Cardinal George Alencherry, Indian Constitution and Vatican

Written by गुरुवार, 19 जनवरी 2012 17:33

अलेंचेरी की कार्डिनल के रूप में नियुक्ति और कुछ तकनीकी सवाल… (एक माइक्रो पोस्ट)

केरल के मूल निवासी 66 वर्षीय आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी को गत सप्ताह पोप ने कार्डिनल की पदवी प्रदान की। वेटिकन में की गई घोषणा के अनुसार सोलहवें पोप बेनेडिक्ट ने 22 नए कार्डिनलों की नियुक्ति की है। रोम (इटली) में 18 फ़रवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में एलेंचेरी को कार्डिनल के रूप में आधिकारिक शपथ दिलाई जाएगी।

जॉर्ज एलेंचेरी, कार्डिनल नियुक्त होने वाले ग्यारहवें भारतीय हैं। वर्तमान में भारत में पहले से ही दो और कार्डिनल कार्यरत हैं, जिनका नाम है रांची के आर्चबिशप टेलीस्पोर टोप्पो एवं मुम्बई के आर्चबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस। हालांकि भारत के ईसाईयों के लिये यह एक गौरव का क्षण हो सकता है, परन्तु इस नियुक्ति (और इससे पहले भी) ने कुछ तकनीकी सवाल भी खड़े कर दिये हैं।


जैसा कि सभी जानते हैं, “वेटिकन” अपने आप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, जिसके राष्ट्र प्रमुख पोप होते हैं। इस दृष्टि से पोप सिर्फ़ एक धर्मगुरु नहीं हैं, बल्कि उनका दर्जा एक राष्ट्र प्रमुख के बराबर है, जैसे अमेरिका या भारत के राष्ट्रपति। अब सवाल उठता है कि पोप का चुनाव कौन करता है? जवाब है दुनिया भर में फ़ैले हुए कार्डिनल्स…। अर्थात पोप को चुनने की प्रक्रिया में कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी भी अपना वोट डालेंगे। यह कैसे सम्भव है? एक तकनीकी सवाल उभरता है कि कि, क्या भारत का कोई मूल नागरिक किसी अन्य देश के राष्ट्र प्रमुख के चुनाव में वोटिंग कर सकता है? इसके पहले भी भारत के कार्डिनलों ने पोप के चुनाव में वोट डाले हैं परन्तु इस सम्बन्ध में कानून के जानकार क्या कहते हैं यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत के संविधान के अनुसार यह कैसे हो सकता है? यदि पोप “सिर्फ़ धर्मगुरु” होते तो शायद माना भी जा सकता था, लेकिन पोप एक सार्वभौम देश के राष्ट्रपति हैं, उनकी अपनी मुद्रा और सेना भी है…

क्या सलमान रुशदी भारत में वोटिंग के अधिकारी हैं? क्या चीन का कोई नागरिक भारत के चुनावों में वोट डाल सकता है? यदि नहीं, तो फ़िर कार्डिनल एलेंचेरी किस हैसियत से वेटिकन में जाकर वोटिंग करेंगे?
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नोट :- जिस प्रकार किसी सेल्समैन को 100% टारगेट प्राप्त करने पर ईनाम मिलता है, उसी प्रकार आर्चबिशप एलेंचेरी को कार्डिनल पद का ईनाम इसलिए मिला है, क्योंकि उन्होंने पिछले दो दशकों में कन्याकुमारी एवं नागरकोविल इलाके में धर्म परिवर्तन में भारी बढ़ोतरी की है। ज्ञात रहे कि एलेंचेरी महोदय वही “सज्जन” हैं जिन्होंने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानन्द स्मारक नहीं बनने देने के लिए जी-तोड़ प्रयास(?) किये थे, इसी प्रकार रामसेतु को तोड़कर “सेतुसमुद्रम” योजना को सिरे चढ़ाने के लिए करुणानिधि के साथ मिलकर एलेंचेरी महोदय ने बहुत “मेहनत”(?) की। हालांकि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी के प्रयासों तथा हिन्दू संगठनों के कड़े विरोध के कारण वह दोनों ही “दुष्कृत्य” में सफ़ल नहीं हो सके।

http://in.christiantoday.com/articles/archbishop-george-alencherry-elevated-to-cardinal/6941.htm
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I am a Blogger, Freelancer and Content writer since 2006. I have been working as journalist from 1992 to 2004 with various Hindi Newspapers. After 2006, I became blogger and freelancer. I have published over 700 articles on this blog and about 300 articles in various magazines, published at Delhi and Mumbai. 


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