नोटबंदी भाग-२ (अघोषित) जल्द शुरू होने जा रहा है...

Written by गुरुवार, 06 जुलाई 2017 07:59

हाल ही में रिजर्व बैंक ने घोषणा की है कि वह 200 रूपए के नए नोट छापना आरम्भ कर चुका है और इन नोटों को जल्द ही बाज़ार में लाया जाएगा. अर्थात परदे के पीछे नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के भाग-२ की पटकथा पूरी लिखी जा चुकी है.

परन्तु इस बार नोटबंदी का यह अगला भाग बिना किसी घोषणा के हौले-हौले होगा, ताकि जनता को कोई परेशानी न हो. नोटबंदी के पहले भाग में 500-1000 के पुराने सारे नोट बदले गए थे और उनके स्थान पर 500 और 2000 के नए नोट मार्केट में डाले गए थे. परन्तु नोट बंदी के इस भाग में बदलाव की प्रक्रिया आम जनता के सीधे संपर्क में आए बिना पूरी कर ली जाएगी.

पिछली नोटबंदी के समय विरोधियों ने यह सवाल प्रमुखता से उठाया था कि 1000 के नोट बंद करके 2000 के नोट शुरू करने की क्या तुक है? बात सही भी थी, क्योंकि जो लोग काला धन रखते हैं अथवा बिना किसी बिल और रसीद के मोटी-मोटी राशियाँ नकद लेनदेन करते हैं उनके लिए तो 2000 का नोट और भी सुभीता था. परन्तु मोदी समर्थकों ने उसी समय कह दिया था कि निश्चित रूप से यह एक तात्कालिक व्यवस्था है, और अब वैसा ही होने जा रहा है. नोटबंदी के भाग-२ में सबसे पहले 2000 का नोट बंद किया जाएगा. लेकिन इसमें भी जनता का ध्यान रखने की योजना इस प्रकार है कि पिछली बार की तरह 2000 के नोट बंद करने की घोषणा अचानक नहीं की जाएगी, बल्कि जनता के माध्यम से अब बैंकों में आने वाले 2000 के नोटों को वापस बाज़ार में भेजा ही नहीं जाएगा. इससे होगा यह कि एक तरफ तो 200-200 के नए नोट धीरे-धीरे मार्केट में चलना शुरू हो जाएँगे, जबकि 2000 के नोटों की किल्लत होनी शुरू हो जाएगी. स्वाभाविक है कि यह अघोषित नोटबंदी होगी, इसलिए जनता धीरे-धीरे अपने-आप छोटे नोटों में नकद व्यवहार तथा डिजिटल माध्यमों, चेक तथा ई-वॉलेट के जरिए बड़े भुगतान करना शुरू कर देगी. हालाँकि 500 के नोट बाज़ार में रहेंगे ही, परन्तु 2000 के नोटों की “कृत्रिम” कमी से बैंक और सरकार बड़ी राशि के भुगतानों को डिजिटल की तरफ धकेलेगी. जब बाज़ार में भरपूर मात्रा में 200 रूपए के नोट आ जाएँगे, तथा बैंकों के पास बड़ी मात्रा में 2000 के नोट एकत्रित हो जाएँगे, उस समय किसी दिन अचानक (संभवतः 31 दिसंबर से पहले) प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्र के नाम सन्देश देकर 2000 का नोट बंद करने के घोषणा कर देंगे. ऐसा करने से फायदा यह होगा कि उस समय तक अधिकाँश निम्न-मध्यम वर्गीय लोगों के पास 2000 के नोट ख़त्म हो चुके होंगे, तथा उच्च-मध्यम वर्ग के पास भी बहुत ही कम नोट बचेंगे, क्योंकि बैंक पिछले तीन-चार माह से बैंकों में आने वाले 2000 के नोट बाहर जाने ही नहीं दे रही... तो स्वाभाविक है कि जैसी अफरातफरी पिछली बार मची थी, वैसी नहीं मचेगी और नोटबंदी भाग-२ सरलता से निपट जाएगा.

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पिछली नोटबंदी के समय प्रक्रियागत गड़बड़ी यह हुई थी कि पुराने नोटों की वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नए नोटों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही थी, इस बार ऐसा नहीं होगा, क्योंकि “परिवर्तन” की यह प्रक्रिया सिस्टम के साथ-साथ समानांतर रूप से चलती रहेगी. नोटबंदी के भाग-३ में यही प्रक्रिया 500 के नोटों के साथ चलाई जाएगी. अर्थात आने वाले तीन-चार वर्षों के अन्दर भारत की सबसे बड़ी मुद्रा 200 रूपए का नोट ही होगी, जो कि देश की 86% से अधिक आम जनता के उपयोग में आती है. 500 और 2000 के नोटों का नियमित उपयोग करने वाले मुश्किल से 10-15% लोग हैं, वे लोग अपने नोट (जो भी उस समय तक बचे रहेंगे), बैंक में जाकर बदलवा लेंगे. बैंकों पर भी अधिक बोझ नहीं पड़ेगा. अभी 2000 के नोटों के लेनदेन में समस्या आती है, परन्तु 200 रूपए के नए नोट बाजार में आने से छोटे लोगों के बीच, छोटी राशि की नकद मुद्रा का लेनदेन सरलता से हो सकेगा.

कुल मिलाकर बात यह है कि चूँकि पिछली बार नोटबंदी की योजना लीक होने की आशंका थी, इसलिए मोदी ने उस समय ताबड़तोड़ निर्णय लिया, लेकिन इस बार मोदी जल्दी में नहीं हैं, क्योंकि इस बार को “अघोषित” नोटबंदी भाग-२ लागू होगा, जिसमें जनता को पता भी नहीं चलेगा और 2000 के नोट मार्केट से धीरे-धीरे गायब हो जाएँगे. फिलहाल आप देखते जाईये, जहाँ एक तरफ PAN कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ दिया गया है, आधार कार्ड को मोबाईल नंबर से जोड़ा जा रहा है, 50,000 रूपए से ऊपर के सभी लेनदेन में आधार कार्ड और पैन कार्ड अनिवार्य किया जा चुका है... यानी काला धन उत्पन्न होने और सामान्य लोगों द्वारा भ्रष्टाचार के जो माध्यम हैं उनके छोटे-छोटे छिद्र हैं, वे धीरे-धीरे बंद किए जा रहे हैं. सभी प्रकार का लेनदेन सरकार की निगाह में रहेगा, और यह सही भी है. बहरहाल नोटबंदी भाग-२ पूरा होने के बाद संभवतः अगले कार्यकाल में यानी 2019 के बाद नोटबंदी भाग-३ अर्थात 500 के नोट धीरे-धीरे ख़त्म करने की योजना बनेगी. संभवतः जमीनों और मकान की रजिस्ट्रियों को आधार कार्ड से जोड़ने की प्रक्रिया भी अगले कार्यकाल में ही होगी, उस समय बड़े-बड़े भू-माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के होश ठिकाने लगेंगे, जिन्होंने विभिन्न शहरों में आठ-दस फ़्लैट अपने नौकरों के नाम से अटका रखे हैं...

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