जयललिता की मृत्यु के बाद से दक्षिण भारत की राजनीति खासकर तमिलनाडु में जो एक बड़ा सा शून्य बन गया है, उसे भरने के लिए लगभग सभी पार्टियाँ अपनी कमर कसने लगी हैं.

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने RSS से संबद्ध संस्थाओं (RSS and its Organizations) द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों पर कड़ा रुख अपना लिया है. राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थो चटर्जी ने विधानसभा में लिखित बयान में कहा है कि राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्थाओं से संबद्ध 493 स्कूल हैं, इनमें से 125 स्कूल राज्य सरकार से “नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” प्राप्त किए बिना अपना स्कूल (Saraswati Shishu Mandir) संचालित कर रहे हैं.

भारतीय समाज में स्त्रियों की प्रमुख प्राकृतिक शारीरिक क्रिया (Menstrual Cycle) अर्थात माहवारी के बारे में बात करना बेहद संवेदनशील, संकोची और पर्दादारी वाला माना जाता है. यहाँ तक कि आज के आधुनिक समय में भी केवल शहरी और महानगरीय क्षेत्रों को छोड़ दें तो कस्बे और गाँवों में यह विषय अभी भी दाएँ-बाँए देखकर फुसफुसाते हुए बात करने वाला विषय माना जाता है. ऐसे समय पर अक्षय कुमार ने Padman (पैड-मैन) फिल्म बनाकर इस धारणा को तोड़ने का सफल प्रयास किया है. पिछले कुछ समय से अक्षय कुमार लीक से हटकर विषयों पर फ़िल्में चुनने लगे हैं, पैडमैन भी इसी श्रृंखला की फिल्म है.

गत 19 जनवरी को महाराष्ट्र के अम्बरनाथ स्थित वान्द्रापाड़ा परिसर में एक “जाति-पंचायत” बुलाई गयी थी. इस जाति पंचायत की बैठक का मुख्य एजेण्डा था “कंजारभाट” समाज (Kanjarbhat Community) के कुछ पढ़े-लिखे युवाओं द्वारा नवविवाहिताओं के कौमार्य परीक्षण की घृणित एवं अपमानजनक प्रक्रिया के विरोध में, सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे “Stop the V Ritual” मुहिम के खिलाफ उन युवाओं पर दबाव बनाना.

जैसे ही हम इशरत जहाँ (Ishrat Jahan) की बात करते हैं, वैसे ही हम सबके दिमाग में एक दूसरी ही इशरत की तस्वीर आ जाती है. मुम्बई के मुम्ब्रा इलाके की एक छोटी सी मासूम चेहरे वाली लेकिन “शातिर” इशरत (Ishrat Jahan Encounter), जो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या करने के लिए गुजरात जा रही थी, और रस्ते में ही एन्काउंटर का शिकार हो गयी. उस इशरत को भारत की सेकुलर, अवार्ड वापसी तथा लाल गैंग ने हाथोंहाथ लिया था, उसे अपने अपने राज्यों की बेटी बनाने के लिए होड़ लग गयी थी और बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तो उसे अपने राज्य की बेटी बना ही दिया था. वह एक इशरत थी.

हाल ही में फ्रांस से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमान “राफेल” (Rafale Deal) की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर विपक्षी नेता राहुल गाँधी द्वारा मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. लेकिन चूँकि भ्रष्टाचार के मामले में काँग्रेस की साख इतनी “बेहतरीन” है कि अब राहुल गाँधी के आरोपों पर कुछ कहना बेकार ही है. परन्तु जनता के बीच गलत सन्देश और दुष्प्रचार की पहुँच न हो... सही बात तथ्यों और तर्कों के साथ पहुँचे इसलिए यह लेख प्रस्तुत है. इसमें बिन्दुवार “तथाकथित राफेल विमान (Rafale Fighter Plane) घोटाले” के बारे में बताया गया है... आगे पढ़िए.

भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों (Illegal Bangladeshi) की समस्या कोई नई नहीं है, जब से बांग्लादेश को भारत ने पाकिस्तान के चंगुल से बाहर निकाला तभी से अर्थात 1971 से ही बांग्लादेशियों के जत्थे के जत्थे भारत की ढीलीढाली और तमाम नदी-नालों-जंगलों एवं आधी-अधूरी तारबंदी के कारण बड़े आराम से भारत में घुसे चले आते हैं. इन अवैध बांग्लादेशियों का सबसे पसंदीदा ठिकाना है देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता और मुम्बई. क्योंकि इन महानगरों के विशाल आकार तथा यहाँ मौजूद सेकुलरिज्म के पुरोधाओं एवं मुल्ला वोट बैंक के सहारे राजनीति करने वाले लोग इनकी सेवा में उपस्थित हैं.

जैसा कि अब सभी जानते हैं, पिछले कई वर्षों में NDTV के मालिक प्रणय रॉय (Prannoy Roy), सत्ता की नजदीकियों के चलते कई प्रकार के घोटालों एवं धोखाधड़ी (NDTV Frauds) में शामिल रहे हैं. NDTV कम्पनी ने न सिर्फ अपने शेयरधारकों को चूना लगाया है, बल्कि सरकारी माध्यमों और अफसरशाही का सहारा लेकर विभिन्न प्रकार के फ्राड में शामिल रही है.

जी हाँ!!! पाकिस्तान ढह रहा है. दिवालियेपन की कगार पर पहुंचा यह देश (Pakistan a Failed State) इस बुरी तरह कर्ज के भंवर में फंस गया है कि अब इससे बाहर निकलना इसके बूते से बाहर की बात है. आज की तारीख में पाकिस्तान पर लगभग 9 खरब अमेरिकन डॉलर से भी अधिक का अंतर्राष्ट्रीय कर्ज है (Debt ridden Pakistan) जिसकी तिमाही ब्याज चुकाना भी, अब इसके लिए संभव नहीं हो पा रहा.

जिस समय सारा देश भारत माता के जयगान और वन्दे मातरम के उद्घोषों से गूँज रहा था, उसी समय देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 220 किमी दूर स्थित उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj in UP) शहर में चन्दन गुप्ता (Chandan Gupta) नाम का युवक जिसने अपने जीवन में अभी कुछ 19 बसन्त ही देखे होंगे, “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम” (Vandemataram) कहने का मूल्य अपने लहू से चुका रहा था.

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