पाकिस्तान के विलुप्त हिन्दुओं की भोली और मूर्ख आशा

Written by शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017 08:44

जैसा कि सभी जानते हैं भारत से अलग होने के समय पाकिस्तान में हिन्दुओं की जनसँख्या लगभग बीस प्रतिशत थी. जिस प्रकार यहाँ के कई मुसलमान पाकिस्तान नहीं गए, उसी प्रकार कई हिन्दू भी पाकिस्तान से भारत नहीं आए.

पाकिस्तान में बचे रह गए 20% हिन्दू अपनी मूर्खता के कारण यह समझते रहे कि पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक और सेकुलर देश बना रहेगा. लेकिन वे इस्लाम को नहीं पहचानते थे, इसलिए आज पाकिस्तान में हिन्दू जनसँख्या घटते-घटते केवल 2% रह गई है. जबकि भारत में मुस्लिमों की संख्या बढ़ते-बढ़ते लगभग बीस प्रतिशत तक पहुँच चुकी है... (अर्थात सेकुलरिज्म का रिवर्स एक्शन, इस्लाम को नहीं पहचानने की कीमत). उस समय पाकिस्तान से भारत नहीं आने वाले इन 18% हिन्दुओं (यानी लाखों की जनसँख्या) को जमीन निगल गई या आसमान पचा गया?? जी नहीं, पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं को “इस्लाम” ने खा लिया. अब पिछले कई वर्षों से वहां जो 2% हिन्दू बचे हैं, उनका जीवन भी खतरे में है. ठेठ पंजाब से लेकर बलूचिस्तान तक बचे-खुचे सिंधी और ईसाई परिवारों की लडकियाँ इस्लामिक जेहादियों द्वारा जब-तब अपह्रत कर ली जाती हैं. इन जवान लड़कियों को “शरियत क़ानून” के अनुसार एक मुल्ले के सामने खड़ा करके जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है और उस अपहरणकर्ता के साथ उसका निकाह करवा दिया जाता है. ऐसा पिछले कई वर्षों से चल रहा है, और चूँकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को एक देश के रूप में थोड़ी “शर्मो-हया” दिखानी पड़ती है, इसलिए इन हिन्दू लड़कियों और इनके परिवार की सुरक्षा के नाम पर गाहे-बगाहे मजबूरन कोई कदम उठाने पड़ते हैं. इस्लामिक जेहादियों की मानसिकता यह है कि चाहे जैसे भी हो हिन्दुओं को या तो पाकिस्तान से खदेड़ो या उन्हें इस्लाम के झंडे तले लेकर आओ. 

विगत कई वर्षों के पाकिस्तान में संघर्ष कर रहे हिन्दुओं की लड़कियों की सुरक्षा करने के लिए हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने एक “हिन्दू मैरिज एक्ट” नामक क़ानून बनाया है, जिसके अनुसार सभी हिन्दू लड़कियों के विवाह को शासकीय रूप से रजिस्टर्ड करवाया जाएगा. विवाह के समय प्रशासन का एक अधिकारी मौजूद रहेगा, जो सारी कागजी खानापूर्ति करेगा और वर-वधु को “रजिस्टर्ड पति-पत्नी” घोषित करेगा, तथा एक सर्टिफिकेट प्रदान करेगा. इस क़ानून में यह प्रावधान भी है कि हिन्दू युवक या युवती मृत्यु के बिना दूसरा विवाह नहीं कर सकते.

आप सोच रहे होंगे, कि इसमें कौन सी बड़ी बात है? या इस क़ानून में ऐसा क्या ख़ास है? अथवा इस क़ानून का फायदा क्या है? असल में आपके दिमाग पर सेकुलरिज्म हावी है, और आप पाकिस्तान या कट्टर इस्लाम की फितरत नहीं समझते हैं. पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना मुँह दिखाना है, पाकिस्तान के मानवाधिकारों को बुर्के से बाहर निकला हुआ दिखाना है, इसलिए पिछले तीस वर्षों की मांग के बाद उसे यह क़ानून “बनाना पड़ा”. वहीं दूसरी और “विलुप्त प्रजाति” के हिन्दुओं का इसमें फायदा यह है कि विवाह रजिस्टर्ड होने के कारण अब जेहादी मुल्ले यह आरोप नहीं लगा सकेंगे कि इस कुँवारी लड़की ने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल कर लिया है, इसलिए अब निकाह किया जा सकता है. इस क़ानून के बनने से पहले यह होता था कि इस्लामिक जेहादी जब भी चाहते किसी खूबसूरत लडकी को उठा ले जाते थे... कभी-कभी सगाई हो चुकी या नवविवाहित औरत को भी उठा लेते थे. जब पुलिस में शिकायत की जाती थी तो उनके पास कोई सबूत नहीं होता था कि उन हिन्दू लड़कियों की शादी हो चुकी है. बचा-खुचा काम कोई मौलवी पूरा कर देता था और उस हिन्दू लड़की को बुर्के के नरक में झोंक देता था.

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गत वर्ष पाकिस्तान की रिंकल कुमारी उर्फ़ अंजली का किस्सा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत मशहूर हुआ था. अंजलि कुमारी को जेहादी मुल्लों ने उसके घर से किडनैप किया और अगले ही दिन उसे जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया. इस मामले के कारण सभ्य दुनिया के बीच, पाकिस्तान की बहुत किरकिरी और थू-थू हुई थी. अंजलि के पिता कुंदनलाल मेघवार ने कहा कि मेरी बेटी को बचाने के लिए कोई क़ानून तैयार नहीं था, पाकिस्तान में शरिया क़ानून, वहां के संविधान से ऊपर माना जाता है. इसलिए मेरी बेटी को जबरन इस्लाम कबूल करवाने के बाद उसे एक सुधारगृह में रखा गया, जहां हमें उससे दिन में केवल एक बार मिलने की इजाजत थी. लेकिन उस सुधारगृह के आसपास जेहादियों का इतना सख्त पहरा था कि वे हमें अन्दर घुसने ही नहीं देते थे. हमें जान से मारने की धमकियाँ देकर अंजली से मिलने से रोका गया. कुछ सप्ताह के बाद अंजली इस्लामी गुंडों के दबाव में टूट गई और उसने सोचा कि मेरे माता-पिता मुझसे मिलना नहीं चाहते हैं, अंततः वह अपने अपहरणकर्ताओं के साथ ही चली गई और हम कुछ नहीं कर पाए.

पाकिस्तान के क़ानून मंत्री जाहिद हमीद ने कहा है कि “पाकिस्तान सरकार यहाँ रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेगी और यह क़ानून इसी दिशा में एक कदम है.”(इस बात पर थोड़ा हँस लीजिए). उल्लेखनीय है कि जब किसी समुदाय की जनसँख्या 5% से कम होती है, उसी को “अल्पसंख्यक” का दर्जा दिया जाता है. लेकिन चूंकि भारत में निर्लज्ज सेकुलरिज्म और मुस्लिम वोट बैंक की नीच कांग्रेसी परंपरा वर्षों से मौजूद है, इसलिए यहाँ 18-20% वाले मुस्लिम भी “अल्पसंख्यक” कहलाते हैं, सरकार से भारी अनुदान पाते हैं, कई योजनाओं को डकार जाते हैं.

पाकिस्तान हिन्दू कौंसिल के अध्यक्ष रमेश कुमार वनकवानी कहते हैं, कि “...हालाँकि इस क़ानून के बनने से थोडा फायदा तो जरूर है, लेकिन यह तभी मायने रखता है जब पाकिस्तान सरकार और प्रशासन इसे गंभीरता से लागू करे. इस्लामिक जेहादी जब चाहें तब हिन्दू लड़कियों को उठा ले जाते हैं, ऐसे में उम्मीद कम ही है कि इस क़ानून से कोई ख़ास सुरक्षा हो पाएगी...”. क्योंकि आखिर पाकिस्तान है तो इस्लामी देश ही, और अंततः उसे शरिया क़ानून मानना ही होगा... इसलिए हम हिन्दुओं का जीवन सदैव खतरे में ही रहेगा. 

नोट :- बंटवारे के समय भारत से भागकर जो मुस्लिम अपने "इस्लाम" के लालच में पाकिस्तान गए थे, वहां आज भी उन्हें "मुहाजिर" कहकर पुकारा जाता है... 

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