हिंदू मंदिर सदा से ही समाज तथा भारतीय सभ्यता के केंद्रबिंदु के रूप में स्थापित रहे हैं। मंदिर आध्यात्मिक तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ विविध प्रकार के समाजोपयोगी गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र रहे हैं।

आज की तारीख में मूल समस्या यह है कि, सावरकर का नाम लेते ही "राष्ट्रवाद विरोधियों तथा ब्राह्मण द्वेषियों" के पेट में मरोड़ उठने लगते हैं... हाल ही थाणे में सावरकर जी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हुए.

छत्तीसगढ़ में हुए भीषण नक्सली हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के छब्बीस जवान हुतात्मा हुए और आठ गंभीर रूप से घायल हुए हैं. यह हमला एक सड़क निर्माण को सुरक्षा देने वाली CRPF कंपनी पर हुआ, जिसमें नक्सलियों ने ग्रामीणों तथा महिलाओं को “मानव ढाल” बना रखा था.

कहाँ तो एक मेकेनिकल इंजीनियर पति और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट पत्नी की ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में शानदार नौकरी, उच्च जीवनशैली, तमाम सुख-सुविधाएँ और वर्ष में दो बेहतरीन लंबे अवकाश... और कहाँ तेलंगाना के महबूब नगर के धूल भरे खेत, गायों का गोबर और दिन भर धूप में कड़ी मेहनत...

सोनू निगम और अजान के मसले पर बोलने से पहले एक भूमिका रखता हूं। कुछ निजी संदर्भ हो जाए। यहां मैं यह बता दूं कि मैंने वर्ष 1997 में बाका़यदा उर्दू भाषा लिखना व पढ़ना सीखी थी। आज भी लिखना व पढ़ना जानता हूं।

वर्ष 1802 में इंग्लैड के श्री जेनर ने चेचक के लिए वैक्सीनेशन खोजा। यह गाय पर आए चेचक के दानों से बनाया जाता। लेकिन इससे दो सौ वर्ष पहले से भारत में बच्चों पर आए चेचक के दानों से वैक्सीन बनाकर दूसरे बच्चों का बचाव करने की विधि थी।

इस समय देश भर में कश्मीर से आये कुछ वीडियोज की जोर-शोर से चर्चा हो रही है। जिनमें से एक वीडियो में चुनाव ड्यूटी से लौटते समय सीआरपीएफ के जवानों को कश्मीरी युवकों द्वारा अपमानित करते हुए दिखाया जा रहा है।

भारत में बाबा साहब आंबेडकर के नाम पर कई राजनैतिक और सामाजिक “दुकानों” ने अपने-अपने अर्थों के अनुसार “स्टॉल” लगाए हैं, तथा बाबासाहब के आदर्शों, उनके कथनों एवं उनके तथ्यों को तोड़मरोड़ कर उनकी दुकानदारी के अनुसार जनता के सामने पेश किया है.

भारत की गरीब और अशिक्षित जनता को शिक्षित करने का ठेका अधिकांशतः प्रगतिशील बुद्धिजीवियों ने ले रखा है. समाज से (यानी केवल हिन्दू समाज से) “अंधविश्वास” को मिटाने के नाम पर ऐसे ही एक “प्रगतिशील बुद्धिजीवी” नरेंद्र दाभोलकर साहब ने 1989 में महाराष्ट्र में एक संस्था बनाई थी “अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति” (ANS).

मान्यता है कि अति प्राचीन काल में कश्मीर घाटी एक विशाल सरोवर थी – सती सर यानी पार्वती का सर। चारों ओर से घिरी झील के पहाड़ी किनारों पर कुछ पशुपालक जातियां रहतीं थी, जिनका जीवनयापन भेड़-बकरी, गाय भैंस आदि को पालने से होता था।

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