भारत-चीन के नौसैनिक जहाज, समुद्री लुटेरों का काल बने

Written by मंगलवार, 11 अप्रैल 2017 08:41

गत रविवार की सुबह जब हम आराम से बिस्तरों में पड़े थे, उस समय अदन की खाड़ी में भारत और चीन के समुद्री जहाज़ों ने आपस में मिलकर एक बेहतरीन ऑपरेशन को अंजाम दिया.

दोनों देशों की नौसेनाओं ने अदभुत तालमेल और सहयोग का परिचय देते हुए इस अंतर्राष्ट्रीय बचाव अभियान में सफलता प्राप्त की. घटना कुछ इस प्रकार है, कि शनिवार रात को भारतीय नौसेना के एक जहाज को अदन की खाड़ी से यह सूचना मिली कि एक विदेशी जहाज क्रमांक MVOS35 (तुवालू का जहाज) पर समुद्री लुटेरों ने हमला बोल दिया है, और वे इसे लूटने की फिराक में हैं. INS मुम्बई, INS तरकश, INS त्रिशूल और INS आदित्य भूमध्यसागर की तरफ बढ़ रहे थे और ये उसी समय अदन की खाड़ी के आसपास मौजूद थे. इन्होने भी उस समुद्री जहाज की मदद वाली गुहार अपने उपकरणों पर सुनी. समुद्री जहाज़ों के आवागमन पर निगाह रखने वाली दुबई की एजेंसी ने भारत के जहाज़ों को सूचना दी और वे तत्काल घटनास्थल की और रवाना हो गए.

भारतीय नौसेना के एक हेलीकॉप्टर ने अपह्रत किए जाने वाले तथा समुद्री लुटेरों के जहाज का हवाई सर्वे अँधेरे में ही पूरा किया, ताकि उजाला होने पर लुटेरों की अक्ल ठिकाने लगाई जा सके. पास में ही चीन का नौसैनिक जहाज यूलिन भी था, उसे पूरी पोजीशन समझाई गई और कहा गया कि भारतीय नौसेना आपको हवाई कवर फायर देगी, आप लुटेरों के नजदीक पहुँचें. देखते ही देखते पाकिस्तान और इटली के दो जहाज भी घटनास्थल पर पहुँच गए और लुटेरों को मार भगाया गया, तथा उनके जहाज पर कब्ज़ा कर लिया गया. उल्लेखनीय है कि अदन की खाड़ी में भारत के एक-दो नौसनिक जहाज सदैव गश्त पर होते हैं, ताकि दुबई के रास्ते आने वाले समुद्री मार्ग पर भारतीय व्यापारिक जहाज़ों को सुरक्षा प्रदान की जा सके. 2008 से अभी तक भारतीय नौसेना ने चालीस से अधिक समुद्री लूट की घटनाओं को नाकाम किया है और समुद्री डाकुओं से लगभग 3000 जहाज़ों को बचाया जा चुका है.

जैसा कि सभी जानते हैं, अदन की खाड़ी यमन और सोमालिया के बीच अरब सागर में स्थित है. भारत के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि मुम्बई-कोचीन जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर आने वाला माल इसी रास्ते से आता है. 490 किमी लम्बा यह समुद्री मार्ग आर्थिक दृष्टि से भी काफी मशहूर है. भारत और चीन की नौसेनाओं ने जिस तरह से संयुक्त अभियान में इन समुद्री लुटेरों को नाकाम किया, उसकी तारीफ़ सभी देशों ने की है.
हाल ही में चीन ने दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा को लेकर भारत के साथ कटुता उत्पन्न करने की कोशिश की थी, साथ ही संयुक्त राष्ट्र में पाक आतंकवादी मसूद अज़हर को लेकर भी भारत को घेरा था, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि चीन संभवतः इस ऑपरेशन में भारत की मदद नहीं करेगा, परन्तु वैसा नहीं हुआ. क्योंकि इससे पहले भी तीन बार ऐसा हो चुका है, जब चीन के व्यापारियों का जहाज लुटेरों के चंगुल में फँसा था और भारत की नौसना ने उसकी मदद की थी. अभी एक सप्ताह भर पहले की बात है, जब दुबई से आने वाले एक जहाज “अल-कौसर”, जो कि सूखे मेवे और खाद्य तेल लेकर मुम्बई आ रहा था, उसे भी अपहरण करने की कोशिश हुई थी, जिसे भारतीय नौसेना ने नाकाम कर दिया था.

अंतर्राष्ट्रीय सैन्य क्षेत्रों में इस घटना का विशेष उल्लेख इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि यदि भारत और चीन की समुद्री सेनाएँ आपस में मिलजुलकर काम करें तो पूरा का पूरा अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी से लेकर निचले प्रशांत तक पूरा समुद्री इलाका सुरक्षित हो जाएगा. “शेर” और “ड्रैगन” का यह सैन्य मेलमिलाप और सहयोग जारी रहना चाहिए.

Read 1563 times