Corrupt Hindi Language & Education

“लफ़ड़ा”, “हटेले”, “खाली-पीली”, “बोम मत मार”, “निकल पड़ी”..... क्या कहा, इन शब्दों का मतलब क्या है? मत पूछिये, क्योंकि यह एक नई भाषा है, जिसका विस्तार (?) तेजी से हो रहा है, स्रोत है मायानगरी मुम्बई की हिन्दी फ़िल्में। दृश्य मीडिया की भाषा की एक बानगी – “श्रीलंकन गवर्नमेंट ने इस बात से डिनाय किया है कि उसने जफ़ना अपने ट्रूप्स को डिप्लॉय करने का प्लान बनाया है”, हाल ही में हिन्दी के सबसे ज्यादा प्रसार संख्या वाले “भास्कर” में छपा एक विज्ञापन- “कृतिकार भास्कर क्रिएटिव अवार्ड्स में एंट्री भेजने की लास्ट डेट है 31 अगस्त“... ऐसी भाषा का स्रोत हैं नये-नवेले भर्ती हुए तथाकथित चॉकलेटी पत्रकार जो कैमरा और माईक हाथ में आते ही अपने-आप को सभी विषयों का ज्ञाता और जमीन से दो-चार इंच ऊपर समझने लगते हैं। जिन्हें न तो भाषा से कोई मतलब है, ना हिन्दी से कोई वास्ता है, ना इस बात से कि इस प्रकार की भाषा का संप्रेषण करके वे किसके दिलो-दिमाग तक पहुँचना चाहते हैं।

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