desiCNN - Items filtered by date: जनवरी 2017

वह 1 फरवरी 1948 का दिन था. गांधी का वध हुए दो ही दिन हुए थे. हवाओं में कुछ बेचैनी और माहौल में कुछ उदासी थी. सुबह स्कूल जाते समय कुछ ब्राह्मण बच्चों ने गलियों के कोने में खड़े कुछ लोगों कानाफूसियाँ सुनी थीं

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संजय भंसाली के समर्थन आये लोग उसके विरोध को पूर्वाग्रह से किया हुआ बता रहे है और उसके समर्थन में दो तरह के तर्क दे रहे है। एक यह की लोगो ने पद्मावती की पठकथा बिना देखे विरोध कर रहे है और दूसरा संजय भंसाली भारत के एक श्रेष्ट निर्देशक है जो बड़ी फिल्म बनाने में सिद्धस्त है, इस लिए उनको पूरी स्वतंत्रता है कि वह अपनी कला की किसी भी तरीके से अभिव्यक्त करे। मैं यह पहले तो एक बात साफ़ कर दूँ की संजय भंसाली का पद्मावती को लेकर फिल्म बनाने का विरोध भारतियों ने किया है न की किसी विचारधारा के अंतर्गत यह हुआ है। यहां लोग यह भूल जाते है की जिस करणी सेना ने भंसाली को झापड़ मारा है वह सेक्युलर कांग्रेस समर्थित है, उसका बीजेपी से कोई मतलब भी नही है इसलिए राजनीति इसमें नही घुसेडनी चाहिए। अब चलिए मुद्दे पर आते है।

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विकलांग करके गवाने की भयावह, घृणित परंपरा ! ये जो विकलांग करवा कर गाना गवाने की परंपरा है, वो ईसाई "रिलिजन" से आई है। आज जैसा आप बच्चों के जन्म, शादी पर, गाने वाले हिजड़ों को देखते हैं, वैसा कुछ होने का जिक्र भी भारतीय ग्रंथों में नहीं आता... पूरा इतिहास यहाँ पढ़िए...

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वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास को लिखा नहीं है, उसे अपनी इच्छानुसार ‘गढ़ा’ है l नालंदा बौद्ध विहारों की क्षति में हिन्दुओं का हाथ दिखा देने के लिए और तुर्क आक्रमणकारियों पर पर्दा डाल देने के लिए क्या क्या फरेब नहीं किये गए... आगे पढ़िए... 

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यदि 15 अगस्त 2013 में 810 Million अर्थात 81 करोड़ याने कि 66% जनता इतनी गरीब थी कि वो सरकारी राशन की दुकानों पर मिलने वाले अनाज को खरीदने में असमर्थ थी और उनको जिन्दा रखने के लिये खाद्य सुरक्षा अधिनियम लाया गया जिसके अंतर्गत उन्हें क्रमशः 1, 2 और 3 रुपयों में गेहूं, ज्वार या बाजरा और चावल दिये जाने का प्रावधान किया गया तो अब 7 सवाल यह उठते हैं कि : 

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बाबरी ध्वंस के पश्चात अयोध्या में घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हुआ...

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जब तीन गुंबद वाला ढाँचा गिर गया तो उस दिन सायंकाल अयोध्या पुलिस थाने में दो रिपोर्ट लिखी गई।

1. ढाँचे के समीप ड्युटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ने एक एफआईआर लिखवाई जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर ने लिखवाया कि‘’लाखों कारसेवक ढाँचे पर चढ गये और उन्होने ढाँचे को गिरा दिया पर मैं किसी को पहचानता नही.’’।

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