अक्सर आपने “बुद्धिपिशाचों” को ये कहते सुना-पढ़ा होगा, कि हिंदुओं में दलितों की स्थिति बहुत खराब है और उनके साथ होने वाले भेदभाव एवं अत्याचारों के कारण वे चर्च के प्रलोभनों (Conversion in Dalits) में आ जाते हैं और धर्म परिवर्तन कर लेते हैं.

तमिलनाडु के तंजावूर में 1000 वर्ष पुराना मंदिर (जिसका निर्माण चोल राजा राजेन्द्र ने करवाया था) अप्रैल 2016 में राज्य सरकार द्वारा ढहा दिया गया, इसके पीछे कारण यह बताया गया कि मंदिर का “नवीनीकरण और विस्तार” किया जाना है.

“तहज़ीबी नर्गीसीयत”…. पाकिस्तान के वरिष्ठ चिंतक, लेखक, शायर मुबारक हैदर (Mubarak Haider) साहब की किताब है। इसका शाब्दिक अर्थ है कल्चरल/सांस्कृतिक नार्सिसिज़्म। बात शुरू करने से पहले आवश्यक है कि जाना जाये कि आखिर नार्सिसिज़्म है क्या?

6 दिसंबर 1992 इतिहास में दर्ज ये एक तारीख मात्र नहीं है, ये हो भी नहीं सकती. अपने आप में इतिहास समेटे है ये दिन, 500 वर्षों का इतिहास. अपने रामलला की जन्मभूमि (Ram Mandir Movement) को स्वतंत्र कराने का इतिहास.

गज़ल और सुगम संगीत गायक के रूप में विश्वविख्यात स्वर्गीय जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को कौन नहीं जानता.... राजस्थान में जन्मे इस अदभुत गायक ने अपनी पत्नी चित्रा सिंह (Chitra Singh) के साथ मिलकर सैकड़ों गीत गाए, दर्जनों स्टेज शो भी दिए.

भारत के फर्जी इतिहासकारों ने अभी तक आपको हमेशा मुगलों (यानी बाहरी आक्रान्ताओं) के तमाम रोमांटिक किस्से ही सुनाए हैं. मुग़ल शासकों के अत्याचारों, हत्याकांडों और बलात्कारों को तो इन कथित इतिहासकारों ने छिपाया ही...

श्रीमद्भागवद्गीता (Bhagvad Gita) सनातन धर्म का कालजयी ग्रन्थ है इस तथ्य को कोई नहीं नकार सकता है। इसे ग्रंथ को ग्रन्थ शिरोमणि कहा गया है, अर्थात यह इस जगत के सभी ग्रन्थों में से सर्वाधिक पूज्य और प्रतिष्ठित ग्रंथ है.

आज की स्थिति में भारत सहित समूची दुनिया में कई चुनौतियाँ सामने खड़ी हैं, चाहे वह इस्लामिक आतंकवाद हो, बेरोजगारी हो या आर्थिक गतिविधियाँ हों....

आज के वर्तमान बांग्लादेश लेकिन अंग्रेजों के समय जो अविभाजित बंगाल था, वहाँ एक मियाँ टीटू मीर हुआ करते थे. इनके बारे में भारत के अंदर बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन उधर बांग्लादेश और इधर पश्चिम बंगाल में मियाँ मीर का बहुत महिमामंडन होता है.

जिस कूड़े-कचरे (Garbage Management in Cities) को हम लोग अपने घरों से निकालकर बाहर फेंकते हैं, नगरनिगम की गाड़ियों में देते हैं या रद्दी=कूड़ा लेने वाले ठेलेवालों को सस्ते भावों में बेच देते हैं, वह कूड़ा-कचरा या कबाड़ वास्तव में एक करोड़ों रूपए का “शानदार बिजनेस” है...

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