कर्णावती की अतिक्रमित जामा मस्जिद = भद्रकाली मंदिर

Written by सोमवार, 29 जनवरी 2018 12:11

गुजरात के अहमदाबाद उर्फ कर्णावती (Ahmedabad, Karnavati) शहर में एक जामा मस्जिद है, जिसे भारत के नकली इतिहासकार यह कहकर प्रचारित करते हैं कि इसे 1452 में अहमदशाह ने बनवाया था.

हालाँकि थापर-चंद्रा-गुहा छाप इतिहासकारों (Fake Historians) के इस दावे की पोल इस “कथित मस्जिद” के अंदर दस मिनट बिताते ही खुल जाती है. वास्तव में यह कथित जामा मस्जिद भारत भर में फैले उन चार हजार से अधिक मंदिरों की श्रृंखला में से एक है जिसे मुस्लिम आक्रान्ताओं ने ध्वस्त करके, उस पर अतिक्रमण करते हुए मस्जिद में तब्दील कर दिया था. कर्णावती की यह जामा मस्जिद भी पहले भद्रकाली मंदिर (Bhadrakali Temple) ही था. 

प्राचीनकाल में हिन्दू मंदिर वैदिक शिक्षाओं के लिए, प्रशासन पर निगरानी रखने, अर्थशास्त्र और समाज के सूत्रों को व्याख्यायित करने के लिए प्रसिद्ध होते थे. इन मंदिरों में आयुर्वेद, योग सम्बन्धित अनेक विषयों का अध्ययन किया जाता था तथा मंदिरों के परिसर में ही गौशालाएँ और अन्न भण्डार भी होते थे. मंदिरों में दान देने वाले धनी हिन्दू अपनी-अपनी क्षमतानुसार आभूषण, गाय और धान्य दिया करते थे. बाहर से आए मुस्लिम आक्रान्ताओं की निगाह मंदिरों की संपत्ति पर तो होती ही थी, लेकिन जिस प्रकार तेजोमहालय की वास्तु पसंद आने पर उसे ताजमहल कहकर कब्ज़ा कर लिया गया, वैसे ही मुगलों की काली निगाह जिस शानदार मंदिर पर पड़ती थी, उस पर कब्ज़ा करके वे उसे मस्जिद का स्वरूप देकर वहाँ नमाज पढ़ने लग जाते थे (जबकि वास्तव में कुरआन में इसकी अनुमति नहीं है, लेकिन लुटेरे भला कुरआन की परवाह कहाँ करते हैं?).

Bhadrakali 1

 

 

Bhadrakali 2

अहमदाबाद (कर्णावती) की यह जामा मस्जिद मालवा के राजपूत परमार राजाओं ने देवी भद्रकाली के सम्मान में बनवाया हुआ मंदिर हुआ करता था एवं कुछ राजपूत घरानों की कुलदेवी भी हुआ करती थी. गुजरात से लेकर मध्यप्रदेश और आसपास के राजस्थानी क्षेत्रों से लेकर कच्छ, मेवाड़ और मालवा इलाके में देवी भद्रकाली के बारे में साहित्य एवं लोकगीतों की बड़ी संख्या में उपस्थिति भी है. परमार वंशीय राजाओं ने नौवीं शताब्दी से लेकर चौदहवीं शताब्दी तक इन क्षेत्रों में लंबे समय तक शासन किया और सैकड़ों भव्य मंदिर, महल बनवाए. आज हम जिसे अहमदाबाद (एक आक्रांता अहमद शाह के नाम पर) जानते हैं, वह एक समय पर “भद्रा” या “कर्णावती” के नाम से जाना जाता था. भद्रकाली के इस मंदिर में सौ से अधिक स्तंभों पर कमल के फूल, हाथी, कुण्डलिनी, नृत्यांगनाओं, कलश इत्यादि को पत्थरों में उकेरा गया है जो आज भी देखा जा सकता है. ज़ाहिर है कि रेगिस्तानी इलाकों से आने वाले इस्लामी आक्रान्ताओं के बाप ने भी (जिन्होंने कैक्टस, गधे, ऊँट और साँप के अलावा जीवन में कुछ भी नहीं देखा था) अपने जीवन में कभी कमल का फूल या कलश देखा भी नहीं था, फिर भला वे “जामा मस्जिद” के अंदर स्थित स्तंभों पर ये कहाँ से बनाते (या बनवाते)?

 

Bhadrakali 3

 

Bhadrakali 4

 

दूसरी बात ये है कि जब शरीयत में साफ़ उल्लेख है कि किसी भी मूर्तिनुमा कलाकृति, चित्र, पशु अथवा ईश्वर की प्रतिकृति जैसी कोई वास्तुकला जिस भवन में मौजूद हो, वहाँ पर नमाज पढ़ना हराम है, तो फिर अहमदाबाद की इस जामा मस्जिद के अंदर अभी तक वर्षों से पढ़ी गई नमाज भी “हराम” ही हुई ना?? अल्लाह की निगाह में घोर पाप ही हुआ ना? फिर भी मुसलमान इस हिन्दू वास्तुशैली के स्तंभों वाली जामा मस्जिद से चिपके हुए क्यों हैं? क्या भारत की किसी भी “मूल मस्जिद” (जो मुस्लिमों ने नींव से शुरू करके बनवाई हो) में नमाज पढ़ने के लिए जो हॉल होता है, उसमें बीच-बीच में स्तंभ होते हैं?? – कभी नहीं होते. एक बड़ा सा सिंगल हॉल होता है, जहाँ सामने काबे की ओर स्थित दीवार की तरफ मुँह करके नमाज पढ़ी जाती है. फिर इस अहमदाबाद की जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले हॉल के अंदर जो दर्जनों स्तंभ बीच में खड़े हैं, वो किसने बनवाए, और क्यों बनवाए? क्या इन स्तंभों से और स्तंभों पर बनी हिन्दू आकृतियों से नमाज पढ़ने में बाधा उत्पन्न नहीं होती??

Copy of Bhadrakali 1

असल में भद्रकाली देवी के इस विशाल मंदिर में परमार राजाओं ने पुराणों, इतिहास, वेदों, रामायण और महाभारत से सम्बन्धित घटनाएँ मूर्तिकला में दर्शाई है. यहाँ तक कि इस मंदिर में पत्थरों पर शिव पुराण भी अंकित था, जिसे मुस्लिम हमलावरों ने खुरच-खुरच कर खत्म कर दिया. तमाम चित्रों और मूर्तियों तथा स्तंभों को देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कथित जामा मस्जिद कुछ और नहीं बल्कि भद्रकाली मंदिर था. यदि अतिक्रमणकारियों द्वारा नमाज पढ़ने के लिए इस मंदिर के सौ स्तंभ भी गिराने का प्रयास किया जाता, तो पूरा का पूरा मंदिर ही भरभराकर ढह जाता... तब ये “कब्ज़ा” किस पर करते, फिर तो नई मस्जिद बनानी पड़ती. जबकि पूरे भारत में चार-पाँच हजार मंदिरों पर कब्ज़ा करके बनीबनाई “नकली मस्जिद” उन्होंने गढ़ ली थी, भले इसके लिए कुरआन और शरीयत को दरकिनार करना पड़े. 

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इस्लामी आक्रान्ताओं और इतिहास के विकृतिकरण  से सम्बन्धित कुछ लेखों की लिंक इस प्रकार है... 

१) दिमाग को गुलाम कैसे बनाएँ... :- http://www.desicnn.com/news/brain-wash-through-education-and-history 

२) मराठा रानी ताराबाई और औरंगजेब... :- http://www.desicnn.com/blog/maratha-queen-tarabai-and-aurangzeb 

३) ICHR में घुसे बैठे नकली और धूर्त इतिहासकार... :- http://www.desicnn.com/blog/ichr-and-intellectual-anarchists 

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