आर्चबिशप एलेंचेरी की हाईकोर्ट को चुनौती :- कहा पोप सर्वोच्च हैं

Written by बुधवार, 28 फरवरी 2018 11:25

भारतीय लोकतंत्र का तथाकथित सेकुलरिज्म अब उस अवस्था को प्राप्त होता जा रहा है, जहाँ कोई भी ऐरा-गैरा-नत्थू-खैरा भारतीय न्याय व्यवस्था और संविधान को लात मारकर अपना सिक्का चलाना चाहता है.

स्वाभाविक रूप से यह प्रवृत्ति “रेगिस्तानी पंथों” में अधिक देखने को मिलती है, कोई अल्लाह को सर्वोच्च मानता है तो कोई पोप को... इनकी निगाह में भारत की संसद, भारत के सुप्रीम कोर्ट वगैरह की कोई इज्जत नहीं है. क्योंकि ये रेगिस्तानी पंथ भारत की मिट्टी से कभी भी एकरूप नहीं हो पाए हैं. बीच-बीच में आए दिन इन लोगों को मक्का-मदीना और वेटिकन की उल्टियाँ शुरू हो जाती हैं... ऐसा ही एक ताज़ा मामला केरल से सामने आया है, जहाँ एक कार्डिनल साहब ने कहा कि भारत की हाईकोर्ट उनके मामले का निर्णय नहीं कर सकती, केवल पोप ही कर सकते हैं... जी हाँ!!! आगे पढ़िए तो सही...

केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश उस लिखित हलफनामे को पढ़कर हैरान रह गए, जिसमें जमीन घोटाले के मामले एक आरोपी एर्नाकुलम डायोसीज़ सायरो मालाबार कैथोलिक चर्च के “कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी” (George Alencherry) ने हाईकोर्ट को ही चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्होंने कुछ भी गलत किया होगा, तो उन्हें दण्डित करने का अधिकार केवल और केवल “पोप” को ही है, केरल हाईकोर्ट को नहीं (Pope Vs Kerala High Court). कार्डिनल में अपने लिखित बयान में कहा कि वेटिकन के “कैनन नियमों” के अनुसार ही चर्च जमीन घोटाले (Kerala Church Land Scam) में उन पर कोई कार्यवाही की जा सकती है. संक्षेप में मामला कुछ यूँ है कि –

अलप्पुझा के एक निवासी ने केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उसने यह दावा किया है कि डायोसीज़ ने चर्च की जो जमीन बेची है, उसमें भारी अनियमितताएँ हुई हैं और इसके कारण चर्च को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए इसकी जाँच की जाए और यदि जमीन किसी स्वार्थवश जानबूझकर कम दामों में बेची गयी है, तो दोषियों को दण्डित किया जाए. कार्डिनल एलेंचेरी के वकीलों ने लिखित में ये कह दिया कि ये पूरी तरह से चर्च का अंदरूनी मामला है, इसलिए इसमें भारतीय न्यायालयों की कोई औकात नहीं है, और वेटिकन से पोप ही “कैनन नियम-क़ानून” के अनुसार निर्णय करेंगे कि क्या सही है और क्या गलत है”. चर्च ने कुछ भी गलत नहीं किया है और भारत की हाईकोर्ट को “हमारे अंदरूनी मामले” में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है.

असल में विवाद की शुरुआत तब हुई, जब सितम्बर 2016 में कोच्चि शहर के “प्राईम लोकेशन” पर स्थित बेशकीमती जमीन (ऐसी जमीनें चर्च के पास पूरे देश में हजारों एकड़ हैं) को आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी ने कुल 36 लोगों को टुकड़े-टुकड़े में अपनी मनमानी दरों पर बेच दिया. कार्डिनल एलेंचेरी ने खुद सारी रजिस्ट्रियों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, मानो वह अकेला उस जमीन का मालिक हो. चर्च के ही एक अनुयायी को ये हरकत गलत लगी और उसे महसूस हुआ कि मामले में भ्रष्टाचार भी हुआ है और चर्च को तगड़ी चपत भी लगी है, तो उसने केरल हाईकोर्ट में अर्जी लगा दी. जब चर्च के ही कुछ लोगों ने जाँच शुरू की तो यह पाया कि जिस “ब्रोकर” (सजू वर्गीज़ कुनेल) के माध्यम से जमीन का सौदा हुआ है, वह पहले से ही संदिग्ध आचरण का दोषी है और उस पर कई मामले चल रहे हैं, ऐसे आदमी के साथ कार्डिनल एलेंचेरी का गठबंधन करना संदेह पैदा करता ही है. चर्च ने पहले से ही यह निश्चित किया था कि कोच्चि जैसे महानगर की यह प्राईम लोकेशन की जमीन कम से कम 27 करोड़ रूपए कीमत रखती है और इससे नीचे कीमत पर नहीं बेचना चाहिए. लेकिन मजे की बात ये है कि कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी साहब ने इसे केवल 13 करोड़ रूपए में बेच डाला. यही नहीं, चर्च के अकाउंट में केवल 9.30 करोड़ ही जमा पाए गए हैं. स्वाभाविक है कि चर्च के अन्दर असंतोष की आग भड़कनी ही थी, वैसा ही हुआ. अब इस भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर कार्डिनल के वकील कहते हैं कि "ये चर्च का अंदरूनी मामला है, और हाईकोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता, केवल पोप को ही इसकी सुनवाई का अधिकार है”.... इन रेगिस्तानी पंथों द्वारा भारत की व्यवस्था को लतियाने का यह मामला “तीन तलाक” विवाद जैसा ही है.

केरल हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच के न्यायाधीश जस्टिस कमाल पाशा ने कार्डिनल के वकीलों की कड़ी आलोचना करते हुए पूछा है कि यदि क्या आपके कार्डिनल भारत के कानूनों को नहीं मानते हैं? या जिस व्यक्ति ने याचिका दाखिल की है, उसे भारतीय न्याय-व्यवस्था के तहत अपील करने का अधिकार नहीं है? ये आपका “आपसी और अंदरूनी” मामला कैसे हो सकता है? जस्टिस पाशा ने आगे कहा कि आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी, चर्च की उस जमीन के मालिक नहीं हैं, केवल Custodian (संरक्षक) हैं, उन्हें तो चर्च की जमीन बेचने का अधिकार भी नहीं है, ऐसे में वे चर्च की अन्य संस्थाओं द्वारा अनुमानित एवं सहमति प्राप्त रेट्स से कम दरों पर अपनी मनमानी करते हुए जमीन कैसे बेच सकते हैं?

फिलहाल जस्टिस कमाल पाशा ने पुलिस को निर्देश दिया है कि केस रजिस्टर किया जाए और इस भूमि घोटाले की पूरी जाँच करके रिपोर्ट पेश की जाए, तथा याचिकाकर्ता की इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाए कि सत्ताईस करोड़ की जमीन केवल तेरह करोड़ में बेचने से चर्च का भीषण नुकसान हुआ है. इस पूरे मामले का पोप से कोई लेना-देना नहीं है, और ना ही यह कोई धार्मिक विशेषाधिकार है... केरल हाईकोर्ट सुनवाई और निर्णय में सक्षम है. 

अब संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी आखिर हैं कौन?? जिस प्रकार किसी सेल्समैन को 100% टारगेट प्राप्त करने पर ईनाम मिलता है, उसी प्रकार आर्चबिशप एलेंचेरी को कार्डिनल पद का ईनाम इसलिए मिला है, क्योंकि उन्होंने पिछले दो दशकों में कन्याकुमारी एवं नागरकोविल इलाके में धर्म परिवर्तन में भारी बढ़ोतरी की है। ज्ञात रहे कि एलेंचेरी महोदय वही “सज्जन” हैं जिन्होंने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानन्द स्मारक नहीं बनने देने के लिए जी-तोड़ प्रयास(?) किये थे, इसी प्रकार रामसेतु को तोड़कर “सेतुसमुद्रम” योजना को सिरे चढ़ाने के लिए करुणानिधि के साथ मिलकर एलेंचेरी महोदय ने बहुत “मेहनत”(?) की। हालांकि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी के प्रयासों तथा हिन्दू संगठनों के कड़े विरोध के कारण वह दोनों ही “दुष्कृत्य” में सफ़ल नहीं हो सके। 

इस आर्चबिशप के बारे में एक संक्षिप्त लेख 2012 में लिखा था, उसे भी पढ़ें... ये रहा लिंक -- http://www.desicnn.com/blog/cardinal-george-alencherry-indian-constitution-and-vatican 

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