पंजाबी टप्पा :- जगजीत-चित्रा खुशनुमा ही अच्छे लगते थे

Written by मंगलवार, 05 दिसम्बर 2017 13:04

गज़ल और सुगम संगीत गायक के रूप में विश्वविख्यात स्वर्गीय जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को कौन नहीं जानता.... राजस्थान में जन्मे इस अदभुत गायक ने अपनी पत्नी चित्रा सिंह (Chitra Singh) के साथ मिलकर सैकड़ों गीत गाए, दर्जनों स्टेज शो भी दिए.

जिन दिनों यह जोड़ी अपने खुशहाल दिनों में थी, अर्थात उनके जीवन में पृथ्वी का सबसे बड़ा दुःख (इकलौते जवान पुत्र का निधन) नहीं आया था, तब तक इस जोड़ी ने धूम मचाकर रखी थी. उन्हीं खुशनुमा दिनों की एक स्मृति के रूप में एक पंजाबी टप्पे के बारे में यह लेख है. 

पंजाबी टप्पा (Punjabi Tappa) संगीत की वह विधा है, जो उल्लास के क्षणों में स्वतः बोल बनकर निकली है. जीवन की आपाधापी भरी दौड़ में, फुरसत भरे कुछ पलों को संजोकर, मनोविनोद हेतु अक्सर टप्पे गाये जाते हैं. विवाह आदि अवसरों पर भी एक दूसरे पक्ष को छेड़ने या चुहल करने के लिए भी अक्सर टप्पे गाते हैं. टप्पे पंजाबी लोक गीतों की सुमधुर अभिव्यक्ति है. यह पंजाब के ग्रामीण लोकजीवन को आनंदित कर देने वाला सुरभित पुष्प है. अक्सर प्रेमी प्रेमिका के बीच का प्रेमालाप इन टप्पों के द्वारा बेहद ही माधुर्यपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है.

प्रस्तुत लेख में पंजाब का एक लोकप्रिय टप्पा है, जो प्रेमी प्रेमिका के प्रेमालाप वार्ता एवं चुहलबाजी या एक दूसरे को छेड़ने के सम्बन्ध में है. यह टप्पा इसलिए भी लोकप्रिय है क्योंकि इसे जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने अपना स्वर दिया है. पूरा टप्पा प्रेमी प्रेमिका को एक दूसरे की शाब्दिक छेड़खानी से भरा पड़ा है. कभी प्रेमिका के शब्द बाण, प्रेमी पर भारी पड़ते हैं, तो कभी प्रेमी के शब्द प्रेमिका को छेड़कर उसे निरुत्तर कर देते हैं. चूँकि यह टप्पा पंजाबी भाषा में है, इसलिए इसका संक्षेप में हिन्दी अनुवाद भी पेश किया जा रहा है, ताकि पाठकों को भी आनंद प्राप्त हो. टप्पे में शब्दों के बोल, उसे कहने का तरीका, यानि अभिव्यंजना का, बोलते समय गायक-गायिका के हाव-भाव आदि का भी अत्यधिक महत्व है. जैसे एक लाइन में प्रेमी दाँत पीसकर बोलते हुए मजाक करता है, और दूसरी जगह लम्बी दाढ़ी रखने की बात को हाथ से इशारे करके बतलाता है... यह सब कुछ जगजीत सिंह ने लन्दन में दिए गए एक कार्यक्रम में लाईव करके दिखाए हैं... इसी वीडियो को लेख में संलग्न किया गया है. पहले आप वीडियो "सुनिए", उसके बाद इसका अर्थ समझने में अधिक आनंद आएगा...

 

 

इस पंजाबी टप्पे का हिन्दी में मूल भावार्थ इस प्रकार है....

पहली पंक्ति में प्रेमिका प्रेमी को छत पर आने का आमंत्रण देती है और उलाहना देती हुई कहती है कि यदि आना है तो आइये, नहीं तो भाड़ में जाइये...

दूसरी पंक्ति में प्रेमी-प्रेमिका से कहता है, कि मैं तुम्हारे आमंत्रण पर आना तो चाहता हूँ लेकिन मुझे पकड़े जाने का और (छित्ताई) पिटाई का निरंतर भय लगा रहता है, क्योंकि मैं अपने इन मित्रों से परेशान हूँ जो हर वक्त मेरा पीछा करते रहते हैं.

तीसरी पंक्ति में प्रेमिका प्रेमी के काले रंग को कोसती है, और साथ ही साथ उसे कहती है इतने बेचैन मत होइये, खुद पर शर्म करो तुम बाल बच्चेदार आदमी हो (तुम्हारे बेटे बेटियाँ भी हैं).

इस प्रकार मजाकिया अंदाज़ में यह पंजाबी टप्पा आगे बढ़ता जाता है...

अगली पंक्ति बड़ी मजेदार है, और प्रेमी द्वारा दाँत पीसकर मजाकिया लहजे में बोली जाती है. प्रेमी कहता है कि मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है और इस गुस्से के कारण मेरे सारे दाँत भींच गए हैं, तुम कहो कि तुम मुझे पसंद करती हो यदि तुम मना करोगी और मेरे बच्चों को पता चल गया तो वो तुम्हें काट खायेंगे.

इसके जवाब में प्रेमिका प्रेमी को फिकरा कसती है, और कहती है कि तुम्हें तो मेरे प्रेम की परवाह ही नही है, जाओ मैं तुमसे बात नही करती हूँ और तुम्हारे चेहरे पर तो मूँछे भी नहीं है अर्थात तुम प्रेम की सच्ची परिभाषा नहीं जानते.... तुमसे कुछ कहना बेकार है.

अगली पंक्ति में हाजिरजवाब प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है कि, मैं तो इस प्रेम का आनन्द उठाना चाहता हूँ, मैं आप और आपके इस निश्चल प्रेम की कद्र करता हूँ. अगर तुम हुक्म करो तो मैं मूँछ क्या.... मैं तो मूँछ के साथ-साथ दाढ़ी भी रख लूँगा.

अब प्रेमिका प्रेमी को बगीचे में मिलने आने का आमंत्रण देती है, और मजाक करती है कि जब बाग में, मैं सो जाऊँ तो तुम मुझ पर उड़ने वाली मक्खियों को उड़ाते रहना ताकि मैं चैन सुकून से सो सकूँ.

ज़ाहिर है कि प्रेमिका ने उपरोक्त पंक्ति भी प्रेमी को चिढ़ाने के लिए ही कही थी, लेकिन फिर भी प्रेमी अपनी प्रेमिका को चिढाने के साथ-साथ क्षण भर में उसे अपनी बात को चतुराई से कहकर मना भी लेता है...

प्रेमिका की बात के नहले पर दहला मारते हुए और उसे चिढाते वह हुए कहता है कि तुम पर मक्खियाँ लगने का कारण तुम्हारा गंदगी पसंद होना, और नहीं नहाना है. प्रेमी प्रेमिका को स्पष्टता से कह देता है कि तुम रोज नहाया करो. उसे पता है कि उसकी इस बात से उसकी प्रेमिका चिढ़ जाएगी, अतः प्रेमी पल भर में ही बात को बदल देता है, और कहता है कि तुम मक्खियों से डरती हो इसका अर्थ तुम्हारा नहीं नहाना नही है.... वास्तव में तुम मक्खियों से इसलिए डरती हो क्योंकि तुम बहुत ज्यादा गुड़ खाती हो.... और तुम वाकई में बहुत मीठी हो गयी हो. इसलिए तुम गुड़ थोड़ा कम-कम ही खाया करो

उसकी यह बात चिढ चुकी प्रेमिका के गुस्से को क्षणभर में ही शांत कर देती है. इस लाइन की यही खूबसूरती है..... और पूरे टप्पे में यह लाइन सबसे खूबसूरत बन पड़ी है.

अंतिम लाइन में दोनों मिलकर कहते हैं कि हम दोनों मिलकर प्रेमभरे दिन व्यतीत करेंगे. अब चूँकि हम दोनों मिल चुकें है इसलिये दोनों मिलकर प्रेम भरे गीत गायेंगे और अपने इस निश्चल- निर्विकार प्रेम का आनंद लेंगे... अंत में प्रेमी एक अतिरिक्त पंक्ति अपनी तरफ से जोड़कर बात को मजाकिया ढंग से कहकर समाप्त कर देता है वह कहता है चूँकि अब हम दोनों का मिलन हो चुका है, इसलिए हम दोनों रोज मिलकर नहायेंगे. सभी श्रोता इस बेहतरीन टप्पे का आनंद लेते हुए अंत में प्रेमी द्वारा जबरन घुसेड़ी गई.....इस अंतिम मिलावटी पंक्ति को सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ते हैं.

 

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जैसा कि लेख के आरम्भ में बताया यह पंजाबी टप्पा वीडियो उन दिनों की बात है जब जगजीत सिंह अपने चरम पर थे, जवान थे और चित्रा सिंह उनके साथ ही गाना गाती थीं. लेकिन फिर 1990 का वह काला दिन भी उनके जीवन में आया, जब उनके इकलौते पुत्र 18 वर्षीय विवेक सिंह की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई. इस सदमे ने इस प्रेमी युगल यानी जगजीत-चित्रा को अंदर तक तोड़कर रख दिया... ये दोनों ही लगभग एक वर्ष तक अवसाद में डूबे रहे. हालाँकि जगजीत सिंह थोड़ी हिम्मत करके गज़ल और गायन की दुनिया में वापस लौट आए, परन्तु जवान बेटे को खोने के दुःख में चित्रा सिंह ने फिर कभी भी वापसी नहीं की, बल्कि चित्रा सिंह ने तो सार्वजनिक जीवन का ही लगभग त्याग कर दिया था. चित्रा सिंह की पहली शादी से हुई संतान मोनिका ने भी 2009 में आत्महत्या कर ली... इसके दो वर्ष बाद 2011 में जगजीत सिंह ने भी अंतिम साँस ली.... और इस प्रकार इस रोमांटिक, फैशनेबल, मधुर, प्रतिभावान उम्दा जोड़ी का दुखद अंत हुआ.

बहरहाल उनका गाया हुआ यह पंजाबी टप्पा निश्चित ही हमारे-आपके होंठों पर मुस्कराहट ला ही देता है...

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फिल्म संगीत से लुप्त होती विविधता और मधुरता... http://www.desicnn.com/news/hindi-film-music-losing-its-melody-and-variety-due-to-non-performance-by-artists 

गर्भावस्था पर आधारित दो हिन्दी फ़िल्मी गीत... http://www.desicnn.com/blog/686 

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