दाऊद भाई..पधारो ना म्हारे देस

Written by शुक्रवार, 20 जुलाई 2007 20:50

दाऊद भाई, आपको ये पत्र लिखते हुए बहुत खुशी हो रही है, चारों तरफ़ खुशी जैसे पसरी हुई है, खुशी का कारण भी है, मोनिका "जी" को भोपाल की एक अदालत ने फ़र्जी पासपोर्ट मामले में बरी कर दिया है, जिसकी खुद मोनिका ने भी सपने में कल्पना नहीं की होगी, लेकिन कल्पना करने से क्या होता है, आप तो जानते ही हैं कि हमारे यहाँ का सिस्टम कैसा "यूजर-फ़्रेंण्डली" हो गया है (जो इस सिस्टम को "यूज़" करता है, ये सिस्टम उसका फ़्रेण्ड बन जाता है), अब आप हों या अबू भाई, कहीं भी बैठे-बैठे सारी जेलों को अपने तरीके से संचालित कर सकते हैं (मैं तो कहता हूँ कि सरकार को आपको जेल सुधार का ठेका दे देना चाहिये)...

तो भाई, भूमिका बनाने का तात्पर्य यही है कि हम पलक-पाँवडे़ बिछाये बैठे हैं आपकी राहों में, क्यों खामख्वाह हमारे सीबीआई अधिकारियों को तकलीफ़ देते हो और हमारे गाढे़ पसीने की कमाई जैसी पुर्तगाल से अबू-मोनिका को लाने में बहाई गई, उसे दुबई या कहीं और बहने देना चाहते हो ? भाई सब कुछ तो आपका ही है, हमारे लिये जैसे आप, वैसे पप्पू यादव, वैसे ही शहाबुद्दीन, हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता । तो भाई तारीख बताओ और आ जाओ.. मोनिका दीदी पहले ही फ़रमा चुकी हैं कि जेल से ज्यादा सुरक्षित जगह भारत में कोई नहीं है (देखा ! क्या रोशन ख्याल आया है संगत के असर से), एकदम सुरक्षित जेलें हैं यहाँ की, अदालतें भी, कानून भी, वकील भी उनके गुर्गे भी, सब से सब एकदम गऊ, आप जहाँ भी रहना चाहेंगे व्यवस्था करा दी जायेगी, अस्पताल में रहें तो भी कोई बात नहीं हम आप जैसों की सेहत का खयाल रखने वालों में से हैं, सच्ची कहता हूँ भाई खुदा ने चाहा तो एकाध साल में ही मोटे हो जाओगे, जब तक जी करे हमसे सेवा-चाकरी करवाओ, और जब जाने की इच्छा हो बोल देना, हम आपको फ़िर से हवाई जहाज का अपहरण करने की तकलीफ़ नहीं देंगे..वैसे ही छोड़ देंगे.. हाँ, लेकिन आने से पहले "मुझे भारतीय न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है" यह सूत्रवाक्य बोलना मत भूलना... फ़िर देखना कैसे हाथों-हाथ उठाये जाते हो हमारे चिरकुट मीडिया द्वारा, जो आपकी बरसों पुरानी फ़िल्में दिखा-दिखा कर ही टाईम पास कर रहा है, मुम्बई बम ब्लास्ट के चौदह साल बाद फ़ैसले आना शुरु हुए हैं और अभी सुप्रीम कोर्ट बाकी है, तो भाई आपकी बाकी की जिन्दगी तो आराम से कटना तय है यहाँ... फ़िर आपके भाई-बन्धु भी काफ़ी मौजूद हैं यहाँ पहले से ही, जहाँ चार यार मिल जायेंगे रातें गुलजार हो जायेंगी...

आपकी मदद के लिये यहाँ राजनैतिक पार्टियाँ हार-फ़ूल लिये तैयार खडी़ हैं, इधर आपने पावन धरती पर कदम रखा और उधर तड़ से आपकी संसद सदस्यता पक्की... फ़िर मानवाधिकार वाले हैं (जो सूअर के मानवाधिकार भी सुरक्षित रखते हैं)... कई "उद्दीन" जैसे शहाबुद्दीन, तस्लीमुद्दीन और सोहराबुद्दीन (कुछ सरेआम, कुछ छुपे हुए) भी मौजूद हैं जो आपको सर-माथे लेने को उतावले हो उठेंगे.. बस..बस अब मुझसे बयान नहीं किया जाता कि आपको कितनी-कितनी सुविधायें मिलने वाली हैं यहाँ...। मन पुलकित-पुलकित हो रहा है यह सोच-सोचकर ही कि जिस दिन आप इस "महान" देश में पधारेंगे क्या माहौल होगा...यहाँ पासपोर्ट की अदला-बदली आम बात है, कार से कुचलना और बरी होना तो बेहद मामूली बात है, और आप तो माशाअल्लाह.. अब आपकी तारीफ़ क्या करूँ, आपने बडे़ काम किये हैं कोई ऐरे-गैरे जेबकतरे या झुग्गी वाले थोडे़ ही ना हैं आप, अकेले मध्यप्रदेश में बडे़ उद्योगपतियों पर सिर्फ़ बिजली का हजारों करोड़ रुपया बकाया है, मतलब कि आप अकेले नहीं रहेंगे यहाँ... बस अब और मनुहार ना करवाओ... कराची, दुबई, मुम्बई पास-पास ही तो है...आ जाओ... कहीं मुशर्रफ़ का दिमाग सटक गया तो.. नहीं..नहीं.. रिस्क ना लो, आप तो दुनिया की सबसे "सेफ़" जगह पर आ ही जाओ... मैं इन्तजार कर रहा हूँ...

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