क्या अरुण जेटली, NDTV के प्रणय रॉय को बचा रहे हैं??

Written by रविवार, 04 फरवरी 2018 12:41

जैसा कि अब सभी जानते हैं, पिछले कई वर्षों में NDTV के मालिक प्रणय रॉय (Prannoy Roy), सत्ता की नजदीकियों के चलते कई प्रकार के घोटालों एवं धोखाधड़ी (NDTV Frauds) में शामिल रहे हैं. NDTV कम्पनी ने न सिर्फ अपने शेयरधारकों को चूना लगाया है, बल्कि सरकारी माध्यमों और अफसरशाही का सहारा लेकर विभिन्न प्रकार के फ्राड में शामिल रही है.

NDTV चैनल स्वयं को कथित सेकुलरिज्म एवं तथाकथित प्रगतिशीलता (यानी भाजपा-संघ का विरोध) का स्वयंभू पुरोधा कहलाना पसंद करता है. मोदी सरकार आने के बाद NDTV के शेयरधारकों को उम्मीद जागी थी कि अब शायद इस घोर मोदी विरोधी चैनल और धोखेबाज प्रणय रॉय के खिलाफ जोरदार और त्वरित कार्यवाही की जाएगी, परन्तु विगत लगभग चार वर्षों में बड़ी प्रगति के नाम पर केवल इतना हुआ है कि NDTV पर 425 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया गया (केवल लगाया है, अभी वसूल करने में बहुत समय है) तथा चैनल के 30% शेयर, जो कि प्रणय रॉय ने एक फर्जी बेनामी कम्पनी RRPR (P) Ltd. में लगाए थे वे जब्त किए गए हैं. यह पढ़कर कुछ लोग अवश्य खुश हुए होंगे, परन्तु वास्तविकता यह है कि ये कार्यवाही भी अभी केवल प्राथमिक चरण में ही है और इसको भी “धीमा करने” के पूरे प्रयास वित्त मंत्रालय (Finance Ministry of India) के माध्यम से चल रहे हैं.

NDTV के खिलाफ जाँच कर रहे अधिकारियों मुख्य आयकर कमिश्नर एसके मिश्रा तथा मुख्य कमिश्नर पीके अम्बाष्ट को इस केस से हटाकर उनका स्थानान्तरण कर दिया गया. इस कदम से नाराज लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर पत्रों और ईमेल की बमबारी कर दी, तब PMO के हस्तक्षेप के बाद यह निश्चित हुआ कि ये दोनों अधिकारी NDTV के खिलाफ जाँच में अपने पद पर और दिल्ली में ही बने रहेंगे. इस पूरे मामले में सबसे संदिग्ध भूमिका रही SEBI (प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) की. जब सारे रिकॉर्ड खुलेआम यह सिद्ध कर रहे हैं कि प्रणय रॉय और उनके गिरोह ने अपनी कंपनी के शेयरों के भावों में “इनसाईड ट्रेडिंग और धोखाधड़ी” के जरिये उतार-चढ़ाव किए, तब भी SEBI ने एक कदम तक नहीं उठाया. सेबी की यह भीषण “अकर्मण्यता”, वित्त मंत्रालय की तरफ से इशारा हुए बिना संभव ही नहीं है.

दूसरी बात... सीबीआई (जिसे सरकार का पालतू तोता कहा जाता है), ने प्रणय रॉय के निवास पर ICICI बैंक के साथ धोखाधड़ी के मामले में जून 2017 में छापा मारा था. कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए, ठोस सबूत भी एकत्रित किए गए, लेकिन आज की दिनांक तक (यानी सात माह बीत जाने के बावजूद) CBI ने प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय को पेश होने के लिए सम्मन तक नहीं भेजा है. सीबीआई के इतिहास में यह अनोखा मौका है, जब छापेमारी और दस्तावेज जब्ती के बावजूद इतने लम्बे समय तक किसी व्यक्ति को बयान देने के लिए बुलाया तक नहीं गया है. ज़ाहिर है कि इस मामले में सीबीआई पर राजनैतिक दबाव तो है ही.

 

NDTV 1

तीसरी बात.... यही स्थिति ED की भी है, ED यानी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate). प्रवर्तन निदेशालय के डायरेक्टर ने NDTV द्वारा मनी लौन्डरिंग के मामले में बढ़-चढ़कर घोषणा की थी कि वह प्रणय रॉय के खिलाफ PMLA (Prevention of Money Laundering) क़ानून के तहत कार्यवाही शुरू करने जा रहे हैं. लेकिन रहस्यमयी तरीके से आज दिनांक तक एक भी केस रजिस्टर्ड नहीं हुआ है. अब पता चला है कि यह शक्तिशाली एजेंसी PMLA की बजाय FEMA (Foreign Exchange Maintenance Act) के तहत 2030 करोड़ रूपए की मनी लौन्डरिंग तथा विदेशों में नकली कम्पनियों के माध्यम से हेराफेरी के मामले में केस दर्ज करेगी. यहाँ पर सवाल उठता है कि अचानक प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA की बजाय FEMA क़ानून के तहत केस दर्ज करने के बारे में क्यों सोचा?? ऐसा इसलिए क्योंकि FEMA क़ानून के तहत आरोपी पर केवल जुर्माना किया जा सकता है, उसे जेल नहीं भेजा जाता... जबकि PMLA क़ानून के तहत मनी लौन्डरिंग की सजा कम से कम तीन और अधिकतम सात वर्ष की जेल है. स्वाभाविक है कि “लुटियन गिरोह” और वित्त मंत्रालय की मिलीभगत से प्रणय रॉय पर ज्यादा से ज्यादा जुर्माना ही हो सकता है (वह भी वर्षों के बाद, जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचेगा, तब). प्रणय रॉय को जेल भेजने का तो सवाल ही नहीं उठता.

ज़ाहिर है कि NDTV और प्रणय रॉय पर CBI, ED और सेबी की इस मेहरबानी की वजह लोगों को यही समझ में आ रही है कि वित्त मंत्रालय इस पूरे मामले में सशक्त हस्तक्षेप कर रहा है, वर्ना आयकर विभाग के इतने उच्च अधिकारियों को यूं ही रातोंरात ट्रांसफर नहीं किया जाता है. सनद रहे कि ये दोनों अधिकारी (यानी मिश्रा और अम्बष्ट) लालू-मुलायम-ममता इत्यादि की संपत्ति और घोटालों से सम्बंधित कई संवेदनशील मामले देख रहे हैं. NDTV पर 425 करोड़ का जुर्माना भी एसके मिश्रा ने ही ठोंका है. इसके अलावा प्रणय रॉय एवं राधिका रॉय दोनों ने तीस-तीस करोड़ का आयकर अपवंचन भी किया है, उसका नोटिस अलग से भेजा गया है. यहाँ तक तो प्रणय रॉय ने किसी तरह सहन कर लिया, लेकिन जब श्री अम्बष्ट ने एक फर्जी कम्पनी RRPR Holdings में लगाए गए NDTV के तीस प्रतिशत शेयर की जब्ती कर ली, तब ये बिलबिला उठा और इसने अपने संपर्कों के जरिये दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर करवा दिया. ज़ाहिर है कि इतने ऊंचे लेवल के अधिकारियों को निपटाने में वित्त मंत्रालय ने प्रमुख भूमिका निभाई. अधिकारियों के इस ट्रांसफर मामले में एक पेंच यह था कि इतने सीनियर अधिकारियों को दिल्ली से बाहर ट्रांसफर करने के लिए कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की अनुमति लेना आवश्यक होता है. यह समिति सीधे प्रधानमंत्री के नियंत्रण में होती है. इससे बचने के लिए अरुण जेटली ने चतुराई से मिश्रा का ट्रांसफर दिल्ली के दिल्ली में ही कर दिया, लेकिन झोन बदल दिया, ताकि दिल्ली से बाहर भेजने की कवायद भी न करनी पड़े और ये अधिकारी NDTV के मामले से हट भी जाए. सभी को याद है कि प्रणय रॉय के घर पर छापे के बाद इस चैनल ने दिल्ली में तम्बू लगाकर “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन” जैसी नकली हायतौबा मचाई थी, जबकि अभी तक ना तो केस दर्ज हुआ है, न बयान हेतु नोटिस गया है. यानी दोनों मोर्चों पर एक साथ दबाव बनाने और सेटिंग करने की रणनीति सफल रही है.

अब समय आ गया है कि NDTV मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय अपना सीधा नियंत्रण रखे. प्रणय रॉय के गिरोह को जेल भेजने की व्यवस्था करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को निजी रूप से ध्यान देना पड़ेगा, वरना वित्त मंत्रालय तो अपनी तरफ से इस जाँच और कार्यवाही को अधिक से अधिक धीमा और लंबा खींचने के मूड में लगता है, क्योंकि NDTV से अरुण जेटली के मधुर संबंधों को दिल्ली के पत्रकार से लेकर सोशल मीडिया तक सभी लोग जानते हैं. यह प्रधानमंत्री पर निर्भर करता है कि अब वे अगले डेढ़ वर्ष में इस मामले को कैसे आगे बढ़ाते हैं.

चौथी और अंतिम लज्जाजनक बात.... NDTV के फ्राड और चोरीचकारी को जानते-बूझते-समझते हुए भी NDTV पर दिन-रात बड़ी बेशर्मी से पधारने वाले सबसे ज्यादा दयनीय और मूर्ख तो भाजपा के प्रवक्ता नज़र आते हैं. जिस चैनल ने सन 2002 में प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करने में एक इंच की भी कोरकसर बाकी न रखी, चौबीस घंटे भाजपा-संघ के खिलाफ ज़हर उगला... उसी चैनल पर जब भाजपा के प्रवक्ता अपना पक्ष रखते दिखाई देते हैं, तो पार्टी की अक्ल पर माथा कूटने को जी चाहता है. पाठकों को याद होगा कि NDTV पर ही किस तरह एक बहस के दौरान एंकर निधि राज़दान ने भाजपा के तेजतर्रार प्रवक्ता संबित पात्रा को सरेआम बेइज्जत करके निकाल बाहर किया था. यदि भाजपा के किसी भी मंत्री या प्रवक्ता में “स्वाभिमान” नाम की कोई चिड़िया होती तो इनमें से कोई भी NDTV पर नज़र नहीं आता, बल्कि सत्ता की हनक दिखाकर इन धूर्तों से माफी भी मँगवाता. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कुछ नहीं हो रहा. पाठकों को ये भी याद होगा कि न्यायालय के एक निर्णय में NDTV को सजा के तौर पर चौबीस घंटे के लिए बंद करने की सलाह जारी की गयी थी, लेकिन इस सरकार के सूचना-प्रसारण मंत्री की आज तक हिम्मत नहीं हुई कि वे इस निर्णय का पालन करवा सकें. काहे का स्वाभिमान, काहे का क़ानून और कैसी इज्जत?? NDTV के सामने भाजपा की ऐसी दयनीय अवस्था इसके समर्थकों से देखी नहीं जाती.... लेकिन जब अरुण जेटली इस पर मेहरबान हैं, तो कौन क्या उखाड़ लेगा?? ये चैनल आज भी स्क्रीन काली कर रहा है, अपना सरकार विरोधी एजेण्डा खुलेआम चला रहा है और भाजपा-संघ के लोग केवल टुकुर-टुकुर देख रहे हैं.

साभार... :- Pgurus.com 

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भारत के बिकाऊ मीडिया और भाजपा के रुख के बारे में एक-दो लेख ये भी हैं... 

१) यह भाजपा की मूर्खता है, सहिष्णुता है या कूटनीति है??..... :- http://www.desicnn.com/news/sunetra-chowdhry-book-release-by-arun-jaitley-bjp-defensive-against-rogue-journalists 

२) NDTV द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना... :- http://www.desicnn.com/blog/ndtv-ndtv-communal-tv-channel-anti-judiciary-anti-hindu-ndtv 

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