हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर ने इस्लाम की पोल खोली

हिजबुल प्रमुख ज़ाकिर राशिद के अनुसार राष्ट्रवाद और लोकतंत्र गैर-इस्लामिक हैं. 

 

हिजबुल मुजाहिदीन के कश्मीर विंग के प्रमुख ज़ाकिर राशिद ने उर्फ़ मूसा ने एक वीडियो जारी करके कहा है कि “लोकतंत्र” और “राष्ट्रवाद” शब्द इस्लाम में हैं ही नहीं, यह पूरी तरह से गैर-इस्लामिक हैं. कश्मीर में जो युवा भारतीय सेना पर पत्थर फेंक रहे हैं वे इस्लाम के लिए लड़ रहे हैं ना कि कश्मीर के लिए. छः मिनट के वीडियो में ज़ाकिर राशिद ने पत्थरबाजों से अपील की है कि वे अपने भीतर झाँकें और पूछें कि वे भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्थर क्यों फेंक रहे हैं. मैं देख रहा हूँ कि कश्मीर में हमारे ही कुछ भाई “लोकतंत्र” के लिए लड़ रहे हैं, मुझे आश्चर्य होता है क्योंकि लोकतंत्र तो अपने-आप में गैर-इस्लामिक है. 

विगत आठ जुलाई को बुरहान वाणी के मारे जाने के बाद हिजबुल कश्मीर विंग की कमान ज़ाकिर राशिद ने संभाली है. राशिद आगे कहता है, “हम कश्मीर में लोकतंत्र स्थापना के लिए नहीं, बल्कि शरिया स्थापना के लिए लड़ रहे हैं”. हम भारतीय सुरक्षा बलों को चेतावनी देना चाहते हैं कि हमारे लड़ाकों को मारकर वे चैन से नहीं बैठ सकेंगे. सुरक्षा बल कश्मीर की स्थानीय पुलिस को कवच बनाकर हमसे लड़ रहे हैं, इन पुलिसवालों से भी हम अपील करते हैं कि वे “इस्लाम” के साथ आएँ. ज़ाकिर का कहना है कि कश्मीर के उलेमा और मौलवी डरपोक हैं इसीलिए यह बात खुलकर नहीं कह पाते, जो मैंने कही है.

उल्लेखनीय है कि चार साल पहले ही ज़ाकिर राशिद ने इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ गया.... बुरहान वानी के बाद इसे कश्मीरी युवाओं को बरगलाने की कमान सौंपी गई है. अलबत्ता “लोकतंत्र” और “राष्ट्रवाद” के बारे ज़ाकिर ने एकदम सही आकलन किया है... इस्लाम में इनका कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इस्लाम किसी देश की सीमाओं को नहीं मानता, इसमें पूरी दुनिया को “दारुल-इस्लाम” में बदलने का आग्रह है. जरा हिसाब लगाकर बताईये तो कि पचास से अधिक इस्लामिक देशों में से कितने देशों में "दिखावे का खूनखराबा लोकतंत्र” है, कितने मुस्लिम देशों में “वास्तविक लोकतंत्र”?? बाकी आप खुद ही समझ जाएँगे...

Tags: desiCNN, Democracy and Communism, Democracy and Islam, Hizbul Commander in Kashmir, Nationalism in Islam

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