सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति मनोहर पर्रीकर...

Written by बुधवार, 14 अक्टूबर 2015 12:56

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत के रक्षामंत्री मनोहर गोपालकृष्ण पर्रीकर की सादगी के कई किस्से गोवा में प्रसिद्ध हैं. ईमानदारी का ढोंग करने वाले कई नेता भारत ने देखे हैं, परन्तु यह गुण पर्रीकर के खून में ही है... पर्रीकर से जुडी कुछ और प्रेरक बातें जानिये....

सुबह के लगभग छह बजने वाले थे, पणजी के मुख्य मार्गों पर इक्का-दुक्का वाहन चल रहे थे. अधिकाँश गोवा निवासी उस समय भी नींद में ही थे. परन्तु हमेशा की आदत के अनुसार एक स्कूटर सवार अपने ऑफिस जा रहा था. बीच-बीच में उसकी नज़र अपनी कलाई घड़ी पर चली जाती थी, क्योंकि उस व्यक्ति को प्रतिदिन की अपेक्षा आधा घंटा देर हो गई थी. सुबह के छः बजे भी पणजी के सभी मुख्य चौराहों के ट्रैफिक सिग्नल चालू थे. स्कूटर सवार जैसे ही एक चौराहे पर पहुँचा, लाल बत्ती से उसका सामना हो गया. मन ही मन हल्का सा चिढ़ते हुए उसने अपना स्कूटर रोक दिया. उसी समय एक आलीशान बड़ी सी कार भी उस स्कूटर के पीछे आ रही थी. रास्ते पर एक भी गाड़ी न होने के बावजूद इस स्कूटर सवार को अपने आगे ब्रेक मारते देखकर वह बड़ी कारवाला गड़बडा गया. उसने भी स्कूटर के पीछे जोर से ब्रेक मारे और गुस्से में कार से उतरकर कोंकणी भाषा में बोला, “कित्यां थाम्बलो रे?” (क्यों रुक गया रे?). स्कूटर वाले ने शान्ति से जवाब दिया, “सिग्नल बघ मरे” (लाल सिग्नल देखो”)...

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