प्रिय गुरमेंहर,

नमस्कार...

पिछले कुछ ही दिनों में तुम्हारी वीडियो पोस्ट और कुछ “मीडिया हाउस”(?) द्वारा तुम्हारा इन्टरव्यू लेने के कारण तुम घर-घर में चर्चा का विषय बन गई हो, मैंने देखा कि तुम “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा बुलंद कर रही हो और तुमने लिखा है कि तुम्हारे पिता को पाकिस्तान ने नहीं मारा, बल्कि “युद्ध” ने मारा”.

Published in आलेख

मोदी के विरोध और वामपंथ-मुस्लिम मानसिकता से ग्रस्त JNU विवि, अफज़ल गूरू के समर्थन में "देशद्रोह" के स्तर तक पहुँच जाएगा, किसी ने सोचा नहीं था... पढ़िए इस विवि से निकलने वाली घटिया राजनीति, और वैचारिक ज़हर की पड़ताल करती रिपोर्ट...

Published in ब्लॉग