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जब से पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक आतंक की विभीषिका बढ़ी है, तभी से अक्सर यह सवाल कई बौद्धिक क्षेत्रों में उठाया जाता रहा है कि आखिर वह कौन सी शिक्षा है अथवा वह कौन सा ग्रन्थ या किताब है, जिससे प्रभावित होकर अथवा जिसे पढ़कर आतंकी बन रहे हैं.

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सामान्यतः आज देश के विभिन्न भागों में बंग्लादेशी व पाक-परस्त ज़िहादी अनेक प्रकार से इस्लामिक आतंकवाद में लिप्त है, जिससे बढती हुई राष्ट्रिय व सामाजिक समस्याओं का किसी को अनुमान ही नहीं हो रहा है। क्योंकि भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सत्य सनातन संस्कृति और दर्शन को आज के छदम सेक्युलर केवल मैकाले व मार्क्सवाद की दृष्टि से देखने के आदी हो चुके है।

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पश्चिम बंगाल एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है, और यदि जल्दी ही कुछ न किया गया तो इसे “इस्लामिक बांग्लादेश” में बदलते देर नहीं लगेगी.

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ख़ासा स्मार्ट, परिवार या पास-पड़ौस के ही शरारती लड़के जैसा किशोर, अभी मसें भी नहीं भीगीं, मीठी मुस्कराहट बिखेरता चेहरा और उदगार "मैं यहाँ हिन्दुओं को मारने आया हूं, मुझे ऐसा करने में मज़ा आता है " ये वर्णन जम्मू के नरसू क्षेत्र में बीएसएफ की एक बस पर ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद गांव वालों की साहसिक सूझ-बूझ से दबोचे गये एक आतंकवादी का है।

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