बांग्लादेश ने आतंकी घुसपैठ से भारत को सावधान किया

Written by मंगलवार, 21 मार्च 2017 08:10

बांग्लादेश की सरकार ने एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी है, जिसमें कहा गया है कि हरकत-उल-जेहादी-इस्लामी (हूजी) तथा जमानत-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के सैकड़ों आतंकवादी भारत में या तो प्रवेश कर चुके हैं या घुसने की तैयारी में हैं.

इन आतंकियों की संख्या में 2015 के मुकाबले 2016 में तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा सरकारों को भी अलर्ट भेजा जा चुका है. उल्लेखनीय है कि बर्दवान बम धमाकों में JMB का हाथ पाया गया था, जिसमें दो आतंकियों की बम बनाते समय मृत्यु हो गई थी.

बांग्लादेश ने चेताया है कि लगभग दो हजार आतंकी बंगाल सीमा से प्रवेश कर चुके हैं, क्योंकि यहाँ उनके लिए सर्वाधिक “दोस्ताना माहौल” तथा BSF का भ्रष्टाचार मौजूद है. “दोस्ताना माहौल” की जो बात बांग्लादेश कह रहा है, वह सोशल मीडिया पर पिछले दस वर्षों से कही जा रही है कि वामपंथ के तीस वर्षीय शासन और अब इसके बाद “मुमताज़ बानोर्जी” के पिछले पाँच वर्षों में इस्लामिक कट्टरता तथा मुस्लिम आबादी बंगाल में खतरनाक सीमा को पार कर चुकी है. बर्दवान धमाके में भी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की संलिप्तता पाई जा चुकी है.

बंगाल के DIG ने कहा है कि हम बांग्लादेश से प्राप्त सूचनाओं का आकलन और अध्ययन कर रहे हैं और सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएँगे. पुलिस प्रमुख में माना कि पिछले छः माह में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है और JMB के लगभग 54 आतंकियों को गिरफ्तार किया जा चुका है (ये बात भारत के कथित मुख्यधारा के मीडिया ने छिपा रखी). यह सूचना भी मिली है कि JMB का सचिव इफ्तादुर रहमान बारह जनवरी को ही भारत में नकली पासपोर्ट से प्रवेश कर चुका है. इफ्तादुर रहमान का असली नाम सज्जाद हुसैन है और ख़ुफ़िया सूचनाओं के अनुसार वह नेपाल-बांग्लादेश की यात्राएँ बड़े आराम से करता रहता है. हूजी और JMB के आतंकियों के बीच तालमेल बनाने के लिए बांग्लादेश के मेमनसिंह जिले में 18 जनवरी को एक बैठक भी हुई थी. भारत के सुरक्षा अधिकारियों और ख़ुफ़िया एजेंसियों की मानें तो बर्दवान बम धमाके के बाद जब से मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों में चौकसी बढ़ाई गई, उसके बाद इन आतंकियों ने अपना रूट बदल लिया. अब ये आतंकी नेपाल, त्रिपुरा और आसाम के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं.

असल में बांग्लादेश की सरकार द्वारा 1971 युद्ध के अपराधियों और इस्लामी कट्टर मौलानाओं पर लगातार जो कठोर कार्यवाही चल रही है, विशेष कोर्ट में त्वरित सुनवाई करके फाँसी दी जा रही है, उसके कारण आतंकी अब अपने ठिकाने बदलने को मजबूर हो चले हैं. ऐसे में पश्चिम बंगाल से बेहतर ठिकाना उनके लिए और क्या हो सकता है?? लेकिन मूल सवाल यह है कि केंद्र की मोदी सरकार कब तक मूक दर्शक बनी बैठी रहेगी? यूपी में भारी बहुमत के बाद क्या ममता की नकेल कसने का वक्त नहीं आ गया है... जनता पूरी तरह से साथ है, बस हिम्मत की जरूरत है. जो काम बांग्लादेश कर सकता है, क्या भारत सरकार नहीं कर सकती?

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