खतरनाक खेल "ब्लू व्हेल" से हार गई भारत सरकार

Written by मंगलवार, 21 नवम्बर 2017 20:07

जैसा कि अब लगभग पूरे देश के लोग जान चुके हैं कि मोबाईल पर ऑनलाइन (Online Games in India) खेला जाने वाला एक खेल है, “ब्ल्यू व्हेल” (Blue Whale Challenge). इस खेल में अक्सर किशोर के युवाओं को बड़ी ख़ूबसूरती से फांसा जाता है, और एक के बाद एक स्टेज पार करने का “टास्क” दिया जाता है, जिसमें कलाई काटने से लेकर ऊँची बिल्डिंग से कूदने जैसे मूर्खतापूर्ण टास्क भी होते हैं.

इस खेल की अंतिम स्टेज “आत्महत्या” होती है, जिसमें खेलने वाले को मरना होता है. पूरे भारत में अभी तक दर्जनों किशोरवय बच्चे और युवा इस मूर्खतापूर्ण (लेकिन खतरनाक) खेल की चपेट में आकर अपनी जान गँवा चुके हैं.

कुछ दिनों पूर्व एक समाजसेवी व्यक्ति ने इस हत्यारे खेल ब्ल्यू व्हेल को भारत में प्रतिबंधित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर केन्द्र सरकार को जवाब देना था. अब हाल ही में भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के माध्यम से केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि तकनीकी रूप से इस खेल भारत में प्रतिबंधित करना अथवा रोक सकना संभव नहीं है. जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस खानविलकर और जस्टिस चंद्रचूड के समक्ष केन्द्र सरकार की तरफ से लिखित में कहा गया है कि सरकार ने आईटी विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनियों के साथ इस सम्बन्ध में कई बैठकें की हैं और पाया गया है कि ब्ल्यू व्हेल खेल को तकनीकी रूप से रोकना संभव नहीं है. सरकार का कहना है कि इस खेल को मोबाईल से मोबाईल में फैलने से रोकने का उसके पास कोई तकनीकी उपाय नहीं है, क्योंकि यह खेल एक-दूसरे के मोबाईलों से होता हुआ फ़ैल रहा है, ना कि किसी इंटरनेट की वेबसाइट अथवा सर्वर के माध्यम से. इसलिए इस खेल की लिंक को पकड़ पाना असंभव है.

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि हमने इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना तकनीक मंत्रालय, सूचना प्रसारण मंत्रालय सहित कुछ शोध संस्थानों, सायबर सुरक्षा संस्थाओं जैसे इन्द्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी, CDAC, अमृता विश्वविद्यालय, इन्डियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम (CRET) जैसी कई दिग्गज संस्थानों के साथ बैठक की है और यह पाया गया है कि ब्ल्यू व्हेल खेल को पूरी तरह रोक पाना, अथवा भारत में प्रतिबंधित कर पाना सम्भव नहीं है. केन्द्र ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि सरकार ने गूगल एवं फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपनियों एवं उनके सर्वर केन्द्रों से भी संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से भी इस खेल को रोकने में असमर्थता जताई गई है. किसी भी वेबसाईट पते, इंटरनेट प्रोटोकॉल अथवा किसी कंटेंट को इंटरनेट से हटाया अथवा प्रतिबंधित किया जा सकता है, लेकिन ब्ल्यू व्हेल खेल को नहीं. इतना अवश्य किया जा सकता है कि ब्ल्यू व्हेल नामक शब्द को इंटरनेट सर्च की काली सूची में डाल दिया जाए ताकि यह इंटरनेट पर नहीं खोजा जा सके.

केन्द्र के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका समाप्त घोषित कर दी और केन्द्र-राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं कि इस जानलेवा खेल के विरुद्ध बच्चों में जागरूकता का अभियान चलाया जाए, ताकि वे अपने मोबाईल में इस खेल को डाउनलोड न करें. केन्द्र ने भी अपनी तरफ से केन्द्रीय विद्यालयों एवं राज्य सरकारों के स्कूलों को सलाह जारी कर दी है कि वे स्कूलों में बच्चों को मोबाईल से दूर रखें और उनके व्यवहार पर निगाह रखें. बच्चे के व्यवहार में कोई भी संदिग्ध बात दिखाई दे तो पहले उसके पालकों और फिर पुलिस को तत्काल सूचित किया जाए.

यह तो हुई केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की बात. लेकिन कई लोगों के मन में अभी भी यह कौतूहल बरकरार है कि क्या सुदूर रूस में बैठा एक अदना सा व्यक्ति कोई खतरनाक खेल बनाए, और उसे इंटरनेट पर फैला दे, लेकिन फिर भी इतनी शक्तिशाली और साधन सम्पन्न भारत सरकार उसे रोक न पाए? क्या भारत के तकनीकी विशेषज्ञ इतने लाचार हैं, कि वे एक मोबाईल गेम से हार गए हैं? दिल्ली निवासी सुखविंदर कहते हैं कि जब चीन अपने देश में गूगल और फेसबुक जैसी महाकाय कंपनियों तक को प्रतिबंधित कर सकता है, तो क्या हम एक मोबाईल गेम को प्रतिबंधित नहीं कर सकते? चेन्नै के एक पालक ने पूछा है कि क्या भारत जैसी विशाल “सॉफ्टवेयर पावर” में ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद नहीं हैं, कि वे इस खतरनाक गेम की कोई ट्रैकिंग व्यवस्था बना सकें? क्या यह खेल चीन में भी इसी तरह फ़ैल रहा है? या वहाँ पर इसे रोका जा चुका है?

केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए इस हलफनामे के बाद देश के कई पालक चिंता में डूब गए हैं, कि जब तकनीकी विशेषज्ञों ने ही इस मोबाईल गेम के सामने घुटने टेक दिए हैं, तो अब क्या किया जाए? एक गैर-तकनीकी सामान्य व्यक्ति के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकार कहती है कि “एप्प आधारित” मामूली से मोबाईल गेम्स को रोकना भी असंभव है, तो फिर भारत में सामान्य सायबर सुरक्षा के क्या हाल होंगे?? मोबाईलों से किए जाने वाले तमाम व्यवहार, चाहे वह कितने भी सुरक्षित एप्प से किए जा रहे हों, वह कितने सुरक्षित होंगे?? वहीं एक बात और भी है, कि भारत में पोर्न फिल्मों और पोर्न वेबसाइटों का कारोबार भी तेजी से फ़ैल रहा है, सरकार उसको भी कहाँ रोक पा रही है? सब कुछ धड़ल्ले से चल रहा है... ऐसे में जनता अपने बच्चों और लड़कियों की सुरक्षा के लिए चिंतित होने के अलावा करे भी क्या? क्या इंटरनेट तकनीक ने हमें इतना गिरफ्त में ले लिया है? 

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