Wedding Ring Finger

शायद वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है कि सगाई या शादी की अंगूठी हमेशा “अनामिका” उंगली में ही पहनी जाती है। हालांकि इस परम्परा के बारे में अधिक जानकारी का अभाव है, लेकिन अब चूँकि परम्परा है तो लोग लगातार निभाये जाते हैं। हाल ही में एक ई-मेल में यह रोचक जानकारी मिली, जिसमें अनूठे “लॉजिक” के जरिये यह सिद्ध किया गया है कि अंगूठी उसी उंगली में क्यों पहनना चाहिये, आप भी मुलाहिजा फ़रमाईये –

सर्वप्रथम माना कि सबसे मजबूत होते हैं अंगूठे अर्थात उन्हें हम माता-पिता की संज्ञा दें –
फ़िर अगली उंगली “तर्जनी” को माना जाये हमारे भाई-बहन –
फ़िर आती है बीच की उंगली “मध्यमा” ये हैं हम स्वयं (परिवार का केन्द्रबिन्दु) –
उसके बाद रिंग फ़िंगर “अनामिका” जिसे हम मान लेते हैं, पत्नी –
सबसे अन्त में “कनिष्ठा” उंगली को हम मानते हैं, हमारे बच्चे –

अब चित्र में दिखाये अनुसार अपनी दोनों हथेलियाँ पूरी फ़ैलाकर उनके पोर आपस में मिला लीजिये और बीच की दोनो उंगलियाँ “मध्यमा” (ऊपर माना गया है कि जो आप स्वयं हैं) को अपनी तरफ़ मोड़ लीजिये, हथेलियों को जोड़े रखिये –



अब दोनो अंगूठों (जिन्हें हमने माता पिता माना है) को अलग-अलग कीजिये, क्योंकि अनचाहे ही सही माता-पिता जीवन भर हमारे साथ नहीं रह सकते। फ़िर अंगूठों को साथ मिला लीजिये।
अब दोनों तर्जनी (जिन्हें हमारे भाई-बहन, रिश्तेदार माना है) को अलग-अलग करके देखिये, क्योंकि भाई-बहन और रिश्तेदार भी उम्र भर साथ नहीं रहने वाले, उनके भी अपने परिवार हैं। फ़िर वापस तर्जनी अपनी पूर्व स्थिति में ले आईये।
अब सबसे छोटी कनिष्ठा (हमारे बच्चे) को भी अलग कर देखिये, वे भी जीवन भर हमारे साथ नहीं रहने वाले हैं, बड़े होकर कहीं दूर निकल जायेंगे। पुनः दोनो उंगलियों को वापस पूर्वस्थान पर रख लें।
अब सबसे अन्त में “अनामिका” को अलग-अलग करने की कोशिश कीजिये, नहीं होंगी, क्योंकि पति-पत्नी को आजीवन साथ रहना होता है, तमाम खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ, इसीलिये “अनामिका” में शादी की अंगूठी पहनाई जाती है। एक बार यह करके देखिये....
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शनिवार, 04 अगस्त 2007 13:35

"सैंडी" का फ़्रेण्डशिप बैंड

उस दिन शाम को "सैंडी" बहुत दुःखी दिख रहा था, ना.. ना.. "सैंडी" कोई अमेरिकन नहीं है बल्कि कल तक नाक पोंछने वाला हमारा सन्दीप ही है । मेरे पूछते ही मानो उसका दुःख फ़ूट पडा़, बोला - भाई साहब, सारे शहर में ढूँढ कर आ रहा हूँ, "फ़्रेंडशिप बैंड" कहीं नहीं मिल रहा है । यदि मैं पूछता कि यह फ़्रेंडशिप बैंड क्या है, तो निश्चित ही वह मुझे ऐसे देखता जैसे वह अपने पिता को देखता है जब वह सुबह उसे जल्दी उठाने की कोशिश करते हैं, प्रत्यक्ष में मैने सहानुभूति जताते हुए कहा - हाँ भाई ये छोटे नगर में रहने का एक घाटा तो यही है, यहाँ के दुकानदारों को जब मालूम है कि आजकल कोई ना कोई "डे" गाहे-बगाहे होने लगा है तो उन्हें इस प्रकार के आईटम थोक में रखना चाहिये ताकि मासूम बच्चों (?) को इधर-उधर ज्यादा भटकना नहीं पडे़गा । संदीप बोला - हाँ भाई साहब, देखिये ना दो दिन बीत गये फ़्रेंडशिप डे को, लेकिन मैंने अभी तक अपने फ़्रेंड को फ़्रेंडशिप बैंड नहीं बाँधा, उसे कितना बुरा लग रहा होगा...। मैने कहा - लेकिन वह तो वर्षों से तुम्हारा दोस्त है, फ़िर उसे यह बैंड-वैंड बाँधने की क्या जरूरत है ? यदि तुमने उसे फ़्रेंडशिप बैंड नहीं बाँधा तो क्या वह दोस्ती तोड़ देगा ? या मित्रता कोई आवारा गाय-ढोर है, जो कि बैंड से ही बँधती है और नहीं बाँधा तो उसके इधर-उधर चरने चले जाने की संभावना होती है । अब देखो ना मायावती ने भी तो भाजपा के लालजी भय्या को फ़्रेंडशिप बैंड बाँधा था, एक बार जयललिता और ममता दीदी भी बाँध चुकी हैं, देखा नहीं क्या हुआ... फ़्रेंडशिप तो रही नहीं, "बैंड" अलग से बज गया, इसलिये कहाँ इन चक्करों में पडे़ हो... (मन में कहा - वैसे भी पिछले दो दिनों में अपने बाप का सौ-दो सौ रुपया एसएमएस में बरबाद कर ही चुके हो) । सैंडी बोला - अरे आप समझते नहीं है, अब वह जमाना नहीं रहा, वक्त के साथ बदलना सीखिये भाई साहब... पता है मेरे बाकी दोस्त कितना मजाक उडा़ रहे होंगे कि मैं एक फ़्रेंडशिप बैंड तक नहीं ला सका (फ़िर से मेरा नालायक मन सैंडी से बोला - जा पेप्सी में डूब मर) । फ़िर मैने सोचा कि अब इसका दुःख बढाना ठीक नहीं, उसे एक आईडिया दिया...ऐसा करो सैंडी... तुमने बचपन में स्कूल में बहुत सारा "क्राफ़्ट" किया है, एक राखी खरीदो, उसके ऊपर लगा हुआ फ़ुन्दा-वुन्दा जो भी हो उसे नोच फ़ेंको, उस पट्टी को बीच में से काटकर कोकाकोला के एक ढक्कन को चपटा करके उसमें पिरो दो, उस पर एक तरफ़ माइकल जैक्सन और मैडोना का और दूसरी तरफ़ संजू बाबा और मल्लिका के स्टीकर लगा दो, हो गया तुम्हारा आधुनिक फ़्रेंडशिप बैंड तैयार ! आइडिया सुनकर सैंडी वैसा ही खुश हुआ जैसे एक सांसद वाली पार्टी मन्त्री पद पाकर होती है... मेरा मन भी प्रफ़ुल्लित (?) था कि चलो मैने एक नौजवान को शर्मिन्दा (!) होने से बचा लिया ।

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गुरुवार, 31 मई 2007 15:51

भुतहा संयोग या कुछ और ?

अब्राहम लिंकन कॉंग्रेस के लिये 1846 में चुने गये,
जॉन एफ़ केनेडी कॉंग्रेस के लिये 1946 में चुने गये..

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बुधवार, 21 मार्च 2007 16:26

एक दिन सन २०२८ का

"स्व-आचार संहिता" : (यह लेख नईदुनिया इन्दौर में ३०.०४.२००६ को प्रकाशित हो चुका है) यह लेख / चुटकुला / घटना... एक ई-मेल पर आधारित / अनुवादित है, जिसके लेखक की मुझे जानकारी नहीं है । यदि कोई इसके मूलस्रोत के बारे में जानता हो तो कृपया मुझे सप्रमाण लिंक मेल करें, ताकि उसे इस लेख में जोडा़ जा सके ।

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सोमवार, 29 जनवरी 2007 16:07

What is a Love Letter?

लव लेटर क्या होता है ....
लव-लेटर, लव-लेटर मतलब लव-लेटर होता है..
सीधे-सीधे बोलने की बजाय आसान और better होता है...
गुलाबी मीठी ठण्ड के मौसम का sweater होता है...
अच्छी तरह से मथा हुआ नरम butter होता है...
लव-लेटर तो लव-लेटर होता है.......

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