"आब-ए-शैतान" क्या है, आप जानते हैं? मुसीबतों की जड़...

Written by शनिवार, 08 अप्रैल 2017 18:50

1963 या 1964 की बात है - कलकत्ता में मेरे नाना जी ने मुझे ट्रेनिंग देने के मकसद से छोटे मोटे हिसाब रखने की जिम्मेदारी दे रखी थी| पेट्रोल पम्प पर एकाउंट था और गाड़ी में पेट्रोल भरने के बाद उनके दस्तख़त की हुई पर्ची पर तारीख और पेट्रोल की मात्रा लिख कर मैं देता था|

 उस समय शायद 80 पैसे लीटर पट्रोल था और लैंडमास्टर कार 1 लीटर पेट्रोल में 5-6 किलोमीटर चलती थी|

एक बार पेट्रोल भरवाने गया तो एक बेडफ़ोर्ड ट्रक की पेट्रोल टंकी भरी जा रही थी| पेट्रोल की टंकी पर बंगला भाषा में "आब-ए-शैतान" लिखा था| बहुत अजीब लगा| मैंने ट्रक के मालिक लुंगीधारी चचा से पूछा कि इस शब्द का मतलब क्या होता है? चचा ने दार्शनिक अन्दाज में बताया, कि "उनके ब्राण्ड के ऊपर वाले ने" सब कुछ बनाया - लेकिन ये पेट्रोल, शैतान का बनाया हुआ है और इसी की वजह से दुनिया आपस में लड़ेगी-मरेगी-मारेगी| लोग अभी मेरी बात पर हँसते हैं - मुझे पागल कहते हैं लेकिन आने वाले वक्त में ऐसा ही होगा|

चचा अपनी ट्रक में पेट्रोल भरा कर चल दिये - मैं भी गाड़ी में पेट्रोल भरा कर इस बात को चचा के दिमाग का फ़ितूर समझ कर भूल गया| 1990 में जब इराक ने कुवैत पर "क्रूड आयल" के लिये हमला कर दिया, तब अचानक चचा की कही बात याद आयी| "आब-ए-शैतान" याने कि शैतान का पानी... दुनिया में पहले जर, जोरू और जमीन के लिये लड़ाइयाँ होती थीं... लेकिन जब से आब-ए-शैतान का पता चला है, और उसे बेच कर जिन मुल्कों ने बेशुमार दौलत कमाई है - उनके दिमाग पर शैतान हावी हो गया है, और वे अपने शैतान के पानी को बेच कर कमाई गयी बेहिसाब दौलत को शैतानियत के कामों में - याने कि खूनी जंग और मासूमों के क़त्ल में कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं| 

इसी आब-ए-शैतान को बेच कर कमायी बेशुमार दौलत का इस्तेमाल दहशतगर्दियों की फौजें खड़ी करने में हो रहा है, जिसकी वजह से हर जगह या तो लड़ाइयाँ छिड़ी हुई हैं या फिर ख़ूनी लड़ाइयों का माहौल बनाया जा रहा है। आब-ए-शैतान बेच कर कमाई गयी दौलत को नेक काम करने की आड़ में मासूम बच्चों के दिमाग में शैतानियत का पाठ पढ़ाने, और उन्हें जंगखोर और फिदायीन बनाने के ख़ातिर दिमागी और जिस्मानी तौर पर तैयार किया जाता है जिससे वो मासूमों का बेरहमी से क़त्ल करें और दुनिया में तबाही फैला दें, ताकि दुनिया पर उसी शैतान की हुकूमत कायम हो सके, जिसने आब-ए-शैतान बनाया।

आब-ए-शैतान ने तो मशीनों को भी नहीं बख्शा... जब मशीनों को चलाने की खातिर इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो मशीन जहरीला धुआँ छोड़ती है जिसे कार्बन मोनो ऑक्साइड कहा जाता है और जिसकी वजह से मौतें होती हैं. आब-ए-शैतान से ही प्लास्टिक बनता है जो ख़त्म नहीं होता है, और कुदरत को सिर्फ़ और सिर्फ़ नुकसान पहुँचाता है। आब-ए-शैतान से बनी जितनी भी चीजें ईजाद की गयी हैं, उन सब में पता करें तो मालूम पड़ेगा कि उनके इस्तेमाल से आखिर में कुदरत को नुकसान ही होता है, और ऊपर वाले की बनाई हुई कुदरत को नुकसान पहुँचाना ही "शैतान" का असली मकसद है।

Bye Products of Crude Oil

लेकिन इसी का दूसरा पहलू यह भी है, जिस दिन इस दुनिया से "आब-ए-शैतान" ख़त्म हो जाएगा, या दुनिया के वैज्ञानिक उस स्तर पर पहुँच जाएँगे कि "आब-ए-शैतान" के बिना भी मनुष्य का जीवन चल सके... तब क्या होगा?? ज़ाहिर है कि जिस आब-ए-शैतान (यानी क्रूड ऑइल) को लेकर शैतान ने दुनिया में जो खूनी खेल मचाया हुआ है, वह भी ख़त्म होगा. इसलिए आईये दुआ करें कि ऐसी कोई तकनीक निकलकर सामने आए कि पूर्व दिशा के लोगों द्वारा पूजे जाने वाले सूर्य देवता की शक्ति दुनिया को प्राप्त हो, और इस "आबे-शैतान" से मुक्ति मिले... तभी यह दुनिया शान्ति से रहने के काबिल बनेगी... आमीन.

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