सादगी, प्रतिभा और सज्जनता की मिसाल :- एलिएस्टर कुक

Written by मंगलवार, 11 सितम्बर 2018 12:53

टेलीकॉम इन्जीनियर पिता और प्राथमिक शिक्षिका माता की एक संतान जो अपने मध्यमवर्गीय परिवेश में पला-बढ़ा. इसे बचपन से संगीत और गाने का शौक रहा लेकिन क्रिकेट भी उतना ही प्रिय था. एक बार एमसीसी (MCC Cricket) की टीम उसके स्कूल के विरुद्ध खेलने आई, तो उन्हें एक खिलाड़ी कम पड़ रहा था. 14 वर्ष के इस लड़के ने अपने स्कूल की टीम के खिलाफ एमसीसी की टीम से खेलते हुए शतक ठोंक दिया. पास ही स्थित मैल्डों क्लब में इस किशोर का औसत था 168 रन. इसके ईनाम के एवज में इस किशोर को उस क्लब की मानद आजीवन सदस्यता प्रदान की गई.

यह ओपनिंग बैट्समैन था. 2006 में नागपुर में भारत के विरुद्ध इसने अपना करियर आरम्भ किया. इसी मैच में मोंटी पानेसर (Monty Panesar) और भारत के श्रीसंथ का भी डेब्यू था. इंग्लैण्ड के ओपनर मार्क्स ट्रेस्कोथिक की तबियत अचानक खराब हो गई थी, इसलिए वह भारत दौरा बीच में ही छोडकर वापस चला गया और उस समय यह खिलाड़ी वेस्टइंडीज में एक एकेडमी में खेल रहा था. इस तत्काल बुलावा भेजा गया और मात्र दो दिनों के भीतर अपने वीज़ा, लंबी हवाई यात्रा और जेट-लैग को पीछे छोड़ते हुए यह इंग्लैण्ड की तरफ से ओपनिंग करने नागपुर पहुँचा. अपने इस पहले ही टेस्ट मैच में इसने पहली पारी में 60 और दूसरी पारी में शतक मार दिया. इसके बाद तो इस अदभुत खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर ही नहीं देखा. वो दिन है और आज का दिन है... लगातार बारह वर्षों तक इंग्लैण्ड की तरफ से 158 टेस्ट मैच खेले. ना तो फिटनेस की समस्या, न कभी तबियत खराब, अत्यधिक क्रिकेट का बहाना भी नहीं, पारिवारिक व्यस्तता का बहाना भी नहीं... लगातार खेलता रहा और रन बनाता रहा... – जी हाँ, हम बात कर रहे हैं एलिएस्टर कुक (Alastair Cook) की.

इतने सारे रन बनाने के बावजूद इस शर्मीले और सरल स्वभाव के खिलाड़ी ने कभी अपना प्रचार-प्रसार नहीं किया. करता भी कैसे? क्योंकि कुक महोदय का न तो कोई फेसबुक अकाउंट है, न ही इन्स्ताग्राम अकाउंट... न कोई फालोअर्स ना ही किसी खिलाड़ी से कोई वाद-विवाद. यह खिलाड़ी मैदान में जितना सरल और सभ्य था, उतना ही मैदान के बाहर भी. टेस्ट मैचों में दूसरी पारी में सबसे अधिक अर्थात 15 शतकों का रिकॉर्ड भी इसी के नाम है.

एलिएस्टर कुक की सरलता के बारे में कहा जाए तो आज भी इंग्लैण्ड के लेटन बाजार्ड में इसकी खेतीबाड़ी है. ये स्वयं गेहूँ उगाते हैं, बकरियां पालते हैं. मीडिया, पार्टीबाज, पब और लड़कियों से दूर यह व्यक्ति अपने खेतों में सहज महसूस करता है. एलिएस्टर कुक का कहना है कि मुझे अपनी बकरियां बहुत पसंद हैं, क्योंकि वे मुझसे क्रिकेट के बारे कोई बात नहीं करतीं. खेलकर अच्छा खासा पैसा भी कमाया, लेकिन जब 2011 में कुक ने विवाह किया तो किसी बड़ी से शानदार कार में नहीं, बल्कि अपने ट्रैक्टर पर बैठकर अपनी शादी में पहुँचे.

देखा जाए तो एलिएस्टर कुक द्वारा डेब्यू करने के बाद मात्र दो वर्षों के भीतर ही IPL की धूमधाम शुरू हो गई थी. लेकिन यह अपना क्षेत्र नहीं, यह सोचकर इसने केवल टेस्ट मैचों पर ध्यान दिया. रन बनाने के मामले में, बाएं हाथ के बल्लेबाजों में सर्वाधिक रन बनाने में इसका पहला नंबर है, लेकिन फिर भी इसे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि IPL या टी-२० लीग खेलकर भरपूर पैसा कमाया जाए (जो कि उसे सरलता से मिल भी जाता). रंगबिरंगे कपड़े पहनने का शौक नहीं है, ऊटपटांग दाढ़ी-मूंछे कभी नहीं बढ़ाईं, फालतू के टैटू बनवाकर कभी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास नहीं किया... बाकायदा एक समर्पित सेल्समैन की तरह रोज सुबह भद्रजन बनकर मैदान में आना और जो भी कारीगरी दिखानी हो, वह अपने बल्ले से दिखाना... इंग्लैण्ड के पास अच्छे ओपनर्स की कमी होने के बावजूद इसने 77 बार ओपनिंग में शतकीय भागीदारी की है, फिर भी चुपचाप और अपने काम से काम रखना. यही इसकी सादगी का साक्षात प्रमाण है. एलिएस्टर कुक अच्छा गाते भी हैं और क्लेरीनेट एवं सैक्सोफोन भी शानदार बजाते हैं. बीबीसी के एक कार्यक्रम में इन्होंने बच्चों के कार्यक्रम में बैकग्राउंड में बजाया भी है.

2018 में, यानी केवल इसी वर्ष कुक का फॉर्म थोड़ा सा डगमगाया. यदि यह चाहता तो आराम से दो-तीन माह की छुट्टी लेकर अगली श्रृंखला में खेलता. जल्दी ही एशेज सीरीज भी शुरू होने वाली है. लेकिन अपना नैतिक व्यवहार तथा एक सज्जन खिलाड़ी की छवि को ध्यान में रखते हुए इसने संन्यास की घोषणा कर दी. मजे की बात देखिये कि पांचवे और अंतिम टेस्ट मैच में जबकि इंग्लैण्ड यह श्रृंखला जीत चुका है, इसमें भी एलिएस्टर कुक ने कोई आलस्य या ढिलाई नहीं बरती और पहली पारी में 71 तथा दूसरी पारी में 147 रन ठोक दिए... क्या गजब का रिटायरमेंट है यह. केवल 33 वर्ष की आयु में 12472 रन बनाने वाले ने उम्मीद से कहीं पहले संन्यास ले लिया. यदि एलिएस्टर कुक चार वर्ष और खेलता, तो उसका रिकॉर्ड कहाँ होता??

क्रिकेट यदि आज भी “जेंटलमैन गेम” कहलाता है, तो केवल एलिएस्टर कुक जैसे सीधे, सरल, सज्जन खिलाड़ियों की वजह से... हालाँकि अब ऐसे खिलाड़ी विलुप्त हो चले हैं.

संकेत कुलकर्णी (लन्दन)

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