राजा बाबू और नीरा राडिया की जुगलबन्दी, 2G स्पेक्ट्रम महाघोटाला और सीबीआई के कुछ गोपनीय दस्तावेज… (अंतिम भाग) ... Spectrum Scandal, A Raja, Neera Radia, CBI, PMO (Part-3)

Written by शुक्रवार, 14 मई 2010 11:53
भाग-1 में हमने देखा कि 2G स्पेक्ट्रम घोटाला क्या है, तथा भाग-2 में हमने देखा कि इस महाघोटाले को कैसे अंजाम दिया गया तथा पैसा किस प्रकार ठिकाने लगाया गया, इस वजह से अब उन पत्रों और दस्तावेजों के मजमून में से कुछ खास-खास बातें पेश करने पर किसी को भी इसे समझने में आसानी होगी, कि किस तरह से उद्योगपति-नेता-अफ़सर का बदकार त्रिकोण हमारे देश को लूट-खसोट रहा है… पेश है तीसरा और अन्तिम भाग…

चूंकि पत्रों-दस्तावेजों की स्कैन प्रति यहाँ अटैच कर ही रहा हूं, इसलिये उसमें उल्लेखित सिर्फ़ कुछ खास-खास बातें ही लिखूंगा… ऐसा करने पर भी लेख लम्बा हो गया है… अतः अधिक विस्तार से पढ़ने के लिये उस पर चटका लगाकर अक्षर बड़े करके पढ़ा जा सकता है –

राजा बाबू को मंत्री बनवाने के समय राजा-राडिया और कनिमोझी के किये गये फ़ोन टेप का चित्र यह है,
जिसमें नीरा, कनिमोझी से कहती हैं – “DMK के कोटे से कौन मंत्री बनेगा कौन नहीं बनेगा इससे प्रधानमंत्री को कोई मतलब नहीं है…प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें टीआर बालू अथवा ए राजा से कोई तकलीफ़ नहीं है, दयानिधि मारन ने गुलाम नबी आज़ाद से बात की है, लेकिन अन्तिम निर्णय तो करुणानिधि का ही होगा…, प्रधानमंत्री के सामने पाँच मंत्रालयों की माँग रख दी है और कह दिया है कि यदि नहीं मिले तो हम सरकार में शामिल नहीं होंगे…”
दूसरे फ़ोन में नीरा, राजा बाबू से कहती हैं, “अझागिरी या मारन में से कोई एक मंत्रिमण्डल में आ सकता है, लेकिन एक ही परिवार के तीन लोग होंगे तो करुणानिधि को इसकी सफ़ाई देना मुश्किल होगा… कपड़ा मंत्रालय या उर्वरक मंत्रालय? राजा बाबू कहते हैं कि “हाँ… एक ही परिवार के तीन लोग मंत्री, मुश्किल तो होगी… लेकिन राजनीति में यह तो चलता है…” (हँसते हैं…) खैर देखते हैं आगे क्या होता है…। अन्ततः टाटा और राडिया मिलकर मारन को मंत्रिमण्डल से बाहर रखने में सफ़ल होते हैं… और जमकर सौदेबाजी के बाद DMK के लिये 5 मंत्रालय दिये जाते हैं।


अगले पत्र में सीबीआई के आईपीएस अधिकारी श्री विनीत अग्रवाल ने श्री मिलाप जैन को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने केस क्रमांक और दिनांक के उल्लेख सहित इस बात को रेखांकित किया है कि नीरा राडिया की कम्पनी नोएसिस कंसल्टेंसी इस पूरे षडयंत्र में पूरी तरह से शामिल है, और इन लोगों पर कड़ी नज़र रखने की जरूरत है, चाहे फ़ोन टेपिंग ही क्यों न करनी पड़े…और इससे जाँच के काम में मदद मिलेगी…


पत्र क्रमांक 2, श्री आशीष अबरोल (आयकर संयुक्त आयुक्त) द्वारा श्री विनीत अग्रवाल को लिखा गया, जिसमें अबरोल ने कहा है कि CBDT से मिली सूचना के आधार पर (गृह सचिव की अनुमति से) नीरा राडिया की फ़ोन लाइनें निगरानी पर ली गई हैं। नीरा राडिया की कम्पनियाँ नोएसिस, वैष्णवी कंसल्टेंसी, विटकॉम और न्यूकॉम, सरकार के विभिन्न विभागों जैसे, टेलीकॉम, पावर, एवियेशन, और इन्फ़्रास्ट्रक्चर में खामख्वाह दखल और सलाह देती हैं। पत्र में दो प्रमुख बातें हैं -
1) यह स्पष्ट है कि नीरा राडिया का टेलीकॉम लाइसेंस के मामले में कुछ भूमिका है।
2) नीरा राडिया और संचार मंत्री के बीच अक्सर सीधी बातचीत होती रहती है।

(अर्थात आयकर, सीबीआई, CBDT तीनों विभागों की निगरानी राडिया और राजा पर थी और इसमें सरकार की सहमति, अनुमति और जानकारी थी…) जबकि सरकार लगातार (आज भी) कहती रही है कि किसी की भी फ़ोन टैपिंग नहीं की गई है…





अगला दस्तावेज़, CBDT के श्री सुधीर चन्द्रा को सम्बोधित किया गया है, और इसमें सौदे में Unitech कम्पनी की संदिग्ध भूमिका, उसकी अनियमितताएं आदि के बारे में बाकायदा टेबल बनाकर बताया गया है, कि किस तरह यूनिटेक ने फ़र्जी लोन एंट्रियाँ दर्शाईं, और केपिटल गेन के 240 करोड़ रुपयों को भी हेराफ़ेरी करके दिखाया।


अगला चित्र इसी का दूसरा पेज है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका के लेहमैन ब्रदर्स के धराशाई हो जाने पर यूनिटेक घबरा गई तब नीरा राडिया ने ही टाटा रियलिटी से कहकर यूनिटेक के लिये 650 करोड़ का एडवांस जुगाड़ करवाया (इसे कहते हैं हाईटेक हाईफ़ाई दल्लेबाजी)। यूनिटेक ने टाटा को जो चेक दिये वह बाउंस हो गये जबकि राडिया ने प्रेस कान्फ़्रेंस में कहा था कि उस एडवांस का हिसाब-किताब हो चुका है। नीरा राडिया ने ही यूनीटेक को लाइसेंस दिलवाने में मुख्य भूमिका निभाई।


अगला पत्र आयकर विभाग की अन्तरिम जाँच रिपोर्ट (जून 2009) का है, जिसमें विभाग द्वारा सरकार को रिपोर्ट पेश की गई है कि नीरा राडिया की कम्पनियों की 9 लाइनों को 180 दिनों तक लगातार निगरानी और टेप किया गया, और इस बातचीत से पता चलता है कि टेलीकॉम, पावर और एवियेशन (उड्डयन) मंत्रालय में इन चारों फ़र्मों की गहरी पैठ है तथा इनके द्वारा कई काम करवाये गये हैं (अर्थात जून 2009 में ही सरकार को पता चल गया था कि राडिया-राजा के बीच जमकर घी-खिचड़ी है, तब भी राजा बाबू को दूरसंचार मंत्रालय सौंपने में “ईमानदार” बाबू को कोई अड़चन नहीं आई?)


अगले पत्र में विभाग की जुलाई 2009 की अन्तरिम जाँच रिपोर्ट है, जिसमें सरकार को बताया गया है कि फ़ोन पर सुनी गई बातों के मुताबिक, सरकार के गोपनीय दस्तावेज और सरकार की नीतियों सम्बन्धी जानकारी राडिया की कम्पनियों को कहीं से लीक हो रही है। टेपिंग के अनुसार अफ़्रीका के गिनी अथवा सेनेगल देशों से भी भारी मात्रा में पैसों के लेनदेन की बात सामने आई है। यह बात भी सामने आई है कि बड़ी मात्रा में निवेश करके भारत के किसी चैनल को खरीदने और अपने पक्ष में तथा विरोधी को परेशान करने के लिये अदालतों में NGOs द्वारा जनहित याचिका लगाने के लिये पैसा दिया जा रहा है। (तात्पर्य यह कि यह सब काले धंधे सरकार को जुलाई 2009 में ही पता चल चुके थे, तब भी “भलेमानुष” हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे? और आज भी कह रहे हैं कि “जाँच जारी है…)


अगला दस्तावेज़ कहता है कि “भारतीय टेलीकॉम के बेताज बादशाह” (अर्थात सुनील भारती मित्तल), नीरा राडिया की मदद से ए राजा से मधुर सम्बन्ध बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि दक्षिण अफ़्रीका की कम्पनी के अधिग्रहण करने में आसानी हो (हालांकि राजा के मंत्री बनने से पहले भारती मित्तल पूरी कोशिश कर चुके थे कि राजा मंत्री न बनने पायें)। इसी पत्र में बताया गया है कि राडिया की “विटकॉम” कम्पनी NDTV इमेजिन का भी काफ़ी कामधाम संभालती है (शायद इसीलिये बरखा दत्त, राडिया की लॉबिंग में लगी थीं), “वैष्णवी” कम्पनी टाटा समूह के “पर्यावरण सम्बन्धी” मामलों का “निपटारा” करती है, जबकि “न्यूकॉम” कम्पनी मुकेश अम्बानी की कुछ कम्पनियों की देखरेख करती है। (अब बताईये भला, टाटा-अम्बानी जैसों से मधुर सम्बन्ध रखने वाली राडिया का बाल भी बाँका हो सकता है क्या?) टेलीफ़ोन टेपिंग से पता चला कि जिन चार कम्पनियों को राडिया ने प्रमुख स्पेक्ट्रम और लाइसेंस दिलवाये उसमें से DataComm कम्पनी को वीडियोकॉन के धूत साहब ने मुकेश अम्बानी समूह के एक खास रसूखदार मनोज मोदी से साँठगाँठ कर खड़ा किया, मनोज मोदी भी लगातार नीरा राडिया के सम्पर्क में बने रहे हैं।


इसी दस्तावेज के अगले पेज पर भी टेलीफ़ोन टेपिंग से सम्बन्धित सीबीआई के कुछ नोट्स हैं – जैसे कि रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच लम्बी बातचीत हुई जिसमें टाटा ने दयानिधि मारन को किसी भी कीमत पर मंत्री बनने से रोकने सम्बन्धी पेशकश की है। अप्रत्यक्ष रूप से रतन टाटा Aircell (एयरसेल) कम्पनी के मालिक हैं, और उन्होंने कह दिया था कि यदि मारन संचार मंत्री बने तो वे टेलीकॉम का धंधा ही छोड़ देंगे। नीरा राडिया और कनिमोझी (करुणानिधि की पुत्री) की तरफ़ से बरखा दत्त और वीर संघवी, राजा को मंत्री बनवाने के लिये कांग्रेस में बातचीत कर रहे थे। जबकि दूसरी तरफ़ एयरटेल (मित्तल) चाहते थे कि राजा को मंत्री नहीं बनने दिया जाये और उसे अपना मनपसन्द स्पेक्ट्रम मिल जाये, क्योंकि अनिल अम्बानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस को वह अपना प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। बरखा दत्त और नीरा राडिया की इस काम में मदद के लिये तरुण दास, वीर संघवी तथा सुनील अरोरा (राजस्थान कैडर के एक IAS) तैनात थे। इसी प्रकार भारती एयरटेल चाहती थी कि मारन संचार मंत्री बन जायें ताकि CDMA लॉबी की बजाय GSM लॉबी में प्रभुत्व जमाया जा सके। सुनील मित्तल ने राडिया के समक्ष उनके लिये काम करने की पेशकश भी की, लेकिन राडिया ने कहा कि जब तक वे उधर हैं “टाटा” के हितों पर आँच आने जैसा कोई काम नहीं करेंगी। फ़ोन टेप से यह भी पता चला कि सुहैल सेठ के निवास पर सुनील मित्तल से मिलने एक तीसरा व्यक्ति आया था जो कि राडिया और मित्तल के बीच की कड़ी की तरह काम कर रहा था, यही व्यक्ति बाद में मुकेश अम्बानी से भी मिला और उन्होंने नीरा राडिया और सुनील मित्तल के बीच चल रही संदेहास्पद चालों पर अप्रसन्नता व्यक्त की।



अर्थात नीरा राडिया की घुसपैठ लगभग प्रत्येक बड़े उद्योग घराने, मीडिया के प्रमुख लोगों तथा स्वाभाविक रुप से राजनीतिकों तक भी थी… अगले पत्र में यह बताया गया है कि किस तरह से नीरा राडिया के दो सहयोगियों अमित बंसल और आरएस बंसल ने यूनीटेक के लिये पैसों की जुगाड़ की, यूनिटेक को रीयल एस्टेट के धंध मे हुए नुकसान की भरपाई किस तरह करवाई, किस तरह से सरकार को चूना लगाने हेतु काम किया, आदि-आदि। नीरा राडिया और जहाँगीर पोचा, “नईदुनिया” के छजलानी के भी निरन्तर सम्पर्क में थे, ताकि भारत में एक न्यूज़ चैनल शुरु किया जा सके (सम्भवतः न्यूज़ 9X) जिसे बाद में पीटर और इन्द्राणी मुखर्जी अधिग्रहण कर सकें। लगभग सभी मामलों में काम करने का तरीका एक ही था, मीडिया वालों और बड़े पत्रकारों को महंगे उपहार जैसे कार, विदेश यात्रा (और शायद पद्मश्री भी?) आदि का लालच देकर अपने पक्ष में करना


झारखण्ड में टाटा एक खदान की लीज़ बढ़वाना चाहते थे, मधु कौड़ा उनसे 180 करोड़ मांग रहे थे, लेकिन राडिया ने झारखण्ड के राज्यपाल की मदद से टाटा को खदान की लीज़ आगे बढ़वा दी, उसकी उन्हें फ़ीस (आँकड़ा मालूम नहीं) मिली। नीरा राडिया का वित्तीय कारोबार अफ़्रीकी देशों में भी फ़ैला हुआ है, इसीलिये उनकी फ़र्म “ग्लोबल मिनरल्स” के जरिये अफ़्रीकी देशों में पैसा निवेश करने के लिये करुणानिधि के CA मुथुरामन और IAS अधिकारी प्रदीप बैजल उनसे एक ई-मेल में अनुरोध करते हैं।


ADAG और रिलायंस के झगड़ों, हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स में मुकेश अम्बानी की दिलचस्पी, राडिया और मनोज मोदी द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस को घेरने के षडयन्त्र, मनोज मोदी के मार्फ़त दिल्ली के एक NGO को पैसा देकर न्यायालय में फ़र्जी जनहित याचिकाएं दायर करने… इत्यादि बातों के बारे में पढ़ने के लिये अगला चित्र देखें…


डॉ स्वामी ने आरोप लगाया है कि इस सौदे में सोनिया गाँधी के  केमैन आइलैण्ड स्थित बैंक ऑफ़ अमेरिका के खाते में करोड़ों डॉलर की एंट्रियाँ हुई हैं…। राजनैतिक (और बौद्धिक) क्षेत्रों में अक्सर डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी को गम्भीरता से नहीं लिया जाता, इसकी वजह या तो स्वामी का अधिक बुद्धिमान होना है या फ़िर राजनैतिक दलों में उनके तर्कों के प्रति घबराहट का भाव… कारण जो भी हो, लेकिन डॉ स्वामी ने अकेले दम पर सोनिया गाँधी के खिलाफ़ उनकी नागरिकता, उनके KGB से सम्बन्धों, उन पर बहुमूल्य कलाकृतियों की स्मगलिंग आदि के बारे में कोर्ट केस, आरोपों और याचिकाओं की झड़ी लगा दी है। यदि विपक्ष में जरा भी दम होता और वह एकजुट होता तो उसे डॉ स्वामी का साथ देना चाहिये था? जरा डॉ स्वामी द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में जारी विभिन्न आरोपों की सूची देखिये… http://www.janataparty.org/pressdetail.asp?rowid=58

इस महाघोटाले के सम्बन्ध में और भी पढ़ना चाहते हैं तो निम्न लिंक्स पर जाकर देख सकते हैं…

1) http://www.hinduonnet.com/fline/fl2601/stories/20090116260112800.htm

2) http://jgopikrishnan.blogspot.com/2009/03/spectrum-scandal-and-telecom-ministers.html

3) http://www.businessworld.in/bw/2009_10_24_CBI_Raid_Turns_The_Heat_On_DoT.html

4) http://www.telecomasia.net/content/proving-charges-tricky-indias-spectrum-scandal

सारे मामले-झमेले का लब्बेलुबाब यह है कि सीबीआई के अधिकारी और पुलिस जानती है कि किस नेता या उद्योगपति की असल में क्या “औकात” है, किस-किस ने अपने हाथ कहाँ-कहाँ गन्दे किये हुए हैं, लेकिन सीबीआई हो, पुलिस हो या चाहे सेना ही क्यों न हो… सभी के हाथ बँधे हुए हैं, जनता को महंगाई के बोझ तले इतना दबा दिया गया है कि उसे अपनी रोजी-रोटी से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती… विपक्षी दलों की पूँछ भी सीबीआई के डण्डे तले ही दबा दी गई है, 95% मीडिया या तो बिका हुआ है अथवा “विचारधारा” के आधार पर लॉबिंग कर रहा है। गिने-चुने हिन्दी ब्लॉगर, 50-100 अंग्रेजी ब्लॉगर और कुछ स्वतन्त्र पत्रकार जिन्हें बमुश्किल 1000-2000 लोग भी नहीं पढ़ते, अपना सिर फ़ोड़ रहे हैं, भला ऐसे में जनता तक बात पहुँचेगी कैसे? 

बहरहाल, प्रस्तुत लेख सीरिज में जो भी दस्तावेज़ पेश किये गए हैं उनमें से कुछ इंटरनेट से, कुछ पत्रकार मित्रों से तथा कुछ अन्य सहयोगियों से ई-मेल पर प्राप्त हुए हैं… इनकी विश्वसनीयता की जाँच कर सकना, मेरे जैसे सीमित संसाधनों वाले आम आदमी के बस की बात नहीं है, लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि इसमें से (बल्कि इससे भी अधिक) गोपनीय दस्तावेज़ देश के लगभग सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों और बड़े-बड़े पत्रकारों के पास पहले से ही मौजूद हैं। उनमें से सभी ने इस मामले को दिखाने-छापने से या तो परहेज किया अथवा अपने-अपने स्वार्थ पूर्ति के अनुसार काट-छाँट कर प्रकाशित किया, ऐसा करने के पीछे उनके “आपसी व्यावसायिक सम्बन्ध” हैं।

राजा बाबू आज भी तनकर चल रहे हैं, नीरा राडिया सारा माल-असबाब समेटकर लन्दन में आराम फ़रमा रही हैं… उद्योगपति-IAS अफ़सर के गठजोड़ मस्ती छान रहे हैं, आज तक भ्रष्टाचार के किसी मामले में किसी नेता को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा सका है… तो इसके पीछे कब्र में पैर लटकाये बैठे उनके करुणानिधि टाइप के सैकड़ों मसीहा, “ऊपर” से आदेश लेकर हर काम करते हमारे भलेमानुष प्रधानमंत्री, “त्यागमूर्ति” और भारत के युवाओं को सपने बेचते भोंदू युवराज, गठबन्धन की कीचड़नुमा राजनीतिक मजबूरी, हमारा सड़ा हुआ लोकतांत्रिक सिस्टम, और कुछ हद तक “लूट से बेखबर”, वोटिंग के दिन घर पर आराम फ़रमाने वाले हम-आप-सभी मिलजुलकर जिम्मेदार हैं…

इति श्री 2G स्पेक्ट्रम महाकथा स्रोत सम्पूर्णम्


2G Spectrum Scam, Mobile Service License Scam, A Rajas role in Telecom 2G Scam, Neera Radia and A Raja, Tamilnadu Politics and Kanuranidhi Family, Telecom Ministry and BSNL, Bharti Airtel, Tata DoCoMo and Swan Technologies, Lalit Modi Sunanda Pushkar and IPL, 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, मोबाइल सेवा लाइसेंस घोटाला, दूरसंचार घोटाला और मंत्री ए राजा, नीरा राडिया और ए राजा, तमिलनाडु की राजनीति और करुणानिधि परिवार, दूरसंचार मंत्रालय तथा BSNL, भारती एयरटेल, टाटा डोकोमो तथा स्वान, ललित मोदी सुनन्दा पुष्कर और IPL, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode
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I am a Blogger, Freelancer and Content writer since 2006. I have been working as journalist from 1992 to 2004 with various Hindi Newspapers. After 2006, I became blogger and freelancer. I have published over 700 articles on this blog and about 300 articles in various magazines, published at Delhi and Mumbai. 


I am a Cyber Cafe owner by occupation and residing at Ujjain (MP) INDIA. I am a English to Hindi and Marathi to Hindi translator also. I have translated Dr. Rajiv Malhotra (US) book named "Being Different" as "विभिन्नता" in Hindi with many websites of Hindi and Marathi and Few articles. 

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