मध्यप्रदेश के राणापुर में एक और सेकुलर रेप...

Written by बुधवार, 15 फरवरी 2017 10:58

आपने मेरा लेख पढ़ा होगा (यहाँ पढ़ें) जिसमें मैंने बताया है कि “सेकुलर रेप” और “साम्प्रदायिक रेप” के बीच क्या अंतर होता है. उसी को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश के रानापुर में एक “सफ़ेद शांतिदूत” यानी पादरी हेनोप अलेग्जेंडर ने एक सैंतीस वर्षीय आदिवासी महिला के साथ बलात्कार कर डाला है.

यह आदिवासी महिला चर्च के परिसर में ही निवास करती थी और उसका पति बाहर गया हुआ था. पादरी महाशय चर्च छोड़कर फरार हो गए हैं और पुलिस तलाश में जुटी है...

चर्च परिसरों में बलात्कारों तथा बाल यौन शोषण की ख़बरें भारत में व्याप्त “सेकुलरिज़्म” नामक एड्स की वजह से कभी सुर्खियाँ नहीं बन पातीं, लेकिन वास्तव में केरल-नगालैंड जैसे ईसाई अधिसंख्यक राज्यों में पादरियों द्वारा की जाने वाली ऐसी हरकतें अत्यधिक बढ़ गई हैं. जब भी ऐसा कुछ होता है तो चर्च के वरिष्ठ अधिकारी मामले को दबाने में जुट जाते हैं. सिस्टर को मदर बनाने वाले बलात्कारी “फादर” अथवा पादरी के बचाव में पूरी मशीनरी झोंक दी जाती है, बाकी का काम चर्च के खरीदे हुए “हिन्दू दलाल” पूरा कर देते हैं. पिछले नवंबर में केरल के कोझिकोड में एक बिशप ने एक महिला के साथ बलात्कार किया, लेकिन पुलिस उसकी जाँच भटकाने में लगी रही. कई माह बाद जब युवती के रिश्तेदारों ने मीडिया के जरिये दबाव बनाया तब उसे पकड़ा गया और केस चला. इसी प्रकार कोट्टापुरम चर्च के एक पादरी ने एक आदिवासी बच्चे से यौन शोषण किया था और बड़ी मुश्किल से उसकी गिरफ्तारी POSCO क़ानून के तहत हो सकी.

 

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पिछले माह पत्रिका आउटलुक ने भी एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें बताया गया था कि चर्च किस तरह से बलात्कारी पादरियों के बचाव में लगा रहता है. चर्च में यह महामारी विदेशों से आई है. स्वयं पोप स्वीकार कर चुके हैं कि वेटिकन ऐसे मामलों को निपटाने में अक्षम साबित हुआ है. यूरोप में चर्च ने विभिन्न यौन शोषण मामलों के दावों में मुआवज़े के रूप में अभी तक दो सौ करोड़ डॉलर से अधिक खर्च कर दिए हैं.... और इधर भारत में “सेकुलर रेप” धडल्ले से जारी हैं.

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