NCERT पाठ्यक्रम बदलाव : संघर्ष अभी लंबा चलेगा..

Written by सोमवार, 15 जनवरी 2018 20:59

यदि आप सोचते हैं कि फेसबुक पर लिखने से कुछ नहीं होता, तो कुछ मित्रों की इस संघर्ष गाथा को पढ़िए. भारत के वास्तविक इतिहास के साथ रोमिला थापर छाप “नकली इतिहासकारों” (Fake Historians) ने जो कुकर्म किए हैं, उसे बदलने के लिए पिछले साढ़े तीन वर्ष से ललित मिश्रा और CA अनूप कुमार शर्मा के नेतृत्व में कुछ विद्वानों ने एक समूह बनाकर लगातार मोदी सरकार का पीछा किया, और अंततः लम्बे इंतज़ार के बाद इसे हासिल किया.

जैसा कि सभी जान चुके हैं, पिछले सत्तर वर्षों में भारतीय इतिहास को जानबूझकर और जमकर तोड़ा-मरोड़ा गया है, JNU जैसे संस्थानों में बैठे बुद्धिपिशाचों ने जमकर हिन्दू विरोधी ज़हर उगला (Distorted History in India) गया है. शिवाजी महाराज, महाराजा रंजीत सिंह, दक्षिण के सम्राट कृष्णदेवराय जैसे कई-कई दिग्गजों के इतिहास को NCERT की पुस्तकों में दो-तीन पृष्ठों में समेटा गया, जबकि क्रूर अकबर, अत्याचारी औरंगजेब जैसों को दस-दस पेज मिले और इन बाहरी लुटेरों का गुणगान भी किया गया. ये तो हुई हालिया इतिहास की बात, लेकिन विद्वानों के इस समूह का लक्ष्य था NCERT पाठ्यक्रम में वैदिक संस्कृति के बारे में जो इतिहास है, उसे पुनर्स्थापित करने का. दस वर्ष पहले 2007 में NCERT की पुस्तकों से भारत के वैदिक इतिहास को गायब करने की शुरुआत हुई थी. यूपीए भाग-दो सरकार में NCERT और मानव संसाधन मंत्रालय (HRD Ministry) के अधिकारियों के हौसले भी इतने बढ़े हुए थे कि उन्हें लगता था कि भारत का हिन्दू कभी जागरूक होगा ही नहीं और ये अनंतकाल तक अपनी मनमानी करते रहेंगे (हालाँकि इन अफसरों की यह सोच आज भी है, इसका कारण लेख में आगे पता चलेगा). कांग्रेसी-वामपंथी गठजोड़ यह समझता रहा कि NCERT एक निजी कम्पनी है और यहाँ बैठकर बड़े आराम से भारत का इतिहास बदला जा सकता है.... इन्होने बहुतेरे “सफल प्रयास” किए भी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब 2014 में सरकार बनी, तब इस बौद्धिक समूह (जिसमें 1971 के युद्ध में भाग ले चुके एक NRI, मेजर रूद्र भी शामिल हैं) के लोगों को आशा बँधी थी, कि अब जल्दी ही मामला सुलझाने में सहायता मिलेगी. लेकिन इनका दुर्भाग्य यह रहा कि इस सरकार में मानव संसाधन मंत्रालय शुरू से ढीलेढाले, सुस्त या दम्भी लोगों के हाथों में रहा, जो HRD अफसरों के हाथों में खेलते रहे, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि वास्तव में समस्या क्या है और उसका निराकरण कैसे करना है, इसलिए टालमटोल चलती रही.

जब NCERT का यह “बौद्धिक घोटाला” मेरी समझ में आया तो मैं बेहद आश्चर्यचकित हुआ, कि किस तरह से इन वामपंथियों ने हमारे वैदिक इतिहास के साथ “चमत्कार” किया हुआ है. रोमिला थापर, रामचंद्र गुहा, नीलाद्री शेषाद्री, जया मेनन जैसे एक से बढ़कर एक नकली लोगों ने समूची पाठ्यपुस्तकों को वैचारिक रूप से दूषित और बर्बाद कर दिया था. हमारे समूह ने तय किया कि इस षड्यंत्र के पीछे जो लोग हैं उन्हें बेनकाब और दण्डित तो किया ही जाए, साथ ही NCERT की पुस्तकों में अपेक्षित बदलाव और सही इतिहास का समावेश भी किया जाए. हमारी जीत सुनिश्चित करने के लिए हमने वेदों, इतिहास, भाषा और पुरातत्व संबंधी कई पुस्तकों का अध्ययन किया. हमारे समूह के कई मित्रों जैसे अभिजीत पारिक, अंकित तिवारी, सर्वेश तिवारी, सुरेन्द्र मिश्रा, प्रवीण मिश्र, रोहित पाठक, अनिल मिश्रा, जिज्ञासा मिश्रा, उमेश तिवारी, शुभम इत्यादि ने साथ बैठकर कई मुद्दों पर चर्चा की, ठोस बिंदु तैयार किए, एक प्रेजेंटेशन तैयार किया, ताकि मानव संसाधन मंत्रालय को समझाने में हमें अधिक दिक्कत न हो.

Brainwashed

अब आप देखिये यह “टाईमलाइन”, जिसे पढ़कर आपका दिमाग भी घूम जाएगा कि आखिर इस सरकार के मंत्रालय, मंत्री और अधिकारी किस प्रकार का “त्वरित”(??) काम कर रहे हैं... जब जून 2014 से लेकर जून 2016 तक, NCERT सहित अन्य पाठ्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं दिखाई दिया, मंत्रालयों में अफसरों पर नकेल कसी हुई नहीं दिखी, वही-वही वामपंथी चेहरे HRD से सम्बंधित विभागों के आसपास मंडराते दिखाई दिए, तब जाकर हमारा धैर्य जवाब दे गया... और शुरुआत इस प्रकार हुई....

-- जून 2016 से अक्टूबर 2016 तक :- PMO एवं HRD को एक दर्जन पत्र भेजे गए, जिसका कोई जवाब नहीं मिला. बुज़ुर्ग मेजर रूद्र ने PMO की आधिकारिक वेबसाईट पर “आधिकारिक रूप से” NCERT के फर्जी इतिहास के बारे में शिकायत दर्ज करवाई... लेकिन उसका भी पता नहीं क्या हुआ.

-- अक्टूबर 2016 :- मैंने और सर्वेश तिवारी ने मानव संसाधन मंत्रालय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के प्रमुख सचिव के बुलावे पर उन से भेंट करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मिलने का समय नहीं दिया. हम लोग केवल सचिव से बात करके वापस आ गए...

-- दिसम्बर 2016 :- हमने एक रणनीति के तहत एक साथ 100 पत्र HRD मंत्रालय और NCERT को भेजे, लेकिन किसी का जवाब नहीं आया. केवल NCERT का एक औपचारिक जवाब आया कि हम अपने पाठ्यक्रमों में निर्धारित प्रक्रिया और निर्धारित समय पर ही कुछ बदलाव करेंगे.

-- अगले दो माह तक मानव संसाधन मंत्रालय से फिर भी कोई जवाब नहीं आया, लेकिन हमारे पत्रों के दबाव में NCERT ने अपनी वेबसाईट पर एक “सुझाव विण्डो” खोल दी, जिसमें जिज्ञासा मिश्रा ने अपने तमाम सुझाव और वैदिक इतिहास को लेकर हमारी अपेक्षाएँ लिख भेजीं. 

-- दो माह और बीत गए, कुछ नहीं हुआ... कोई जवाब नहीं आया. मई 2017 में प्रोफ़ेसर धनुर्धारी मिश्रा हमारी मदद के लिए आगे आए और उन्होंने मानव संसाधन “राज्यमंत्री” से हमारी भेंट करवाई. अनूप शर्मा के साथ हमने उनसे भेंट की और फिर से A to Z कथा सुनाई.... फिर भी कोई बात आगे नहीं बढ़ी. 

-- जून 2017 :- मैं भाजपा के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से मिला, जो कि इतिहास के अच्छे जानकार हैं. उन्होंने हमारी बातें गंभीरता से सुनीं और तत्काल प्रकाश जावड़ेकर को फोन लगाया. परन्तु NCERT के निदेशक हृषिकेश सेनापति ने मंत्रीजी को गुमराह कर दिया कि NCERT की पुस्तकों में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, उसमें केवल “थीम” है, न कि अध्याय. जावड़ेकर ने निदेशक से एक बार भी उन “कथित थीम्स” को दिखाने के लिए नहीं कहा, और चुपचाप उनकी बात मानकर हमें चलता कर दिया. 

-- अगस्त 2017 :- मैंने केन्द्र सरकार के शिक्षा सचिव अनिल किशोर से भेंट करने का समय माँगा, लेकिन उन्होंने भी इनकार कर दिया.

-- सितम्बर 2017 :- मैं फिर से एक बार सुधांशु त्रिवेदी का रेफरेंस लेकर संघ मुख्यालय नागपुर पहुँचा, और सुनील अंबेकर से मिला, ताकि मामला आगे बढ़ाया जा सके. इसका भी कोई खास लाभ नहीं हुआ.

-- अक्टूबर 2017 :- मैं और अनूप कुमार फिर से NCERT पहुँचे और वहाँ सचिव मेजर हर्ष से मिले. हमारे वहाँ पहुँचने से पहले ही उन्होंने हमारे बारे में सारी सूचनाएँ एकत्रित कर ली थीं लेकिन अधिकारियों ने उन्हें ये कहते हुए गुमराह कर दिया, कि ये लोग बहुत खतरनाक लोग हैं, तथा NCERT की “इमेज” को हानि पहुँचा सकते हैं. उन्होंने हमारी बात सुनी और यूँ ही टरका दिया. 

-- नवंबर 2017 :- मैं लगातार PMO को पत्र भेजता रहा और उसका ऑनलाइन फालो-अप लेता रहा. 

-- दिसम्बर 2017 :- डेढ़ वर्ष तक इधर-उधर के चक्कर काटते, और धक्के खाते हुए मानव संसाधन मंत्रालय, जावड़ेकर और NCERT के लोगों का रवैया देखकर अंततः मेरा धैर्य टूट गया, और मैंने एक “आग उगलता हुआ” पत्र प्रधानमंत्री जी को लिखा, जिसकी प्रति मैंने HRD मंत्रालय, NCERT के निदेशक तथा देश के कई विचारकों को भेजी. इनमें से एक श्री गोयल साहब ने मुझसे संपर्क किया और साफ़ तौर पर लिखा कि मानव संसाधन मंत्रालय इस सरकार का सबसे खराब और नाकारा मंत्रालय है. 

शायद इन अंतिम पत्रों ने कुछ असर पैदा किया और अंततः 12 दिसम्बर 2017 को हमें NCERT बुलाया गया. यहाँ हमें आश्वासन दिया गया कि अगले सत्र से NCERT की किताबों में आपके द्वारा वांछित बदलाव कर लिए जाएँगे. हम लोग तब तक वहीं डटे रहे, जब तक कि फाईल पर हस्ताक्षर होकर उसे निचले अधिकारी के हवाले नहीं कर दिया गया. 

NCERT

(सुधांशु त्रिवेदी के साथ चित्र में ये है वह टीम जिसने मानव संसाधन मंत्रालय में लगातार संघर्ष किया, और फिलहाल आंशिक सफलता हासिल की)

अब हमें थोड़ी उम्मीद जागी है कि –

१) विकृत इतिहास लिखने वाले वामपंथियों का वर्चस्व मानव संसाधन मंत्रालय से हटेगा.

२) दोहरे चरित्र वाले वामियों का असली चेहरा जनता के सामने आएगा.

३) भारत के NCERT छात्र वास्तविक इतिहास पढ़ सकेंगे.

फिलहाल मामला केवल आश्वासन पर ही टिका है, लेकिन इसे हम पहले चरण का युद्ध जीतना मान सकते हैं... अभी तो हमें मानव संसाधन मंत्रालय के कई चक्कर और काटने पड़ेंगे....

(जिस टाईम लाइन का ज़िक्र लेख में किया है, बस एक बार सोचकर देखिये कि यदि अरुण शौरी मानव संसाधन मंत्री होते, तो इस टाईमलाइन का जन्म ही नहीं होता... यदि इसी "गति" से HRD का काम होता रहा, तो सन 2052 तक भी वामपंथी दुष्प्रचार और विकृत इतिहास से लड़ नहीं पाएँगे हम...)

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मूल अंग्रेजी लेख :- ललित मिश्रा.....   हिन्दी अनुवाद : सुरेश चिपलूनकर

NCERT और मानव संसाधन मंत्रालय के कुछ और वामपंथी काले कारनामों पर लेखों की लिंक इस प्रकार है... 

१) मुगलों की वंदना, मराठों की उपेक्षा... :- http://www.desicnn.com/news/ncert-curriculum-books-are-spreading-lies-and-forged-facts-about-maratha-empire 

२) पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली और हमारा NCERT... :- http://www.desicnn.com/blog/pakistan-education-system-indian-secular-intellectuals 

३) RTE (शिक्षा का अधिकार) क़ानून यानी हिंदुओं के लिए जज़िया... :- http://www.desicnn.com/news/right-to-education-law-is-blatantly-anti-hindu 

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