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जब भी विनायक दामोदर सावरकर का ज़िक्र आता है, अथवा उनकी जयन्ती/पुण्यतिथि आती है, तो आपने अक्सर देखा होगा कि सावरकर की सभी बातों को दरकिनार करके कुछ निहित स्वार्थी और घटिया तत्व उनके "कथित माफीनामे" को उछालने लगते हैं. चूँकि उनके पास सावरकर की आलोचना करने का कोई और मुद्दा नहीं होता है, इसलिए वे अपनी शर्म छिपाने के लिए इस "नकली मुद्दे" को हवा देते रहते हैं.

जिन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में रूचि है, उन्होंने चाफेकर बंधुओं का नाम जरूर सुना है. परन्तु चूँकि हमारी पाठ्यपुस्तकों में इन बंधुओं और इनके योगदान को उचित स्थान नहीं मिला है, इसलिए आजकल के युवाओं और बच्चों ने इनके बारे में कुछ नहीं जाना.

शीर्षक पढ़कर आप चौंक गए होंगे ना? जी बिलकुल, लेकिन भारत की तथाकथित धर्मनिरपेक्ष अदालतों का यही सच है... चूँकि आरोपी ने रोजा रखा हुआ है इसलिए उसे 29 जून तक गिरफ्तार नहीं किया जाए. पूरा मामला कुछ यूँ है...

देश के कोने कोने में हुए स्वतंत्रता आंदोलनों के बारे में कम जानकारी के चलते न जाने इतिहास के कितने पन्ने अछूते हैं. इसका कारण यह है कि हम कुछ गिने-चुने इतिहासकारों द्वारा पढाए गए मनगढ़ंत इतिहास के जाल में फँस कर रह गए हैं. स्वतंत्रता की चिंगारी को जलाए रखने के लिए बलिदानों की कई अनकही और अनसुनी गाथाएं हैं. यह इन्हीं में से एक है..

हैदराबाद में आपने कई बसें ऐसी देखी होंगी जिनका पंजीकरण नंबर अरुणाचल का है. यह परिवहन में सरकार के एकाधिकार का दोष है| अगर कभी आपने हैदराबाद से चेन्नई के बीच निजी बस ली हो, तो आपने धयान दिया होगा कि बस संभवतः किसी अन्य राज्य जैसे कि अरुणाचल प्रदेश (AR), नागालैंड (NL), पुडुचेरी (PY) या ओडिशा (OD) में रजिस्टर की हुई है|

ऐसा कहा जाता है कि प्यार, युद्ध एवं राजनीति में सब कुछ जायज़ है. जिस समय अमित शाह NDA की ओर से भारत के अगले राष्ट्रपति प्रत्याशी का नाम घोषित कर रहे थे, उस समय किसी ने भी नहीं सोचा था कि वे एक चौंकाने वाला नाम सामने लेकर आएँगे.

नोट :- प्रस्तुत लेख के लेखक गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री स्व छ्वील दास मेहता जी है, ये लेख उन्होंने कच्छमित्र दैनिक में लिखा था, जिसे मै साभार हिंदी में रूपांतरित कर रहा हूँ ताकि हर भारतीय काँग्रेस की इस गंदी सच्चाई को जान सके.

हाल ही में एक फोरम पर किसी युवा मित्र ने पूछा कि कश्मीर में मारे जा रहे आतंकियों का उपनाम "भट", "बट", "वानी", "गुरू" किस तरह से है? इसी प्रकार देश के कई भागों में मुस्लिम गुर्जर, मुस्लिम जाट तथा "पटेल" उपनाम वाले मुसलमान कैसे पाए जाते हैं? असल में उसे यह जानकारी नहीं थी कि 99 प्रतिशत "भारतीय मुसलमानों" के पूर्वज हिन्दू थे।

फर्जी इतिहासकारों और मुगलों के चाटुकारों द्वारा लिखी गई कुछ "कहानियाँ"आजकल बड़ी मात्रा में सोशल मीडिया पर तैर रही हैं, जिसके अनुसार मुगल इतिहास के सबसे क्रूर बादशाह यानी औरंगज़ेब को दयालु, मसीहा वगैरह साबित करने की फूहड़ कोशिश की जाती है.

आजकल अरुण शौरी चर्चा में हैं. जब से उन्होंने NDTV पर पड़े छापों के खिलाफ मोदी सरकार की आलोचना की है और वामपंथियों के साथ एक मंच पर दिखाई दिए हैं, तभी से मोदी समर्थकों द्वारा उनके खिलाफ गालीगलौज और निम्न स्तर की टिप्पणियाँ की जा रही हैं.

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