भुतहा संयोग या कुछ और ?

Written by गुरुवार, 31 मई 2007 15:51

अब्राहम लिंकन कॉंग्रेस के लिये 1846 में चुने गये,
जॉन एफ़ केनेडी कॉंग्रेस के लिये 1946 में चुने गये..


अब्राहम लिंकन 1860 में राष्ट्रपति चुने गये,
जॉन एफ़ केनेडी 1960 में राष्ट्रपति चुने गये..

दोनों नागरिक कानूनों के जोरदार पैरोकार रहे,
दोनों की पत्नियों ने अपनी-अपनी संतान खोई, जब वे व्हाईट हाऊस में थीं...

दोनों को शुक्रवार को गोली मारी गई,
दोनों के सिर में गोली मारी गई..

आगे और जबरदस्त भुतहा संयोग....

लिंकन की सेक्रेटरी का नाम था केनेडी
केनेडी की सेक्रेटरी का नाम था लिंकन..

दोनों की हत्या दक्षिणपंथियों ने की,
दोनों के उत्तराधिकारी दक्षिणपंथी जॉनसन नामधारी थे..

एण्ड्र्यू जॉनसन, जो लिंकन के उत्तराधिकारी बने, का जन्म हुआ 1808 में,
लिंडन जॉनसन, जो केनेडी के उत्तराधिकारी बने, का जन्म हुआ 1908 में..

लिंकन के हत्यारे जॉन विल्क्स बूथ का जन्म हुआ 1839 में,
केनेडी के हत्यारे ली हार्वे ओसवाल्ड का जन्म हुआ 1939 में..

दोनों के हत्यारों को तीन नामों से जाना जाता था,
दोनों के हत्यारों के नाम की स्पेलिंग में 15 अक्षर आते हैं..

अब जरा कुर्सी थाम लीजिये....

लिंकन की हत्या जिस थियेटर में हुई उसका नाम था "फ़ोर्ड"
केनेडी की हत्या जिस कार में हुई उसका नाम था "फ़ोर्ड"..

लिंकन की हत्या थियेटर में हुई और हत्यारा भागकर गोदाम में छुपा,
केनेडी की हत्या गोदाम से हुई और हत्यारा भागकर थियेटर में छुपा..

बूथ और ओसवाल्ड दोनों हत्यारों की कोर्ट में सुनवाई से पहले ही हत्या हो गई.

हत्या से एक सप्ताह पहले लिंकन की सभा जिस जगह थी उसका नाम था "मुनरो मेरीलैण्ड"
हत्या से एक सप्ताह पहले केनेडी की मुलाकात हुई उसका नाम था "मर्लिन मुनरो"

अब इन संयोगों के बारे में क्या कहा जा सकता है ? किसी इतिहासकार से पूछें या किसी बंगाली जादूगर से...

(स्रोत : ई-मेल मित्रमंडली)

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