दो जून को महान शोमैन राजकपूर की पुण्यतिथि है, और इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए मैं उनकी फ़िल्म "मेरा नाम जोकर" का एक असाधारण गीत प्रस्तुत करना चाहता हूँ, जो कई बार सुनाई दे जाता है, लेकिन अधिकतर लोग उसे सुनते वक्त "इग्नोर" कर देते हैं, दरअसल यह गीत भी अक्सर रेडियो पर पूरा नहीं बजाया जाता.. पहली बार में सुनते वक्त तो यह एक साधारण सा गीत लगता है, लेकिन गीतकार ने इसमें खोखली होती पूरी जीवन शैली को उघाडकर रख दिया है ।

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