व्यापम घोटाले में संदिग्ध और नकली नाम-पते से CBI हैरान

Written by गुरुवार, 13 अप्रैल 2017 20:03

मध्यप्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) भर्ती घोटाला अभी तक का सबसे बड़ा ऐसा घोटाला माना जा रहा है, जिसमें काँग्रेस और भाजपा की आपसी मिलीभगत तथा नौकरशाही की मनमानी का नंगा नाच अद्वितीय है.

जब से यह घोटाला सामने आया है, तब से अभी तक इसमें कई गवाहों तथा घोटाले से परोक्ष/अपरोक्ष रूप से जुड़े व्यक्तियों की रहस्यमयी मौतें हो चुकी हैं, लेकिन ऐसा लगता है मानो काँग्रेस या मीडिया को कोई फर्क ही नहीं पड़ता. सबसे बड़ी बात तो यह है कि घोटाला उजागर होने के इतने समय बाद भी कोई जाँच एजेंसी दावे के साथ यह कहने में सक्षम नहीं है कि इस घोटाले के सभी तारों का पता लगाया जा चुका है... क्योंकि 1995 से जारी इस भर्ती घोटाले का कोई ओर-छोर ही नहीं मिल रहा. ऐसा लगता है मानो सभी ने आपस में मिलजुलकर बंदरबांट करके नौकरियाँ हथियाईं, पैसा खाया. 

ऐसा लगता है कि शायद व्यापम घोटाला भी फाईलों के अम्बार में दबकर रह जाएगा. पैसा देकर नौकरियाँ हासिल कर चुके लोग आराम से नौकरी करते रहेंगे और सीबीआई केवल धूल में लठ्ठ ही चलाती रह जाएगी. अभी तक केवल एक भाजपा नेता लक्ष्मीकांत शर्मा को इस मामले में संक्षिप्त जेल हुई है, कुछ नौकरशाह जरूर पकड़े गए हैं, लेकिन यदि सुप्रीम कोर्ट की निगाहबीनी नहीं होती, तो इतना भी न होता. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मेडिकल कॉलेजों की भर्तियों को रद्द जरूर किया है, लेकिन यह तो इस महाघोटाले का एक छोटा सा अंश मात्र हैं. क्योंकि अभी भी वास्तव में कोई नहीं जानता, कि कितने हजारों “कुपात्रों” ने व्यापम के जरिये एडमिशन और बाद में नौकरी हासिल की है, तथा कितने नेताओं-अफसरों ने कितने करोड़ रूपए खाए... 

एक छोटा सा नमूना यहाँ पेश है. हाल ही में सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया है कि 25 मामलों में 170 आरोपी ऐसे हैं जिनके फोटो तो उपलब्ध हैं, लेकिन उनके नाम-पते फर्जी निकले हैं. इन 170 लोगों ने परीक्षा में सेटिंग की और किसी और के स्थान पर परीक्षा देकर उस “धनपशु” को एडमिशन दिलवाया, क्योंकि फाईलें गायब हैं और दस्तावेज भी. इसके अलावा 80 और ऐसे नाम हैं जिन पर FIR तो है, लेकिन उनकी केवल तस्वीर ही उपलब्ध है, नाम-पते फर्जी निकले हैं. ज़ाहिर है कि न सिर्फ फर्जी एडमिशन हुए, बल्कि फर्जी लोगों ने परीक्षाएँ दी हैं.

CBI अधिकारियों के अनुसार अधिकाँश मामलों में (उदाहरणार्थ केस क्रमांक 104/15) में बारह ऐसे लोग हैं जिनका नाम-पता-फोन नम्बर सब झूठा है, केवल फोटो उपलब्ध है. ये सभी 80 लड़के-लड़कियाँ प्री-मेडिकल टेस्ट 2009 में शामिल हुए थे. केस क्रमांक RC 05/15 में सभी छः आरोपी गायब हैं. ये सभी PMT-2010 में शामिल हुए थे... केवल फोटो के आधार पर सीबीआई ने वारंट जारी कर रखा है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं. ये भी पता नहीं चल रहा कि ये लोग जिन्दा हैं या मारे गए. केस क्रमांक RC 32/15 में सीबीआई फोटो पर लिखे नाम के अनुसार सत्यवीर नामक इंसान को खोज रही है, जो 2012 की कांस्टेबल परीक्षा में शामिल हुआ था, लेकिन वह भी गायब है. केस क्रमांक RC 97/15 में वन-रक्षक परीक्षा 2013 की परीक्षा के पास हुए सुनील, निहाल सिंह और आकाश फर्जी पाए गए हैं, वे भी लापता हैं. केस क्रमांक RC 14/2015 (PMT-2009) के आरोपित चंद्रभान, संजय और आनंद कुमार के फोटो उनके नाम-पते से मेल नहीं खाते. केस क्रमांक RS 40/2015, 51/2015, 88/2015 और 123/2015 के बारे में तो सीबीआई को न फोटो मिल रहे हैं, न ही नाम पते.

ऐसे दर्जनों केस हैं, जिनमे सीबीआई केवल अँधेरे में हाथ पैर मार रही है. बताया जा रहा है कि आधुनिक फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है कि आवेदन पत्रों पर लगे फोटो कहीं गढे हुए तो नहीं हैं. इस तकनीक में यदि फोटो के ऊपर फोटो रखकर फर्जीवाड़ा किया गया होगा, तो नीचे रखा हुआ असली फोटो उभरकर सामने आ जाएगा. अभी तक सीबीआई ने 150 आरोपियों के खिलाफ 60 आरोप-पत्र दाखिल कर दिए हैं. लेकिन मामला इतना लंबा-चौड़ा और उलझा हुआ है कि बड़े-बड़े जाँच अधिकारी भी गच्चा खाए हुए हैं. नेता-अफसर-निचले अधिकारी-दलाल का ऐसा भीषण भ्रष्टाचार हुआ है कि आम जनता हैरान है. इस भीषण घोटाले को उजागर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रशांत पांडे कहते हैं कि सीबीआई ईमानदारी से अपना काम नहीं कर रही है. हमने कई आरोपियों के “कॉल डीटेल्स” उन्हें दिए हैं, जिनके आधार पर वे चाहें तो क्या नहीं कर सकते?

संक्षेप में कहा जाए तो अभी तक इस मामले में 2000 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन उनमें से बड़े अफसर चुनिंदा ही हैं और नेता तो एक भी नहीं... जैसे पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव की सामान्य मौत हो गई, उसी प्रकार यह केस लंबा चलता रहेगा, गवाह मारे जाते रहेंगे या गायब होते जाएँगे... बीस-पच्चीस वर्ष के बाद शायद आठ-दस लोगों को सजा मिल भी जाए तब तक तो फर्जी एडमिशन लेने वाले ही रिटायर होने के करीब पहुँच जाएँगे... इस से सिद्ध होता है कि यदि काँग्रेस और भाजपा आपस में मिल जाएँ अथवा “नूराकुश्ती” खेलते रहें तो ये आपस में मिलकर कुछ भी कर सकते हैं. मध्यप्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकारमय बनाकर तथा कुपात्रों को नौकरी में घुसाकर करोड़ों-अरबों के वारे न्यारे करने वाले नेता मौज में ही रहेंगे...

Read 714 times
न्यूज़ लैटर के लिए साइन अप करें