“धरती के विषवृक्ष पाकिस्तान” की “जमात-ए-इस्लामी” पार्टी के नेता का एक पुराना इंटरव्यू…(भाग-2) Jamat-E-Islami Pakistan Talibani Plans of Islam

Written by मंगलवार, 09 जून 2009 11:44
(भाग-1 से जारी…)
जैसा कि पहले कहा गया है, इस इंटरव्यू में ज़ाहिर किये गये विचारों को पढ़कर कभी आप हँसेंगे, कभी आप माथा पीटेंगे, कभी गुस्सा होंगे, लेकिन कुल मिलाकर है बड़ा ही मजेदार इंटरव्यू। प्रस्तुत हैं जमात-ए-इस्लामी (पाकिस्तान) के मौलाना साहब के इंटरव्यू के हिन्दी अनुवाद का दूसरा भाग… जिसमें उन्होंने भारत के मुसलमानों के बारे में भी आश्चर्यजनक बयान दिये हैं…

प्रश्न (पत्रकार ज़लील आमिर) – क्या आपको नहीं लगता कि यदि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया तो भारत में व्यापक पैमाने पर हिन्दू-मुस्लिम दंगे होंगे और उसमें काफ़ी संख्या में हमारे मुस्लिम भाई भी मारे जायेंगे?

उत्तर (मौलाना नबीउल्लाह) – हाँ, हो सकता है, लेकिन हमारी विचारधारा सिर्फ़ कुर-आन और हदीस की व्याख्याओं पर आधारित है। पैगम्बर मुहम्मद ने कहा है कि जो भी मुस्लिम, किसी अन्य गैर-मुस्लिम से मधुर सम्बन्ध रखता है वह सच्चा मुसलमान नहीं हो सकता। इसमें हिन्दू, ईसाई और यहूदी सभी शामिल हैं। पैगम्बर मोहम्मद ने यह भी कहा है कि यदि कोई मुस्लिम शासक खराब है तब भी मुस्लिमों को वह देश छोड़कर गैर-मुस्लिम देश में नहीं जाना चाहिये। इस बारे में हदीस और कुर-आन में स्पष्ट निर्देश हैं। इसलिये जो मुसलमान विभाजन के दौरान भारत से पाकिस्तान की तरफ़ नहीं आये, वे भी हमारी नज़र में “हिन्दू” ही हैं। वे भले ही सोचते रहें कि वे मुस्लिम हैं लेकिन अल्लाह के सामने ऐसा नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर जैसे कि “अहमदिया” हैं, वे अपने आपको मुस्लिम मानते हैं लेकिन असल में वे हैं नहीं, इसलिये जब तक भारत के मुस्लमान किसी मुस्लिम देश में नहीं चले जाते तब तक वे सच्चे मुस्लिम नहीं हो सकते। अपने भारत दौरे के समय मैंने पाया कि भारत के हिन्दू किसान फ़सल लेने पर अपनी सारी उपज पूजा करके पहले भगवान को समर्पित कर देते हैं, इसलिये इस प्रकार की उपज मुसलमानों के लिये “हराम” है। क्योंकि भारत के सभी “तथाकथित” मुसलमान ऐसी फ़सल और अनाज खाते हैं जो कि अल्लाह से पहले किसी और भगवान को पहले ही समर्पित की जा चुकी है, कुर-आन में इसकी सख्त बन्दिश है और इसीलिये वे लोग सच्चे मुस्लमान नहीं हैं। पैगम्बर मोहम्मद का आदेश है कि मुसलमान उसी देश में रहें जहाँ वे बहुसंख्यक हैं, जो मुसलमान इस्लामिक देश छोड़कर दूसरे देश में बसता है वह काफ़िर माना जाये, सिर्फ़ उसी को मुसलमान माना जायेगा जो अल्लाह द्वारा शासित देश में आने को उत्सुक हो, गैर-इस्लामी देश में सदा के लिये बस चुका व्यक्ति मुसलमान नहीं है। ऐसे में यदि भारत के किसी दंगे में कोई मुसलमान मारा भी जाता है तो हमें उसकी परवाह क्यों होनी चाहिये? लेकिन फ़िलहाल रणनीतिक तौर पर हम भारत के मुसलमानों से मधुर सम्बन्ध बनाये हुए हैं। पाकिस्तान की बेहतरी के लिये काम करने वाले ही असली मुसलमान हैं। कश्मीर के मुसलमानों को मैं असली मुसलमान मान सकता हूँ, क्योंकि वे “हिन्दू शासन”(?) से मुक्ति हेतु संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन भारत के बाकी मुसलमानों ने भारत-पाक विभाजन स्वीकार कर लिया है और इसलिये वे मुस्लिम नहीं रहे।

जमात-ए-इस्लामी पार्टी “गुलाम प्रथा” को फ़िर शुरु करेगी…

सभी अरब देशों में “गुलाम” प्रथा चलती है, पैगम्बर मोहम्मद ने भी कहा है कि गुलामों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उन्हें समय-समय पर आज़ाद करते रहो। जमात जब पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तो “गुलाम प्रथा” फ़िर शुरु की जायेगी, सभी पकड़े गये हिन्दू कैदियों को गुलाम बनाया जायेगा। लगभग सभी अरब देशों में यह प्रथा धड़ल्ले से जारी है, हालांकि अरब देशों में भारी संख्या में हिन्दू काम कर रहे हैं, लेकिन हमारा इरादा अरबों की पवित्र भूमि को पुनः पवित्र बनाना है और यह काम हिन्दुओं को वहाँ से निकालकर या गुलाम बनाकर ही किया जा सकता है। फ़िलहाल वहाँ के हिन्दुओं ने अरबों को मानसिक रूप से भ्रष्ट कर दिया है।

हिन्दुओं के मन्दिर, मुस्लिम भूमि को अपवित्र करते हैं…

अरब देशों और कतर आदि में मैंने देखा कि वहाँ हिन्दुओं के कई मन्दिर हैं, अरब के बादशाह ने मन्दिर बनाने की अनुमति देकर ही गलती की है, ऊपर से सुल्तान के परिवार के सदस्य मन्दिर का उद्घाटन करने भी गये। काज़ी अहमद इस बात से भी काफ़ी नाराज़ हैं कि कतर की रॉयल परिवार के कुछ सदस्य भगवान “अय्यप्पा” में भी आस्था रखते हैं। इससे जमात प्रमुख बेहद खफ़ा हैं और उन्होंने इन शैतानी शक्तियों से लड़ने का संकल्प लिया है।

धर्म-परिवर्तन की सजा मौत है…
मौलाना साहब फ़रमाते हैं कि मुसलमानों के लिये धर्म परिवर्तन या अन्य धर्मों की ओर झुकाव की सजा सिर्फ़ मौत है। पाकिस्तान में अभी शरीयत का कानून लागू नहीं है, इसलिये यहाँ संविधान के तहत धर्म परिवर्तन किया जा सकता है, लेकिन जब जमात सत्ता में आयेगी तब इसके लिये मौत की सजा मुकर्रर की जायेगी।

विश्व का सारा ज्ञान कुरान और हदीस में समाया हुआ है…
मौलाना साहब आगे फ़रमाते हैं कि विश्व का समूचा ज्ञान कुर-आन और हदीस में समाया हुआ है, कुर-आन से अधिक जानने पर एटम बम और टीवी जैसी विनाशकारी समस्याएं पैदा होती हैं। संगीत, टीवी, फ़ोटोग्राफ़ी आदि शैतानी और हराम वस्तुएं हैं। पहले के ज़माने में संगीत सिर्फ़ गायन तक सीमित था, लेकिन नई तकनीक ने इसे घर-घर में पहुँचा दिया है, हमें इस शैतानी चीज़ से नई पीढ़ी का बचाव करना है।

साइंस और टेक्नोलॉजी मानव सभ्यता के लिये बुरी बातें हैं…
मौलाना के महान विचार यहीं नहीं थमते, वे कहते हैं… “मैं भी एक सिविल इंजीनियर हूँ, और मेरा मानना है कि साइंस और टेक्नोलॉजी सभ्यता के विकास के लिये बहुत बुरी बातें हैं। जितना ज्यादा आप इसका ज्ञान प्राप्त करते जाते हैं, आप सर्वकालिक महान पुस्तक कुर-आन पर सवाल उठाने लगते हैं। हदीस में स्पष्ट कहा गया है कि “धरती गोल नहीं चपटी है… लेकिन वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि धरती गोल है, लेकिन कुप्रचार के जरिये लोगों के मन में कुर-आन के प्रति संशय पैदा कर दिये गये हैं। हम कुर-आन के वैज्ञानिक पहलुओं को जनता के सामने लायेंगे और सिद्ध करेंगे कि कुर-आन ही पूरी तरह वैज्ञानिक है और पूर्ण सत्य है।

प्रश्न – आप साइंस और टेक्नोलॉजी को बुरा कह रहे हैं, फ़ोटोग्राफ़ी को हराम बता रहे हैं, लेकिन पश्चिमी देशों से हथियार आयात करते हैं और पासपोर्ट के लिये फ़ोटो भी तो खिंचवाते हैं?

उत्तर – आपका कहना सही है, लेकिन यह सिर्फ़ रणनीति के तौर पर है। अल्लाह ने हमे पेट्रोल की ताकत दी है, जिससे पश्चिमी देशों की कारें चलती हैं, इसके बदले में हम उनसे हथियार लेते हैं और यही हथियार आगे चलकर उन्हें खत्म करने में काम आयेंगे।

प्रश्न – आजकल पाकिस्तान में भी आरक्षण को लेकर झगड़े बढ़ रहे हैं, इस सम्बन्ध जमात की क्या नीति होगी।

उत्तर – यह समस्या असल में भाषा की समस्या है, फ़िलहाल उर्दू बोलने वाले मुसलमान और सिन्धी बोलने वाले मुसलमानों (मोहाजिरों) के बीच झगड़े अधिक हैं। हम सत्ता में आये तो सभी क्षेत्रीय भाषाओं (पश्तो, सिंधी, बलूची, उर्दू, पंजाबी आदि) को बन्द करके सिर्फ़ अरबी को राजकाज की भाषा बनायेंगे। यही एकमात्र पवित्र भाषा है। इसके द्वारा सभी जनता कुर-आन और हदीस की व्याख्या को ठीक से समझ सकेगी, और धर्म आधारित आरक्षण के झगड़े बन्द होंगे।

प्रश्न- पाकिस्तान के कुछ सेकुलर पत्रकार जमात का कड़ा विरोध करते हैं, डॉन और कराची से निकलने वाले कई अखबार आपके विरोधी हैं। इस बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – जब पाकिस्तान में शरीयत लागू होगी तब इनमें से एक भी पत्रकार नहीं दिखाई देगा, वे कोर्ट भी नहीं जा पायेंगे। ये सेकुलर पत्रकार हमारे वक्तव्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के सामने पेश करते हैं और हमारी छवि खराब करते हैं। ये लोग पाकिस्तान का इतिहास अंग्रेजों के जमाने से लिखते हैं और शुरु करते हैं, जबकि पाकिस्तान का इतिहास विभाजन और आज़ादी के बाद ही शुरु होता है। सेकुलर पत्रकार “काफ़िर” हैं, वे मुस्लिम हैं ही नहीं। वे हमारे पास आयें और कुर-आन और हदीस की व्याख्या के बारे में पूछें, हम उनकी हरेक शंका का समाधान कुर-आन की रौशनी में करने को तैयार हैं। वे यह सिद्ध करें कि जो हमने कहा है कुर-आन के अनुसार वह गलत है, तो हम मान लेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते। ये लोग कुर-आन और हदीस पर कोई बहस नहीं करना चाहते। हम साबित कर देंगे कि कुर-आन के हिसाब से ये लोग गैर-मुस्लिम हैं, ये लोग “कादियानियों” की तरह हैं जो कहते हैं कि “जेहाद” कोई अनिवार्य बात नहीं है… यह बकवास है।
प्रश्न – आपका अमूल्य समय देने के लिये धन्यवाद…
उत्तर – अल्लाह का रहमोकरम आपके साथ रहे…

इस इंटरव्यू के मूल अंग्रेजी भाग को यहाँ देखा जा सकता है…
http://www.islam-watch.org/JihadiUmmah/What-Islam-Wants-Nabiullah-Khan.htm


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Super User

 

I am a Blogger, Freelancer and Content writer since 2006. I have been working as journalist from 1992 to 2004 with various Hindi Newspapers. After 2006, I became blogger and freelancer. I have published over 700 articles on this blog and about 300 articles in various magazines, published at Delhi and Mumbai. 


I am a Cyber Cafe owner by occupation and residing at Ujjain (MP) INDIA. I am a English to Hindi and Marathi to Hindi translator also. I have translated Dr. Rajiv Malhotra (US) book named "Being Different" as "विभिन्नता" in Hindi with many websites of Hindi and Marathi and Few articles. 

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