स्मरण करने का प्रयास कीजिए, कि आपने पिछले दस वर्षों में हिन्दी फिल्मों में कितने भजन गीत देखे या सुने हैं? मस्तिष्क पर ज़ोर लगाना पड़ेगा ना!!! अच्छा उसे छोड़िये, यह याद करने का प्रयास कीजिये कि पिछले दस वर्षों में हिन्दी फिल्मों में आपने जन्माष्टमी, रामनवमी, महाशिवरात्रि से सम्बंधित कितने गीत सुने हैं??

Published in आलेख

72 वर्षीय बुज़ुर्ग मेहता जी इस बात को लेकर भौंचक और दुखी थे कि उनके द्वारा जीवन भर मेहनत करके कमाई गयी पूँजी अर्थात फिक्स्ड डिपोजिट (सावधि जमा) पर बैंकों ने ब्याज दर और घटा दी है.

Published in आलेख

कुछ दिनों पहले तमिलनाडु में (जहाँ कि ब्राह्मण विद्वेष अपने चरम पर है), पेरियार के चेलों ने एक नया तमाशा रचा था। वैसे तो पहले भी इन “विकृत मानसिकता वाले” लोगों ने सेलम, तमिलनाडु में ही भगवान राम की प्रतिमा को जूते की माला पहनाकर उनका जुलुस निकाला था।

Published in आलेख

गणेशोत्सव जैसा ऊर्जावान और रंगीला त्यौहार बस कुछ ही दिनों दूर है. हम लोगों ने बचपन से अपनी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ा है कि अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अर्थात बाल गंगाधर लोकमान्य तिलक जी ने अंग्रजों से मुकाबला करने हेतु देश की जनता को एकत्रित करने के उद्देश्य से गणेशोत्सव को “सार्वजनिक” बनाने की पहल की और सबसे पहले 1893 में पुणे में तिलक ने दस दिवसीय गणेशोत्सव मनाने की शुरुआत की.

Published in आलेख

इस समय भारत की शासकीय एयरलाईन्स अर्थात एयर इण्डिया के विनिवेश की प्रक्रिया जारी है. जैसा कि अब सभी लोग जान गए हैं, पिछले साठ वर्षों में राजनैतिक दलों ने एयर इण्डिया को “दूध दुहने वाली गाय” की तरह इस्तेमाल किया है.

Published in आलेख

हाल ही में एक मामला मीडिया में काफी चर्चा में रहा है, वह है चंडीगढ़ के दो हाई-प्रोफाईल परिवारों के बीच का मामला. मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस के बयानों और चंद स्वनामधन्य विश्लेषकों के मुताबिक़ इसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बेटे ने एक आईएएस अधिकारी की बेटी का पीछा किया, धमकाया, छेड़छाड़ की.

Published in आलेख

(मूल अंगरेजी लेख के अनुवादक और संकलक :- सुरेश चिपलूनकर)

महाराजा रणजीत सिंह की वंशावली खत्म करने की रानी विक्टोरिया की योजना का खुलासा हुआ है. जैसा कि सभी जानते हैं, पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह का साम्राज्य एक खुशहाल एवं समृद्ध राज्य था.

Published in आलेख

मराठी में मूल लेखक : संकेत कुलकर्णी 

हिन्दी अनुवाद एवं संकलन : सुरेश चिपलूनकर

भारत की सेना सदैव गर्व करने लायक काम करती रही है. इस सेना ने कई युद्धों में तथा बहुत सी बार शांतिकाल में भी अपनी वीरता और दिलेरी के नए आयाम गढ़े हैं.

Published in आलेख

जब कोई सेना बुरी तरह हारने लगती है और उसे दुम दबाकर पीछे की तरफ भागना होता है, तब अक्सर वह हारी हुई सेना वापस जाते-जाते अपनी खीझ और क्रोध उतारने के लिए लूटपाट, हत्याएँ करती हुई... गाँव उजाडती हुई भागती है.

Published in आलेख

जब हम थियेटर में मधुर भंडारकर की फिल्म देखने जाते हैं तो हमारे दिमाग में मधुर भंडारकर की ही छवि होती है. “चांदनी बार”, “ट्रेफिक सिग्नल”, “कारपोरेट” जैसी कई शानदार फ़िल्में देने वाले तथा अपनी फिल्मों में किसी हीरो-हीरोइन को हावी न होने देते हुए इस फिल्म माध्यम को “निर्देशक का माध्यम” सिद्ध करने वाले मधुर भंडारकर की हालिया फिल्म “इंदु सरकार” हाल ही में देखने को मिली.

Published in आलेख
पृष्ठ 1 का 30
न्यूज़ लैटर के लिए साइन अप करें