कर्बला की लड़ाई, इमाम हुसैन और दत्त हुसैनी ब्राह्मण

Written by गुरुवार, 10 जनवरी 2019 20:02

पूरे विश्व में शिया मुस्लिम मुहर्रम के दिन इमाम हुसैन की शहादत का शोक मानते हैं और ताजिया निकलते हैं। इमाम हुसैन और उनके साथियों की हत्या खलीफा यजीद प्रथम की सेना ने कर्बला के मैदान में करी थी। निश्चित रूप से इमाम हुसैन का बलिदान शिया मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ी घटना है जिसने प्रत्येक शिया को प्रभावित किया है। किन्तु विश्व के लिए ये एक सबसे बड़ा रहस्योद्धाटन होगा कि कर्बला के इसी युद्ध में 10 हिन्दू ब्राह्मणों ने भी इमाम हुसैन की ओर से खलीफा यजीद की सेना से युद्ध किया था। ये ब्राह्मण दत्त जाति के थे जिनहे मोहियाल भी कहा जाता है। उनमें स्वर्गीय राहिब दत्त और उनके सात बेटे भी थे। राहिब दत्त के सातों बेटों ने कर्बला के युद्ध में इमाम हुसैन के लिए लड़ते हुए वीरगति पाई थी।

 

राहिब दत्त और उनके बेटों का इमाम हुसैन की ओर से लड़ने की कई अलग अलग कहानियाँ मिलती हैं। एक कहानी के अनुसार इमाम हुसैन ने राहिब दत्त को उनकी सहायता के लिए पत्र लिखा था। एक कहानी के अनुसार राहिब दत्त स्वयं उनकी सहायता के लिए पँहुचे थे। किन्तु एक बात सभी में मान्य है कि राहिब दत्त के सातों बेटों ने कर्बला के युद्ध में इमाम हुसैन के लिए अपना जीवन बलिदान दिया था। इमाम हुसैन की हत्या के बाद राहिब दत्त हुसैनी ब्राह्मण कहलाए और आज भी उनके वंशज पाकिस्तान, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली आदि राज्यों में रहते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि ये हुसैनी ब्राह्मण भी शियाओं के जैसे इमाम हुसैन और सात दत्त ब्राह्मण बेटों के बलिदान के दुख में ताजिया निकालते हैं। दिल्ली के त्रिलोकपुरी में दत्त ब्राह्मण ताजिया निकालते आ रहे हैं जिस पर वर्ष 2014 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट भी प्रकाशित करी।

(संदर्भ- http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/For-Hussaini-brahmans-its-Muharram-as-usual/articleshow/45039950.cms)

इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के शादीपुर डिपो के निवासी राजेंदर कुमार गत दो दशकों से कल्याणपूरी ताजिया का नेतृत्व करते आ रहे हैं। वे बताते हैं कि उनके पूर्वज भी ताजिया निकालते थे और उनके वंशज भी ताजिया निकालते रहेंगे। ऐसे ही कल्याणपूरी ताजिया में मंगल कोली मयूर विहार कर्बला तक छाती पीटते हुए गए और बताया कि वो अपने पिता जी को ऐसा करते देखते थे और वो व उनके भाई ऐसा करते हैं। इनके ताजिया में तलवारों और चाकुओं का प्रदर्शन नहीं किया जाता है। वहीं के शिया मुस्लिम अयूब को बहुत आश्चर्य हुआ जब उन्हे पता चला कि कुछ हिन्दू भी ताजिया निकालते हैं। सच ये कि अधिकतर शिया मुस्लिम ये जानते ही नहीं हैं कि हुसैनी ब्राह्मण भी एक समाज है और उनके हिन्दू पूर्वजों ने इमाम हुसैन के लिए अपनी जान दी थी।

एक अन्य प्रमुख ऑनलाइन समाचार पोर्टल फ़र्स्टपोस्ट ने भी वर्ष 2014 में हुसैनी ब्राह्मणों पर लेख प्रकाशित किया था।

(संदर्भ- http://www.firstpost.com/living/meet-the-hussaini-brahmins-hindus-who-observe-muharram-alongside-muslims-1788623.html)

इसी लेख में थ हिन्दू की एक रिपोर्ट का वर्णन है जिसमे प्रमुख हुसैनी ब्राह्मण कर्नल रामस्वरुप बक्शी निवासी बोपाडी रोड, पुणे और प्रसिद्ध वकील नेत्रप्रकाश भोग के बारे में बताया गया हैं। इन दोनों के बारे में कई अन्य वेबसाइट्स में भी वर्णन है। कई का कहना है कि प्रसिद्ध फिल्मी कलाकार सुनील दत्त को राहिब दत्त के ही वंशज है। फिल्म कलाकार सुनील दत्त जी के हुसैनी ब्राह्मण होने का सबसे ठोस प्रमाण पाकिस्तान के डान समाचार पत्र की नवम्बर 2012 एक रिपोर्ट में मिलता है।

(संदर्भ - https://www.dawn.com/news/766877/karbala-and-how-lahore-was-involved)

इसमें स्पष्ट प्रमाण दिया गया है कि स्वर्गीय सुनील दत्त जी ने लाहौर के शौकत खानुम अस्पताल को दान दिया था और अस्पताल में उनके शब्दों को अंकित किया गया कि “लाहौर के लिए, अपने पूर्वजों के जैसे, अपने रक्त की प्रत्येक बूंद अर्पित कर दूँगा और कोई भी अर्पण करूंगा जिसके लिए मुझसे कहा जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे मेरे पूर्वजों ने जब उन्होने हज़रत इमाम हुसैन के लिए कर्बला में अपना जीवन बलिदान दिया था”।

ये लेख मुख्यतः कर्बला की लड़ाई और लाहौर के ऐतिहासिक संबंध को जोड़ता है। इसके अनुसार राहिब दत्त और उनके सात पुत्र लाहौर के ही थे। लाहौर के इनही सात पुत्रों ने इमाम हुसैन के लिए कर्बला के युद्ध में अपना जीवन बलिदान दिया था। इसमें यहाँ तक बताया गया है कि राहिब दत्त अरब में जाकर व्यवसाय करते थे और उन्होने इस्लाम के पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहिब को वचन दिया था कि समय आने पर वो उनके पौत्र के साथ सत्य की रक्षा करने के लिए युद्ध में खड़े होंगे। जब यह लेख इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान में प्रकाशित हुआ है तो इसकी महत्वपूर्णता बड़ जाती है। साथ ही पाकिस्तान एक सुन्नी मुस्लिम बहुल राष्ट्र है जहां शिया मुस्लिम एक पीड़ित समुदाय है। तो पीड़ित शिया मुस्लिमों के लिए लाहौर और कर्बला का संबंध बताते हुए डान जैसे समाचार पत्र का ये लेख छापना एक महत्वपूर्ण घटना है।

साथ ही ये लेख बताता है कि कुम नगर, जो शिया राष्ट्र ईरान में है, में कर्बला की लड़ाई में मारे गए सभी लोगों की सूची है जिसमे स्वर्गीय राहिब दत्त के सातों बेटों का भी नाम है। जो कि अपने आप में एक अत्यंत प्रमुख प्रमाण है। एक शिया वैबसाइट www.ya-hussain.com के फेसबूक पेज पर भी र्ष 2012 में हुसैनी ब्राह्मणों के बारे में बताया गया था।

(संदर्भ - https://www.facebook.com/permalink.php?id=221255257656&story_fbid=10150764849642657)

इसमें बताया गया है कि दस दत्त ब्राह्मणों में से मात्र राहिब दत्त ही कर्बला की लड़ाई में जीवित बचे थे और बाद में इमाम हुसैन के शेष परिवार वालों से भी मिले थे। वहाँ उन्होने अपना का परिचय दिया कि वो हिंदुस्तान से आए ब्राह्मण हैं। तो उनको उत्तर मिला कि “अब से आप हुसैनी ब्राह्मण हैं और हम आपको हमेशा याद रखेंगे”। इसी पोस्ट पर प्रकाशित है कि प्रसिद्ध फिल्म कलाकार स्वर्गीय सुनील दत्त भी हुसैनी ब्राह्मण थे।

एक अन्य महत्वपूर्ण वैबसाइट www.imamreza.net पर सैयद हाशिम राजावी लिखते हैं कि कैसे जब वो दिल्ली में एक कार्यक्रम में कर्बला की लड़ाई में हिंदुओं के बलिदान के बारे में बता रहे थे तो उन्हे उसी कार्यक्रम में नोनिका दत्त नाम की हुसैनी ब्राह्मण मिली। सुश्री नोनिका दत्त जी जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में इतिहास पड़ाती हैं। बाद में नोनिका जी ने सैयद साहब को मिल कर दो अत्यंत पुरानी पुस्तकें दिखाई जिनमे हुसैनी ब्राह्मणों का इतिहास है।

(संदर्भ - https://www.imamreza.net/eng/imamreza.php?id=11294)

आज भी हुसैनी ब्राह्मण अपने इतिहास पर गर्व करते हैं कि उनके पूर्वजों ने बिना किसी स्वार्थ के हज़रत इमाम हुसैन के लिए अपना जीवन बलिदान दिया।

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