पुराने ज़माने में राजा महाराजा अपने साथ एक भाट(कवि) अवश्य रखते थे. जो हमेशा उनके साथ मौजूद रहते थे. उनका काम था राजा की प्रशंसा में कविता लिखना. इससे होता कुछ नहीं था, बस राजाओ के अहम् को संतुष्टि मिलती थी. इसके एवज में उन्हें बेशुमार दौलत मिलती थी.

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स्कूल में नमाज के लिए अलग कमरे की माँग... :- पश्चिम बंगाल में फलता-फूलता सेकुलरिज़्म...

२४ जून २०१६ को कुछ मुसलमान छात्रों ने अचानक दोपहर को अपनी कक्षाएँ छोड़कर स्कूल के लॉन में एकत्रित होकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया था, जबकि उधर हिन्दू छात्रों की कक्षाएँ चल रही थीं. चूँकि उस समय यह अचानक हुआ और नमाजियों की संख्या कम थी इसलिए स्कूल प्रशासन ने इसे यह सोचकर नज़रंदाज़ कर दिया कि रमजान माह चल रहा है तो अपवाद स्वरूप ऐसा हुआ होगा. लेकिन नहीं...

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