन : ग्राउण्ड रिपोर्ट

Written by मंगलवार, 03 अक्टूबर 2017 21:22

कलकत्ता में दुर्गा पूजा बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है. यह त्यौहार इतना भव्य तरीके से मनाया जाता है कि भारत के विभिन्न प्रान्तों से बड़ी संख्या में लोग इसको देखने आते हैं.

लेकिन पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा पिछले कई सालों से विवाद का विषय बन गया है. पश्चिम बंगाल में 2012 तक लगभग 34 सालों तक वामपंथियों का शासन रहा है, तब तक तो स्थिति थोड़ी सामान्य रही थी. दुर्गापूजा व दुर्गा का विसर्जन विवाद का विषय अधिक नहीं बना, लेकिन जैसे ही 2012 में “मुमताज़ बानोर्जी” की सरकार आती है, तो TMC पार्टी की नीतियाँ मुस्लिम परस्त बन जाती है. पश्चिम बंगाल में 2017 के विधानसभा चुनावो में TMC की प्रचंड जीत के बाद तो मानो TMC की नीतियाँ केवल और केवल मुस्लिम तुष्टिकरण की बन गयी. "जिहादी ममता दीदी" यह बात अच्छी तरह से जानती हैं कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम 27.4% है (Govt data), लेकिन उधर का जन-सामान्य बोलता है कि वास्तव में मुस्लिम आबादी 31% से भी ज्यादा है पश्चिम बंगाल में. जिहादी दीदी यह अच्छी तरह से जानती है कि अगर ये मुस्लिम वोट बैंक एक तरफ रहा, तो उन्हें हमेशा सत्ता में आने से कोई नहीं रोंक सकता है.

दूसरा कारण बंगाल में “क्लब-कल्चर” की राजनीती. कोलकत्ता विशेष तौर, इन क्लबों को करोड़ों-करोड़ों रुपया राज्य सरकार से आता है, जहाँ पर TMC के लोकल गुंडे उस मोहल्ले की लगभग सभी गतिविधियों पर निगाह रखते हैं और चुनाव के वक्त उस मोहल्ले का सारा का सारा वोट पार्टी को ही मिले यह सुनिश्चित करते हैं. इस प्रकार जिहादी दीदी के लिए लगभग 8 से 10 प्रतिशत वोट का और इजाफा हो जायेगा.. तो 31% मुस्लिम व 10% TMC कैडर या मैनेज्ड किया हुआ वोट, इस प्रकार जिहादी दीदी को 41% वोट मिलेगा, जो कि आसानी से TMC को सत्ता में ला देगा. तीसरी सबसे बड़ी बात पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीती में जमात ने TMC को बड़ा धन उपलब्ध करवाया है. उसी धन के सहारे TMC की राजनीती चलती है, इसलिए जो इस्लामिक जमात चाहेगा, वही होगा इसलिए स्वाभाविक है कि सत्ता में जमात का बोलबाला है. जमात ने धन और जनसंख्या के सहारे TMC को ही सेट कर लिया है. बंगाल के बाहर रहने वाले बहुत से लोगों को यह भ्रम है कि दुर्गापूजा के लिए लगने वाले बड़े-बड़े भव्य पंडालों से वहाँ के हिन्दुओं की समृद्धि और शान्ति का पता चलता है. जबकि वास्तविकता यह है कि इन बड़े-बड़े पांडाल के मालिक असल में TMC के स्थानीय क्लबों के गुंडे ही होते हैं. यह पांडाल हिन्दू व्यापारियों से जबरन वसूली करके बनाए जाते हैं, जिसमें से काफी सारा पैसा TMC के लोग खा जाते हैं. पहले यही काम वामपंथियों का कैडर और उसकी स्थानीय इकाई का सचिव किया करता था. अब यह वसूली का काम और पूरा कैडर वामपंथ से TMC में शिफ्ट हो गया है. इसलिए भव्य पंडालों की सुन्दरता पर मत जाएँ, वहाँ पर हिन्दू केवल मुमताज़ बानो" के आदेशों का पालन कर रहे हैं.

विजयदशमी के दिन मुख्यतः घरों (बंगाल में लगभग प्रत्येक घरों में भी प्रतिमाओं को रखा जाता है) व छोटे पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन हो जाता है. 1 से 4 तक (अर्थात एकादशी से चतुर्थी तक, इस बार-2017 में 1 Oct से 4 Oct तक) लगभग सभी पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन हो जाता है, क्योंकि पंचमी को पूर्णिमा होती है और पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजा, दुर्गा पूजा का अभिन्न भाग है. नियम यह है कि सामान्यतः जो जितना बड़ा पंडाल होता है, उन पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन सबसे अन्त में होता है. हाई कोर्ट ने इस बार (2017) में 1 oct (अर्थात एकादशी के दिन) दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा, ऐसा आदेश दिया था. जबकि मुल्ला परस्त प्रदेश की सरकार ने अपने एक आदेश में यह कह कर मना कर दिया था, कि ठीक उसी दिन मुहर्रम भी पड़ता है इसलिए पूरा का पूरा राज्य बंद रहेगा, ताकि मुस्लिम लोग मुहर्रम ठीक को मना सके. अगर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन व मोहर्रम (ताजिया) एक ही दिन होगा, तो इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. इसलिए दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन एकादशी (01/10/17) के बाद होगा यानी की 2 Oct 2017 को होगा. इस बीच किसी स्वयंसेवी संस्था द्वारा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी और उस PIL की सुनवाई के तहत कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी एकादशी के दिन ही होगा. ये राज्य सरकार निश्चित करे/प्रशासन तय करे की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे होगा. लेकिन हुआ इसका उल्टा ही.


1. कानून व्यवस्था देखने/बनाये रखने का काम प्रशासन/राज्य सरकार का काम है. इस तरह से राज्य सरकार ने कोर्ट के उस आदेश का गलत इस्तेमाल किया.

2. राज्य-सरकार/प्रशासन ने यह तय किया कि जहाँ पर प्रशासन को लगेगा कि कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है वहाँ प्रशासन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की अनुमति नही देगा. मतलब अगर किसी दुर्गा पूजा समिति को दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करना है तो उसे पहले प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ेगी. (हाई कोर्ट चाहे जो भी कर ले).

3. TMC के जो मित्र-क्लब या दुर्गापूजा समितियां हैं उन समितियों ने तय किया कि वे एकादशी के दिन प्रतिमा का विसर्जन नहीं करेगें, और अगर कोई समिति करना चाहे तो उसे पहले प्रशासन से अनुमति लेनी होगी. क्योंकि कानून-व्यवस्था देखने का काम राज्य सरकार का है. अर्थात उच्च न्यायालय के आदेश के वाबजूद, मुमताज़ बानोर्जी के राज्य सरकार की चित भी मेरी और पट भी मेरी.

4. कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा कुछ दुर्गापूजा समितियों को यह धमकी दी गयी की वे अपने इलाके से विसर्जन की शोभायात्रा को नहीं निकलने देगें.

5. कुछ इच्छुक दुर्गापूजा समितियों द्वारा 01/10/17 (एकादशी के दिन) प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है, तो स्वाभाविक रूप से आगामी वर्ष में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

6. कई जगह TMC के लोगों ने दुर्गापूजा समितियों पर गलत केस बनाकर समितियों के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा धमकी दी गयी है.

7. ज्यादातर दुर्गा पूजा समितियों ने डर के मारे, 1 Oct तक प्रतिमाओं का विसर्जन ही नहीं किया. अब वे दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन 2,3 व 4 Oct तक करते रहेंगे. 

 

Durga Pooja

ये तो हुई कोलकाता की (यानी ठेठ राजधानी) की बात, अब सुनिए मालदा के हालचाल. जैसा कि सभी जानते हैं मालदा जिले में मुस्लिम जनसंख्या 40% से अधिक हो चुकी है. मुस्लिमों की धर्मनिरपेक्षता कैसी होती है, यह भी सभी जानते हैं. बंगाली न्यूज़ पोर्टल http://bangla.eenaduindia.com/ के अनुसार TMC के कैडर और मुस्लिम संगठनों ने पुलिस के साथ मिलकर मालदा की दुर्गापूजा समितियोंको धमकी दे रखी थी कि यदि शान्ति से दुर्गा विसर्जन करना चाहते हो तोएक अक्टूबर की दोपहर बारह बजे से पहले विसर्जन कर लो. दोपहर बाद मोहर्रम के ताजिये निकलने शुरू होंगे, उसके बाद दो अक्टूबर की शाम तक दुर्गा विसर्जन की अनुमति नहीं मिलेगी. इतना ही नहीं, मुमताज़ बानो की पुलिस ने ताजिये निकलने वाले सभी मार्गों पर पड़ने वाले पंडालों की सजावट निकाल दी और अधिकाँश मंदिरों को तिरपाल लगाकर ढँक दिया गया (मानो प्रशासन के पिताजी की मौत हुई हो, और सभी गम में डूबे हों). कोलकाता हाईकोर्ट के निर्णयों को पूरी तरह से जूते की नोक पर रखा गया और सारी जोर-जबरदस्ती दुर्गापूजा समितियों पर की गयी. काचाड़ा पाड़ा जो कि, 24 नार्थ परगना डिस्ट्रिक्ट में आता है, में जब दुर्गा प्रतिमा को विसर्जन के लिए घाट पर ले गए, तो  पुलिस प्रशासन ने उस दुर्गा प्रतिमा को घाट से ही वापस पंडाल भेज दिया कि मुहर्रम है, इसलिए आज विसर्जन नहीं कर सकते. प्रशासन ने ये सब कुछ केवल "मौखिक आदेश" पर किया, क्योंकि उसे भी ऊपर से केवल "मौखिक आदेश" ही मिला था. 

कुल मिलाकर बात यह है कि अब बंगाल में दुर्गा विसर्जन कब और कैसे होगा, यह "धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार मुस्लिम संगठन" तय करेंगे. ज़ाहिर है कि देश के "कथित तेज़ और निष्पक्ष मीडिया" को बंगाल की ख़बरों से कोई लेनादेना नहीं है, क्योंकि मामला हिन्दुओं के उत्पीड़न का है. सोशल मीडिया पर लिखा गया यह लेख कितने लोगों तक पहुँचेगा यह कहना मुश्किल है. 

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Read 991 times Last modified on बुधवार, 04 अक्टूबर 2017 09:00
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