बुधवार, 25 मार्च 2015 18:09
"सेकुलर रेप" और "साम्प्रदायिक रेप" का अंतर...
मित्रों भारत में आजकल “रेप” का फैशन चल रहा है. अखबार-चैनल-सोशल मीडिया सभी पर रेप छाया हुआ है. जिस दिन रेप की खबर नहीं होती, लगता है कि दिन सूना हो गया. इसलिए जब “प्रगतिशील” महिलाएँ बोर होने लगती हैं तब सात-आठ साल से लिव-इन में रखैल की तरह खुशी-खुशी रहने के बाद अचानक उन्हें याद आता है कि, “अरे!! ये तो रेप हो गया”.
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